भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा, हर्ष फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की हुई थी मौत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 4 जुलाई 2026 को बिहार के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राजू कुमार सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात हुई हर्ष फायरिंग में महिला डॉक्टर की मौत के मामले में 4 साल की सज़ा सुनाई। अदालत ने विधायक को पीड़ित परिवार को ₹25 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश भी दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
31 दिसंबर 2018 की रात नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस पर नए साल के जश्न के दौरान लाइसेंसी पिस्तौल से की गई हर्ष फायरिंग की एक गोली वास्तुकार डॉ. अर्चना गुप्ता को जा लगी। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद फतेहपुर बेरी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और दिल्ली पुलिस ने जाँच के क्रम में राजू कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया।
अदालत का फैसला और आरोप
राउज एवेन्यू कोर्ट ने पिछले महीने राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 भाग-2 (गैर-इरादतन हत्या) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने माना कि भीड़भाड़ वाली जगह पर लाइसेंसी हथियार से फायर करना ऐसा कृत्य था, जिसमें मृत्यु की आशंका का आरोपी को पूर्ण ज्ञान था।
सज़ा की अवधि पर फैसला सुनाने से पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि राजू कुमार सिंह के विरुद्ध बिहार में हत्या का एक अलग मामला भी दर्ज है, जिसमें उन्हें पटना उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
बचाव पक्ष की दलीलें
विधायक के वकील ने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज अधिकांश आपराधिक मामले चुनावी प्रतिद्वंद्विता के चलते राजनीतिक विरोधियों द्वारा दर्ज कराए गए थे, और कई में वह बरी हो चुके हैं अथवा पुलिस ने चार्जशीट ही दाखिल नहीं की। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि राजू कुमार सिंह लगभग दो महीने जेल में रह चुके हैं और पूरे मुकदमे के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को प्रभावित करने का कोई प्रयास नहीं किया।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मृतक डॉ. अर्चना गुप्ता उनके परिवार के लिए भाभी जैसी थीं और घटना के समय उनकी पत्नी भी डांस फ्लोर पर मौजूद थीं, इसलिए यह घटना पूरे परिवार के लिए व्यक्तिगत त्रासदी रही।
सह-आरोपियों को बरी किया गया
अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर विधायक की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य सह-आरोपियों राणा राजेश सिंह तथा रामेंद्र सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
आगे क्या
यह मामला भाजपा विधायक के राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि दोषसिद्धि के बाद विधायकी की पात्रता पर कानूनी प्रश्न उठना स्वाभाविक है। पीड़ित परिवार को ₹25 लाख के मुआवज़े का आदेश न्यायालय की संवेदनशीलता को दर्शाता है, हालाँकि अपील की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।