ज्ञानवापी पर जल्द फैसले की मांग तेज, भोजशाला निर्णय के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे पक्षकार
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में ज्ञानवापी मामले के पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने शनिवार, 16 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया और न्यायालय से शीघ्र निर्णय की माँग की। यह दौरा मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला पर हाईकोर्ट के हालिया फैसले के ठीक बाद हुआ, जिसने हिंदू पक्ष के उत्साह को नई ऊर्जा दी है। पक्षकारों ने मंदिर परिसर के बाहर 'हर-हर महादेव' और 'मां श्रृंगार गौरी' के जयकारे भी लगाए।
शिवलिंग मिलने की तीसरी वर्षगाँठ पर आयोजन
हिंदू पक्षकार सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने बताया कि 16 मई 2022 को ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने वाले स्थान पर शिवलिंग मिला था। उन्होंने कहा, 'हम आशीर्वाद लेने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे हैं और प्रार्थना करते हैं कि आक्रांताओं की ओर से तलवार के दम पर कब्जा किया गया मंदिर जल्द मुक्त हो।' चतुर्वेदी ने अदालती लड़ाई में पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि इस संघर्ष में हिंदू पक्ष की जीत निश्चित है।
एएसआई रिपोर्ट को आधार बनाने की माँग
पैरोकार सोहनलाल आर्य ने कहा कि जिस प्रकार भोजशाला और अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि दोनों मामलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट को निर्णायक आधार बनाया गया, उसी प्रकार ज्ञानवापी मामले में भी एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जाए। उन्होंने सरकार और न्यायालय से माँग की कि वाराणसी में भी श्रीराम जन्मभूमि की तर्ज पर भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
भोजशाला फैसले से मिला हौसला
पक्षकार सीता साहू ने कहा कि शुक्रवार को भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय रहा। उन्होंने कहा, 'यह जीत बहुत दिनों की मेहनत और परीक्षा के बाद मिली है।' साहू ने ज्ञानवापी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि 16 मई 2022 को शिवलिंग के दर्शन हर्ष का विषय थे, लेकिन अभी भी वहाँ न जलाभिषेक हो पाता है और न पूजा-पाठ की अनुमति है।
आगे क्या होगा
ज्ञानवापी मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। पक्षकारों की माँग है कि एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र सुनवाई पूरी की जाए और हिंदू पक्ष को परिसर में पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए। भोजशाला फैसले के बाद इस माँग को नई राजनीतिक और सामाजिक गति मिलने की संभावना है।