ट्रंप का ऐलान: ईरान पर ओबामा की गलती नहीं दोहराऊंगा, होर्मुज़ ब्लॉकेड जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 मई को ट्रूथ सोशल पर लिखा कि वे ईरान परमाणु मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसी गलती नहीं दोहराएंगे और अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक समझौता पूरी तरह तैयार न हो, जल्दबाजी न करें। ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ब्लॉकेड को तब तक लागू रखने की बात कही, जब तक कोई समझौता प्रमाणित और हस्ताक्षरित न हो जाए।
ट्रंप का ओबामा पर सीधा हमला
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "हमारे देश की अब तक के सबसे खराब समझौतों में से एक ईरान न्यूक्लियर डील थी, जिसे बराक हुसैन ओबामा और उनकी सरकार के नौसिखियों ने पेश किया और हस्ताक्षर किया था। यह ईरान के लिए न्यूक्लियर हथियार बनाने का सीधा रास्ता था।" उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जो समझौता तैयार कर रही है, वह इसके बिल्कुल विपरीत होगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि बातचीत "सही और अच्छे तरीके से" आगे बढ़ रही है और उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट किया है कि जब तक समय है, वे किसी भी दबाव में समझौता न करें।
होर्मुज़ ब्लॉकेड और परमाणु 'रेड लाइन'
ट्रंप ने कहा कि जब तक कोई समझौता प्रमाणित और हस्ताक्षरित नहीं हो जाता, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ब्लॉकेड पूरी तरह लागू रहेगा। उन्होंने जोड़ा, "दोनों पक्षों को अपना समय लेना चाहिए और इसे सही करना चाहिए — कोई गलती नहीं हो सकती।" साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान न तो परमाणु हथियार बना सकता है और न ही खरीद सकता है — यह उनके लिए अटल शर्त है।
गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जहाँ से दुनिया के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस पर किसी भी प्रकार की नाकेबंदी वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सीधे प्रभावित करती है।
'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट' का नक्शा और अब्राहम समझौते का संदर्भ
इससे एक दिन पहले ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट' का एक नक्शा साझा किया, जिसमें ईरान के नक्शे पर अमेरिकी झंडा दर्शाया गया था। इसके बाद उन्होंने रविवार को लिखा कि वे मध्य पूर्व के सभी देशों का उनके समर्थन के लिए धन्यवाद करते हैं और संकेत दिया कि शायद इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान भी ऐतिहासिक अब्राहम समझौते में शामिल होना चाहे।
अब्राहम समझौता अमेरिकी मध्यस्थता में हुआ वह ऐतिहासिक करार है, जिसके तहत कई अरब देशों ने पहली बार औपचारिक रूप से इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। इस समझौते का नाम पैगंबर इब्राहिम के नाम पर रखा गया, जिन्हें यहूदी, ईसाई और इस्लाम — तीनों धर्मों में सम्मानित माना जाता है। इसका उद्देश्य मध्य पूर्व में शांति, व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ओबामा-युग की ईरान डील
कई दशकों तक अधिकांश अरब देश इजरायल को मान्यता नहीं देते थे, इसलिए अब्राहम समझौते को मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ नई परमाणु वार्ता में लगा है और ओबामा-युग के JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) समझौते को — जिसे ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में रद्द किया था — एक विफल नीति के रूप में बार-बार उद्धृत कर रहे हैं।
आगे क्या
ट्रंप प्रशासन की ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन कोई समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। होर्मुज़ ब्लॉकेड और परमाणु हथियारों पर 'शून्य सहनशीलता' की नीति के साथ, वार्ता का अगला दौर निर्णायक माना जा रहा है। क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, ईरान की अब्राहम समझौते में संभावित भागीदारी मध्य पूर्व की भू-राजनीति को पुनर्परिभाषित कर सकती है।