दनम नागेंद्र की सदस्यता रद्द: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी ने दाखिल की कैविएट
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक दनम नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का रास्ता खुल गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधायक पाडी कौशिक रेड्डी ने 19 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में कैविएट याचिका दाखिल की, जिसमें माँग की गई है कि नागेंद्र की ओर से कोई याचिका दायर होने पर उनका पक्ष भी सुना जाए।
कैविएट याचिका में क्या माँगा गया
कैविएट याचिका में पाडी कौशिक रेड्डी ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि यदि दनम नागेंद्र उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देते हैं, तो उनकी याचिका पर कोई भी अंतरिम या अन्य आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता का पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाए। यह कानूनी प्रक्रिया उस स्थिति में महत्वपूर्ण हो जाती है जब अदालत किसी मामले में एकपक्षीय राहत देने पर विचार करे।
मूल विवाद: दल-बदल और अयोग्यता का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि दनम नागेंद्र BRS के टिकट पर खैरताबाद से विधायक चुने जाने के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह कदम संविधान की दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून का सीधा उल्लंघन है। इन याचिकाओं में से एक पाडी कौशिक रेड्डी ने दायर की थी, जबकि दूसरी याचिका भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक दल के नेता आलेटी महेश्वर रेड्डी की ओर से दाखिल की गई थी।
तेलंगाना उच्च न्यायालय का फैसला
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दनम नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता दल-बदल विरोधी कानून के तहत रद्द कर दी। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के उस पूर्व फैसले को पलट दिया, जिसमें नागेंद्र को अयोग्य घोषित करने की माँग को खारिज किया गया था।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में खैरताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष और भारत निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना देने का निर्देश दिया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह मामला तेलंगाना की राजनीति में दल-बदल को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा है। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद कई BRS विधायकों के दलबदल की खबरें आई थीं, जिससे विपक्षी दल कमज़ोर हुआ। खैरताबाद सीट के रिक्त होने के बाद उपचुनाव की संभावना बनती है, जो तेलंगाना के राजनीतिक समीकरणों को फिर से परखने का अवसर देगा।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दनम नागेंद्र सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हैं या नहीं। यदि वे उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हैं, तो पाडी कौशिक रेड्डी की कैविएट के चलते सर्वोच्च न्यायालय को एकतरफा आदेश देने से पहले उनका पक्ष सुनना अनिवार्य होगा। खैरताबाद सीट पर संभावित उपचुनाव की तिथि और स्वरूप चुनाव आयोग के अगले कदम पर निर्भर करेगा।