ज्ञानवापी पर जल्द फैसले की मांग तेज, भोजशाला निर्णय के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे पक्षकार

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ज्ञानवापी पर जल्द फैसले की मांग तेज, भोजशाला निर्णय के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे पक्षकार

सारांश

भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले ने ज्ञानवापी पक्षकारों में नई उम्मीद जगाई। शिवलिंग मिलने की तीसरी वर्षगाँठ पर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे पक्षकारों ने एएसआई रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र फैसले और पूजा की अनुमति की माँग की — अयोध्या और भोजशाला की राह पर वाराणसी का अगला अध्याय लिखने की तैयारी।

मुख्य बातें

भोजशाला हाईकोर्ट फैसले के बाद वाराणसी में ज्ञानवापी मामले पर शीघ्र निर्णय की माँग तेज हुई।
16 मई 2022 को ज्ञानवापी के वजूखाने में शिवलिंग मिलने की तीसरी वर्षगाँठ पर पक्षकार काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।
पक्षकार सोहनलाल आर्य ने माँग की कि अयोध्या और भोजशाला की तरह एएसआई रिपोर्ट के आधार पर ज्ञानवापी मामले में फैसला हो।
पक्षकार सीता साहू ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में अभी तक जलाभिषेक और पूजा-पाठ की अनुमति नहीं मिली है।
हिंदू पक्षकार सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने अदालती लड़ाई में जीत का विश्वास जताया और मंदिर मुक्ति की प्रार्थना की।

वाराणसी में ज्ञानवापी मामले के पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने शनिवार, 16 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया और न्यायालय से शीघ्र निर्णय की माँग की। यह दौरा मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला पर हाईकोर्ट के हालिया फैसले के ठीक बाद हुआ, जिसने हिंदू पक्ष के उत्साह को नई ऊर्जा दी है। पक्षकारों ने मंदिर परिसर के बाहर 'हर-हर महादेव' और 'मां श्रृंगार गौरी' के जयकारे भी लगाए।

शिवलिंग मिलने की तीसरी वर्षगाँठ पर आयोजन

हिंदू पक्षकार सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि 16 मई 2022 को ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने वाले स्थान पर शिवलिंग मिला था। उन्होंने कहा, 'हम आशीर्वाद लेने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे हैं और प्रार्थना करते हैं कि आक्रांताओं की ओर से तलवार के दम पर कब्जा किया गया मंदिर जल्द मुक्त हो।' चतुर्वेदी ने अदालती लड़ाई में पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि इस संघर्ष में हिंदू पक्ष की जीत निश्चित है।

एएसआई रिपोर्ट को आधार बनाने की माँग

पैरोकार सोहनलाल आर्य ने कहा कि जिस प्रकार भोजशाला और अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि दोनों मामलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट को निर्णायक आधार बनाया गया, उसी प्रकार ज्ञानवापी मामले में भी एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जाए। उन्होंने सरकार और न्यायालय से माँग की कि वाराणसी में भी श्रीराम जन्मभूमि की तर्ज पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाए।

भोजशाला फैसले से मिला हौसला

पक्षकार सीता साहू ने कहा कि शुक्रवार को भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय रहा। उन्होंने कहा, 'यह जीत बहुत दिनों की मेहनत और परीक्षा के बाद मिली है।' साहू ने ज्ञानवापी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि 16 मई 2022 को शिवलिंग के दर्शन हर्ष का विषय थे, लेकिन अभी भी वहाँ न जलाभिषेक हो पाता है और न पूजा-पाठ की अनुमति है।

आगे क्या होगा

ज्ञानवापी मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। पक्षकारों की माँग है कि एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र सुनवाई पूरी की जाए और हिंदू पक्ष को परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए। भोजशाला फैसले के बाद इस माँग को नई राजनीतिक और सामाजिक गति मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित सार्वजनिक दबाव की रणनीति है — जो अयोध्या से भोजशाला तक बनी न्यायिक मिसालों की कड़ी को ज्ञानवापी से जोड़ने की कोशिश करती है। गौरतलब है कि एएसआई रिपोर्ट पहले ही दाखिल हो चुकी है, लेकिन मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इन मामलों में न्यायिक गति और जन-दबाव के बीच का तनाव ही असली कहानी है — फैसला कब और किस आधार पर आएगा, यह सवाल अब और अधिक प्रासंगिक हो गया है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञानवापी मामले में पक्षकार काशी विश्वनाथ मंदिर क्यों पहुंचे?
16 मई 2022 को ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने की तीसरी वर्षगाँठ पर पक्षकार और अधिवक्ता काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और शीघ्र न्यायिक फैसले के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही भोजशाला हाईकोर्ट फैसले के बाद ज्ञानवापी में भी जल्द निर्णय की माँग को सार्वजनिक रूप से उठाया गया।
भोजशाला फैसले का ज्ञानवापी मामले से क्या संबंध है?
हिंदू पक्षकारों का तर्क है कि जिस प्रकार भोजशाला और अयोध्या में एएसआई रिपोर्ट को निर्णायक आधार बनाया गया, उसी तर्ज पर ज्ञानवापी मामले में भी एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जाए। भोजशाला निर्णय ने इस माँग को नई गति दी है।
ज्ञानवापी में शिवलिंग कब और कहाँ मिला था?
16 मई 2022 को न्यायालय के आदेश पर हुए सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने वाले स्थान पर एक संरचना मिली थी, जिसे हिंदू पक्ष शिवलिंग बताता है। मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
ज्ञानवापी मामले में पक्षकारों की मुख्य माँगें क्या हैं?
पक्षकारों की प्रमुख माँगें हैं — एएसआई रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र न्यायिक फैसला, परिसर में जलाभिषेक और पूजा-पाठ की अनुमति, तथा अयोध्या की तर्ज पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना।
ज्ञानवापी मामले की अभी क्या स्थिति है?
ज्ञानवापी मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है, लेकिन परिसर में हिंदू पक्ष को अभी तक पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं मिली है। सुनवाई जारी है और अंतिम फैसले की प्रतीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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