ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' पर चीन का पलटवार: ईरान प्रतिबंधों से बढ़ेगा तनाव
सारांश
मुख्य बातें
चीन ने 20 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'इकोनॉमिक डी-डे' अभियान की कड़ी आलोचना की, जिसके तहत ईरान और उसके साझेदारों पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाने की योजना है। बीजिंग का कहना है कि इस तरह की पाबंदियाँ स्थिति को सुलझाने के बजाय और उलझा सकती हैं।
चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
बीजिंग स्थित चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'प्रतिबंध लगाने और दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं होता है।' उन्होंने आगे कहा कि 'चीन संबंधित पक्षों से जिम्मेदार कदम उठाने और कूटनीतिक व राजनीतिक तरीकों से मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करता है।'
चीन पर सीधा आर्थिक असर
एनालिटिक्स फर्म केप्लर के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, चीन ईरान से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदता है। यही कारण है कि ट्रंप की यह रणनीति सीधे तौर पर अमेरिका-चीन संबंधों को प्रभावित कर सकती है। यदि वाशिंगटन ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों, बैंकों और शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाता है, तो यह द्विपक्षीय तनाव का नया केंद्र बन सकता है।
ट्रंप की 'इकोनॉमिक डी-डे' घोषणा
गुरुवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान किया। उन्होंने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में सफल नहीं रहे।' ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को अब 'अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग पड़ने' का सामना करना पड़ेगा।
प्रतिबंधों का इतिहास और विस्तार
गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी ईरानी तेल की खरीद और परिवहन से जुड़ी चीन स्थित रिफाइनरियों तथा शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। ट्रंप की ताज़ा चेतावनी से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन इन प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। ट्रंप ने अन्य देशों को भी आगाह किया कि ईरान को किसी भी प्रकार की सहायता देने पर उन्हें भी भारी आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। आलोचकों का कहना है कि ईरानी तेल पर निर्भर चीनी अर्थव्यवस्था के लिए ये प्रतिबंध एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं, और बीजिंग इसे सहजता से स्वीकार नहीं करेगा। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में तीनों देशों — अमेरिका, चीन और ईरान — के बीच कूटनीतिक हलचल तेज़ होने की संभावना है।