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रांची कोर्ट का कड़ा फैसला: 1184 किलो गांजा तस्करी में दो दोषियों को 18-18 साल की सश्रम कैद

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रांची कोर्ट का कड़ा फैसला: 1184 किलो गांजा तस्करी में दो दोषियों को 18-18 साल की सश्रम कैद

सारांश

रांची सिविल कोर्ट ने 2023 में पकड़ी गई ₹2.36 करोड़ मूल्य की 1,184 किलो गांजे की खेप के मामले में दो दोषियों को 18-18 साल की सश्रम कैद सुनाई — झारखंड में नशा तस्करी के खिलाफ हाल के वर्षों का सबसे कड़ा न्यायिक फैसला।

मुख्य बातें

रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त ओंकार नाथ चौधरी ने 25 जून 2025 को फैसला सुनाया।
दोषी गणेश चौधरी और आनंद कुमार को 18-18 वर्ष सश्रम कारावास और प्रत्येक धारा में ₹1 लाख जुर्माना।
तीनों सजाएँ एक साथ चलेंगी; जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कैद का प्रावधान।
2023 में ट्रक से 1,184 किलोग्राम गांजा बरामद; अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹2.36 करोड़ ।
आरोप 16 अप्रैल 2024 को तय; अभियोजन ने दस्तावेज़ी, गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए।
झारखंड में नशा तस्करी मामलों में यह हाल के वर्षों की सबसे कठोर सजाओं में से एक।

रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त ओंकार नाथ चौधरी ने 25 जून 2025 को 1,184 किलोग्राम गांजा तस्करी के एक चर्चित मामले में दो दोषियों को 18-18 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। गणेश चौधरी और आनंद कुमार को एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए यह दंड दिया गया, जो झारखंड में हाल के वर्षों में मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में सुनाई गई सबसे कठोर सजाओं में से एक मानी जा रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2023 का है, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एक ट्रक के ज़रिए बड़ी मात्रा में गांजे की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली, जिसमें 1,184 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित बाज़ार कीमत उस समय लगभग ₹2.36 करोड़ आँकी गई थी। मौके पर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, और तब से वे बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंद हैं।

अदालती कार्यवाही और आरोप

मामले में 16 अप्रैल 2024 को आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेज़ी साक्ष्य, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजक द्वारा पेश किए गए इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पहले दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और गुरुवार, 25 जून को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

सजा का विवरण

अदालत ने तीन अलग-अलग आरोपों — व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ रखना, तस्करी के लिए वाहन का उपयोग करना और आपराधिक साजिश रचना — के तहत प्रत्येक दोषी को 18-18 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक धारा में ₹1-1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीनों सजाएँ एक साथ चलेंगी, यानी दोनों दोषियों को कुल 18 वर्ष की कैद भुगतनी होगी। हालाँकि, यदि वे निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करते, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भी झेलना पड़ सकता है।

झारखंड में नशा तस्करी के विरुद्ध कड़ा संदेश

गौरतलब है कि झारखंड मादक पदार्थों की तस्करी के लिए एक संवेदनशील गलियारे के रूप में चिह्नित रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में नशा तस्करी के मामलों में वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के कड़े फैसले तस्करों के लिए एक स्पष्ट निवारक संदेश भेजते हैं। यह मामला इस मायने में भी महत्त्वपूर्ण है कि अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों सहित एक मज़बूत मुकदमा तैयार किया, जिसने अदालत को कठोरतम दंड देने के लिए प्रेरित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

184 किलोग्राम गांजे की यह खेप और उस पर 18 वर्ष की सजा केवल एक मुकदमे का अंत नहीं है — यह झारखंड की न्यायिक प्रणाली का एक दुर्लभ, निर्णायक संदेश है। अक्सर देखा गया है कि एनडीपीएस मामलों में तकनीकी खामियों या विलंबित अभियोजन के कारण दोषसिद्धि दर कमज़ोर रहती है; यहाँ वैज्ञानिक साक्ष्यों सहित मज़बूत मुकदमे ने उस प्रवृत्ति को तोड़ा। असली सवाल यह है कि क्या यह मिसाल तस्करी के नेटवर्क को वास्तव में बाधित करेगी, या केवल वाहक पकड़े जाते रहेंगे जबकि आपूर्ति श्रृंखला के ऊपरी सिरे बेदाग बचते रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची गांजा तस्करी मामले में किसे और कितनी सजा मिली?
रांची सिविल कोर्ट ने गणेश चौधरी और आनंद कुमार को 18-18 वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक धारा में ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। तीनों सजाएँ एक साथ चलेंगी, इसलिए कुल कैद अवधि 18 वर्ष होगी।
यह मामला मूल रूप से क्या था और गांजा कहाँ से बरामद हुआ?
वर्ष 2023 में पुलिस को गुप्त सूचना के आधार पर एक ट्रक रोककर तलाशी ली गई, जिसमें 1,184 किलोग्राम गांजा मिला। बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹2.36 करोड़ थी और दोनों आरोपियों को मौके से ही गिरफ्तार किया गया था।
एनडीपीएस एक्ट की किन धाराओं के तहत सजा सुनाई गई?
अदालत ने व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने, तस्करी के लिए वाहन का उपयोग करने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत दोषी पाया। प्रत्येक धारा में अलग-अलग 18 वर्ष की सजा और ₹1 लाख जुर्माना लगाया गया।
क्या दोनों दोषियों को कुल 54 वर्ष जेल में रहना होगा?
नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि तीनों सजाएँ एक साथ (concurrent) चलेंगी, इसलिए दोनों दोषियों को कुल 18 वर्ष की कैद भुगतनी होगी। हालाँकि जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कारावास हो सकता है।
यह फैसला झारखंड में नशा तस्करी के संदर्भ में कितना महत्त्वपूर्ण है?
रिपोर्टों के अनुसार, यह झारखंड में हाल के वर्षों में मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में सुनाई गई सबसे कठोर सजाओं में से एक है। इस फैसले को राज्य में नशा तस्करी के विरुद्ध एक कड़े न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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