झारखंड हाईकोर्ट ने अमन साव एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार से सीआईडी केस डायरी तलब की, 9 जून को अगली सुनवाई

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झारखंड हाईकोर्ट ने अमन साव एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार से सीआईडी केस डायरी तलब की, 9 जून को अगली सुनवाई

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने गैंगस्टर अमन साव के एनकाउंटर की सत्यता पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सीआईडी केस डायरी तलब की है। पुलिस जहाँ इसे वैध कार्रवाई बता रही है, वहीं परिवार इसे सुनियोजित हत्या करार दे रहा है और सीबीआई जांच की माँग कर रहा है। 9 जून की सुनवाई निर्णायक हो सकती है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 मई 2026 को गैंगस्टर अमन साव एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार से सीआईडी केस डायरी तलब की।
अदालत इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है; अगली तारीख 9 जून तय।
पुलिस का दावा — रायपुर जेल से होटवार जेल स्थानांतरण के दौरान हमले के बाद एनकाउंटर हुआ।
अमन साव की माँ ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताया; परिजनों ने सीबीआई जांच की माँग की।
वकील का आरोप — माँ द्वारा दर्ज कराई गई ऑनलाइन एफआईआर अब तक रजिस्टर नहीं हुई।
हाईकोर्ट पहले भी देरी पर सरकार को फटकार लगा चुका है, कहा — कानून से ऊपर कोई नहीं।

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 मई 2026 को चर्चित गैंगस्टर अमन साव के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में राज्य सरकार से सीआईडी (अपराध अन्वेषण विभाग) की केस डायरी तलब की है। अदालत इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है और एनकाउंटर की सत्यता पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच यह कदम उठाया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, अमन साव को जब छत्तीसगढ़ की रायपुर जेल से रांची के होटवार जेल लाया जा रहा था, तब उसे छुड़ाने के लिए पुलिस दल पर हमला हुआ। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान अमन साव भागने की कोशिश कर रहा था, जिसके जवाब में एनकाउंटर करना पड़ा। दूसरी ओर, अमन साव के परिजनों ने इसे सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर करार दिया है।

परिवार के आरोप और सीबीआई जांच की मांग

अमन साव की माँ ने इस पूरे घटनाक्रम को एक साजिश बताते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने जानबूझकर उनके बेटे की हत्या की है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच की माँग की है। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी केवल एनकाउंटर और भागने के पहलू पर केंद्रित है, जबकि परिवार के आरोपों का पक्ष उसमें पूरी तरह अनुपस्थित है।

दूसरी एफआईआर दर्ज न होने पर विवाद

वकील का आरोप है कि अमन साव की माँ द्वारा ऑनलाइन दर्ज कराई गई एफआईआर को अब तक रजिस्टर नहीं किया गया है। उन्होंने माँग की कि परिवार के आरोपों के आधार पर अलग से दूसरी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि सीआईडी एक ही मामले में सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच कर रही है, इसलिए अलग एफआईआर की आवश्यकता नहीं है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट इस मामले में देरी और एफआईआर दर्ज न होने को लेकर पहले भी राज्य सरकार को फटकार लगा चुका है। अदालत ने पूर्व में स्पष्ट रूप से कहा था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस एनकाउंटर की प्रामाणिकता पर न्यायिक निगरानी का दबाव बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

केस डायरी का अवलोकन अदालत को यह तय करने में मदद करेगा कि एनकाउंटर वैध था या नहीं। 9 जून की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या सीबीआई जांच का आदेश दिया जाएगा या सीआईडी की जांच पर्याप्त मानी जाएगी। मामले का नतीजा झारखंड में पुलिस जवाबदेही की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जवाबदेही से बचने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है — जिसे अदालत पहले भी रेखांकित कर चुकी है। यह मामला केवल एक एनकाउंटर की वैधता का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि क्या राज्य पुलिस न्यायिक निगरानी में पारदर्शी रह सकती है। 9 जून की सुनवाई झारखंड में पुलिस जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा होगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमन साव एनकाउंटर मामला क्या है?
गैंगस्टर अमन साव को छत्तीसगढ़ की रायपुर जेल से रांची के होटवार जेल लाए जाने के दौरान पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। पुलिस ने इसे हमले के बाद की वैध कार्रवाई बताया, जबकि परिजनों ने इसे सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर करार दिया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने सीआईडी केस डायरी क्यों तलब की?
हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एनकाउंटर की सत्यता जाँचने के लिए सीआईडी केस डायरी तलब की है। अदालत का कहना है कि सच्चाई जानने के लिए केस डायरी का अवलोकन आवश्यक है, क्योंकि दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं।
अमन साव के परिवार की क्या माँग है?
अमन साव के परिजनों ने इस मामले को सुनियोजित हत्या बताते हुए सीबीआई जांच की माँग की है। उनकी माँ ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जानबूझकर उनके बेटे को मारा और उनकी ऑनलाइन एफआईआर अब तक रजिस्टर नहीं की गई।
इस मामले में अलग एफआईआर दर्ज होगी या नहीं?
याचिकाकर्ता के वकील ने परिवार के आरोपों के आधार पर अलग एफआईआर दर्ज करने की माँग की है। सरकार का तर्क है कि सीआईडी पहले से एक ही मामले में सभी पहलुओं की जांच कर रही है, इसलिए अलग एफआईआर की जरूरत नहीं। अदालत 9 जून की सुनवाई में इस पर निर्णय ले सकती है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
झारखंड हाईकोर्ट ने अमन साव एनकाउंटर मामले की अगली सुनवाई 9 जून को निर्धारित की है। उस तारीख पर सीआईडी केस डायरी के अवलोकन के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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