कमलेश प्रजापत एनकाउंटर: IPS आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मी बरी, सेशन कोर्ट ने हत्या के आरोप खारिज किए
सारांश
मुख्य बातें
जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने 19 जून 2026 को राजस्थान के बहुचर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए IPS अधिकारी आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मियों पर लगाए गए हत्या और फर्जी एनकाउंटर के सभी आरोप खारिज कर दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि 22 अप्रैल 2021 की रात बाड़मेर में हुई यह घटना न तो पूर्व नियोजित हत्या थी और न ही कोई फर्जी एनकाउंटर, बल्कि पुलिस टीम ने जानलेवा खतरे के बीच आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।
मुख्य घटनाक्रम
22 अप्रैल 2021 की रात एक विशेष पुलिस कमांडो दस्ते ने बाड़मेर सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापत के घर पर छापा मारा था। पुलिस को सूचना थी कि वह अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था।
पुलिस के अनुसार, घर को घेरे जाने पर कमलेश ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी महिंद्रा एक्सयूवी से भागने की कोशिश की, मुख्य लोहे का गेट तोड़ा और गाड़ी को पुलिसकर्मियों की ओर मोड़ दिया। जान पर खतरा देखते हुए कमांडो ने आत्मरक्षा में गोलियाँ चलाईं, जिससे घायल कमलेश को अस्पताल में मृत घोषित किया गया। तलाशी के दौरान कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, कई लग्जरी वाहन, डोडा-पोस्त का दूध (अफीम लेटेक्स) और अवैध हथियार बरामद किए गए।
परिवार और समाज के आरोप
एनकाउंटर के बाद कमलेश प्रजापत के परिवार और प्रजापत समाज ने पुलिस के दावे को सिरे से नकार दिया। परिजनों का आरोप था कि यह एक पूर्व नियोजित राजनीतिक हत्या थी, जिसे एनकाउंटर का रूप दिया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कमलेश का तत्कालीन कांग्रेस सरकार में राजस्व एवं कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी के भाई के साथ विवाद चल रहा था।
इस आरोप के बाद पूरे मारवाड़ क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन, धरने और रैलियाँ हुईं, जिससे तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव काफी बढ़ गया।
सीबीआई जाँच और कानूनी पड़ाव
बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मई 2021 में मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए। जाँच पूरी होने के बाद सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला कि उपलब्ध साक्ष्य पुलिस के दावे का समर्थन करते हैं और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सभी पुलिसकर्मियों और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को क्लीन चिट दे दी।
मामले ने अप्रैल 2025 में नया मोड़ लिया जब कमलेश प्रजापत की पत्नी जसोदा ने सीबीआई की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए विरोध याचिका दाखिल की। जोधपुर की एसीजेएम सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए तत्कालीन बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा और पाली एसपी कालूराम रावत समेत 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही हरीश चौधरी और उनके भाई की कथित भूमिका की दोबारा जाँच के निर्देश भी दिए।
सेशन कोर्ट का फैसला
संबंधित पुलिस अधिकारियों और सीबीआई ने एसीजेएम अदालत के आदेश को जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट में चुनौती दी। विस्तृत सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में गंभीर खामियाँ पाईं और उसे रद्द कर दिया।
अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को बहाल रखते हुए स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य हत्या या फर्जी एनकाउंटर के आरोपों का समर्थन नहीं करते। कोर्ट ने माना कि पुलिसकर्मियों ने जानलेवा खतरे की स्थिति में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की थी।
आगे की राह
इस फैसले के साथ ही 24 पुलिसकर्मियों पर हत्या के मुकदमे का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। लगभग पाँच वर्षों की कानूनी लड़ाई और मानसिक तनाव झेलने के बाद यह फैसला राजस्थान पुलिस के इन अधिकारियों और कर्मियों के लिए बड़ी कानूनी राहत है। हालाँकि, कमलेश प्रजापत के परिजनों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प खुला है, और यह देखना होगा कि वे आगे कोई कानूनी कदम उठाते हैं या नहीं।