हर्ष फायरिंग में महिला की मौत: भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह की सजा पर राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित
सारांश
मुख्य बातें
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को 31 दिसंबर 2018 की रात वसंत कुंज के एक फार्महाउस में हुई हर्ष फायरिंग में वास्तुकार डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए बिहार के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राजू कुमार सिंह की सजा की अवधि पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत शनिवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह घटना 31 दिसंबर 2018 की रात नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस में नए साल के जश्न के दौरान हुई थी। आरोप है कि जश्न के दौरान लाइसेंसी पिस्तौल से की गई हर्ष फायरिंग की एक गोली वास्तुकार डॉ. अर्चना गुप्ता को लग गई, जिससे उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद फतेहपुर बेरी थाने में मामला दर्ज हुआ और दिल्ली पुलिस ने जाँच के दौरान राजू कुमार सिंह समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि पिछले महीने राऊज एवेन्यू कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने माना कि भीड़भाड़ वाली जगह पर लाइसेंसी पिस्तौल से फायर करना ऐसा कृत्य था, जिसमें मौत होने की आशंका का आरोपी को पूरा ज्ञान था। हालाँकि, पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर अदालत ने उनकी पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य सह-आरोपियों — राणा राजेश सिंह तथा रामेंद्र सिंह — को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
सुनवाई में क्या हुआ
शुक्रवार की सुनवाई में प्रोबेशन अधिकारी ने अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि राजू कुमार सिंह के खिलाफ बिहार में हत्या का एक मामला भी दर्ज है, जिसमें उन्हें पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सजा की अवधि (क्वांटम ऑफ सेंटेंस) पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
बचाव पक्ष की दलीलें
विधायक की ओर से पेश वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि राजू कुमार सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज जरूर हैं, लेकिन इस मामले से पहले किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था। वकील ने दलील दी कि अधिकतर मामले चुनाव के दौरान राजनीतिक विरोधियों द्वारा दर्ज कराए गए थे, और कई में वह बरी हो चुके हैं या पुलिस ने चार्जशीट ही दाखिल नहीं की।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वकील ने अदालत को आगाह किया कि यदि उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा होती है, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो सकती है। वकील ने यह भी कहा कि वर्ष 2009 से पहले उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, उनकी पत्नी रेनू सिंह विधान परिषद की सदस्य रह चुकी हैं, और उनके पिता करीब दस वर्षों तक गाँव के मुखिया रहे थे।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मृतक डॉ. अर्चना गुप्ता उनके परिवार के लिए भाभी जैसी थीं और घटना के समय उनकी पत्नी भी डांस फ्लोर पर मौजूद थीं। वकील ने कहा कि यह घटना पूरे परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी थी। बचाव पक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि राजू कुमार सिंह करीब दो महीने जेल में रह चुके हैं और मुकदमे के दौरान उन्होंने कभी पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं की। घटना पर दुख जताते हुए बचाव पक्ष ने न्यूनतम सजा की माँग की।
आगे क्या होगा
अदालत शनिवार को सजा की अवधि पर अपना आदेश सुनाएगी। यदि सजा दो वर्ष से अधिक होती है, तो राजू कुमार सिंह की विधायकी पर तत्काल संकट आ सकता है। यह मामला न केवल एक राजनेता की व्यक्तिगत जवाबदेही का सवाल है, बल्कि हर्ष फायरिंग जैसी सामाजिक कुरीति पर न्यायिक रुख को भी रेखांकित करता है।