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राऊज एवेन्यू कोर्ट ने BJP विधायक राजू सिंह को सुनाई 4 साल की सजा, बिहार विधानसभा सदस्यता पर संकट

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राऊज एवेन्यू कोर्ट ने BJP विधायक राजू सिंह को सुनाई 4 साल की सजा, बिहार विधानसभा सदस्यता पर संकट

सारांश

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के साहिबगंज से BJP विधायक राजू सिंह को 2018 की हर्ष फायरिंग में आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता की मौत के मामले में 4 साल की सजा सुनाई है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता जाने का खतरा है।

मुख्य बातें

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने BJP विधायक राजू सिंह को 4 साल की सजा सुनाई।
मामला 31 दिसंबर 2018 की रात हुई हर्ष फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता की 3 जनवरी 2019 को मृत्यु हुई।
अदालत ने राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य आरोपियों राणा सिंह व रामेंद्र सिंह को बरी किया।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत 2 वर्ष या अधिक की सजा पर विधायकी स्वतः खतरे में पड़ती है।
राजू सिंह 2025 में BJP के टिकट पर साहिबगंज से विधायक निर्वाचित हुए थे।
उच्च न्यायालय में अपील और सजा पर संभावित रोक ही आगे की दिशा तय करेगी।

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राजू सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात हुई हर्ष फायरिंग की जानलेवा घटना में चार साल की सजा सुनाई। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 दिसंबर 2018 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में एक गोली आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता को लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु हो गई। अदालत ने इसी मामले में राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य आरोपियों — राणा सिंह एवं रामेंद्र सिंह — को बरी कर दिया।

विधानसभा सदस्यता पर कानूनी संकट

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, यदि संसद या विधानसभा का कोई सदस्य किसी अपराध में दोषी ठहराया जाए और उसे दो वर्ष या उससे अधिक की सजा हो, तो वह दोषसिद्धि की तारीख से ही अयोग्य हो जाता है — जब तक कोई सक्षम अदालत राहत न दे। राजू सिंह को चार साल की सजा मिली है, इसलिए इस प्रावधान के तहत उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है और साहिबगंज विधानसभा सीट रिक्त हो सकती है।

राजू सिंह का राजनीतिक सफर

राजपूत समुदाय से आने वाले राजू सिंह ने अपने राजनीतिक करियर में कई दल बदले। वह 2005 में पहली बार लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के टिकट पर साहिबगंज से बिहार विधानसभा पहुँचे। 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले वह विकासशील इंसान पार्टी (VIP) में शामिल हुए और अपनी सीट बरकरार रखी। 2022 में उन्होंने VIP छोड़कर BJP का दामन थामा, जिसके बाद उन्हें बिहार सरकार में मंत्री पद मिला। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में वह BJP उम्मीदवार के रूप में साहिबगंज से विजयी हुए।

BJP के लिए राजनीतिक झटका

यह फैसला BJP के लिए स्पष्ट रूप से एक बड़ा राजनीतिक झटका है। गौरतलब है कि यह मामला करीब सात वर्षों से अदालत में चल रहा था और अब दोषसिद्धि के बाद पार्टी को बिहार में अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण पहले से ही संवेदनशील हैं।

आगे की कानूनी राह

अब राजू सिंह के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प है। यदि कोई सक्षम अदालत सजा पर रोक लगाती है, तो उनकी सदस्यता अंतरिम रूप से बहाल हो सकती है। फैसले के खिलाफ अपील और उसके परिणाम ही इस मामले की आगे की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लंबित आपराधिक मामलों को पृष्ठभूमि में धकेल देते हैं। यह घटना 2018 की है, फिर भी 2022 में पार्टी ने उन्हें मंत्री पद दिया और 2025 में टिकट — यह सवाल उठता है कि क्या दलों के आंतरिक उम्मीदवार-जाँच तंत्र वास्तव में काम करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के लिली थॉमस फैसले ने धारा 8(3) को मजबूत किया था, लेकिन अपील पर रोक की परंपरा इसे व्यवहार में कमज़ोर बनाती रही है — राजू सिंह के मामले में भी यही रास्ता संभावित है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजू सिंह को किस मामले में सजा मिली है?
राजू सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में सजा मिली है, जिसमें आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता घायल हुई थीं और 3 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु हो गई थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा सुनाई।
क्या राजू सिंह की बिहार विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी?
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पर विधायक या सांसद दोषसिद्धि की तारीख से ही अयोग्य हो जाते हैं। राजू सिंह को 4 साल की सजा मिली है, इसलिए उनकी सदस्यता रद्द होने का स्पष्ट खतरा है — हालाँकि यदि उच्च न्यायालय सजा पर रोक लगाता है तो स्थिति बदल सकती है।
राजू सिंह कितने समय से बिहार के विधायक हैं?
राजू सिंह 2005 से साहिबगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते आए हैं — पहले LJP, फिर VIP और अब BJP के टिकट पर। उन्होंने 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव BJP उम्मीदवार के रूप में जीता था।
इस फैसले में किन अन्य आरोपियों को बरी किया गया?
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इसी मामले में राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य आरोपियों — राणा सिंह और रामेंद्र सिंह — को बरी कर दिया। केवल राजू सिंह को दोषी ठहराया गया।
राजू सिंह के पास अब क्या कानूनी विकल्प हैं?
राजू सिंह राऊज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। यदि अपील के दौरान अदालत सजा पर रोक लगाती है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता अंतरिम रूप से बहाल हो सकती है। इस मामले की आगे की दिशा अदालती कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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