ट्रंप का ईरान डील पर बड़ा ऐलान: परमाणु हथियार पर स्थायी प्रतिबंध और होर्मुज स्ट्रेट खोलने की शर्त
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 मई 2026 को घोषणा की कि वे ईरान के साथ एक संभावित परमाणु समझौते पर 'आखिरी फैसला' लेने के करीब हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि इस समझौते की दो प्रमुख शर्तें हैं — तेहरान का परमाणु हथियार न बनाने का स्थायी वादा और होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल पुनः खोलना।
परमाणु हथियारों पर स्थायी प्रतिबंध की माँग
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'ईरान को यह मानना होगा कि उनके पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार या बम नहीं होगा।' उनके अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान को परमाणु हथियारों पर स्थायी प्रतिबंध स्वीकार करना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लंबे समय से जारी है और 2015 के JCPOA समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से वार्ता की राह कठिन रही है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना की B-2 बॉम्बर हमलों के बाद — जो कथित तौर पर लगभग 11 महीने पहले हुए — ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाएँ काफी हद तक नष्ट हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे दबा संवर्धित परमाणु सामग्री — जिसे उन्होंने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा — को अमेरिका खोदकर निकालेगा और नष्ट करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट और नौसैनिक नाकेबंदी
ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट — जो वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा वहन करती है — को तुरंत पुनः खोला जाना चाहिए। उनके अनुसार अमेरिकी नौसेना के 'अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी' की वजह से जलमार्ग में फँसे जहाज अब 'घर लौटने' की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी बलों ने पहले ही कई समुद्री बारूदी सुरंगें (माइंस) हटा दी हैं और शेष को ईरान द्वारा हटाया या विस्फोट से नष्ट किया जाएगा। हालाँकि, ट्रंप ने इस ऑपरेशन की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं दिया।
वित्तीय लेन-देन और बातचीत की स्थिति
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 'अगली सूचना तक कोई वित्तीय लेन-देन नहीं होगा।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कम महत्वपूर्ण अन्य मुद्दों' पर सहमति बन गई है, लेकिन बातचीत की विस्तृत स्थिति का खुलासा नहीं किया। गौरतलब है कि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरानी अधिकारियों ने इन शर्तों को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है या नहीं।
उन्होंने कहा कि वे 'आखिरी फैसला लेने के लिए' व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में बैठक करेंगे। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ समन्वय में होगी — ट्रंप के अनुसार संवर्धित सामग्री को नष्ट करने का ऑपरेशन ईरान और IAEA के साथ मिलकर किया जाएगा।
भारत पर असर: ऊर्जा सुरक्षा दाँव पर
भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है और होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी व्यवधान का सीधा असर ऊर्जा सुरक्षा, शिपिंग लागत और घरेलू महँगाई पर पड़ता है। होर्मुज पर तनाव कम होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत को राहत मिल सकती है।
आगे क्या होगा
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और ऊर्जा बाजारों की नजर अब व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम की बैठक के नतीजे पर है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के बयान में कई दावे एकतरफा हैं और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। जब तक तेहरान औपचारिक रूप से शर्तें स्वीकार नहीं करता, यह समझौता अधर में ही रहेगा।