ट्रंप की 'इकोनॉमिक डी-डे' चेतावनी: ईरान के किन व्यापारिक साझेदारों पर अमेरिकी शिकंजा कसेगा?
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 अगस्त को ईरान के साथ कारोबारी या वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले किसी भी देश या कंपनी को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने इस अभियान को 'इकोनॉमिक डी-डे' की संज्ञा देते हुए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' के तहत ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के इरादे का संकेत दिया है। यह कदम सैन्य दबाव के बाद अमेरिका की आर्थिक रणनीति का अगला मोर्चा माना जा रहा है।
अभियान की रणनीति क्या है
अमेरिका-ईरान संघर्ष अपने छठे महीने की ओर बढ़ रहा है। सैन्य कार्रवाई के बाद अब वाशिंगटन का ध्यान ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित है। इस अभियान में ईरान के तेल की तस्करी, वित्तीय लेनदेन और आय के वैकल्पिक स्रोतों को निशाना बनाने की योजना बताई जा रही है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से बढ़े तनाव और समुद्री आवाजाही में भारी कमी ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से कीमतों और शिपिंग लागत पर दबाव बना हुआ है।
चीन पर सबसे बड़ा दबाव
इस रणनीति का सर्वाधिक प्रभाव चीन पर पड़ने की संभावना है, जो ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके तेल का प्रमुख खरीदार है। यदि अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी रिफाइनरियों, बैंकों या शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, तो इसका सीधा असर अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है।
अमेरिका पहले भी ईरानी तेल की खरीद और परिवहन से जुड़ी चीन स्थित रिफाइनरियों तथा शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। ट्रंप की ताज़ा चेतावनी से संकेत मिलता है कि ऐसे प्रतिबंधों का दायरा और विस्तृत किया जा सकता है।
भारत और अन्य साझेदारों की स्थिति
युद्ध शुरू होने से पहले चीन के अलावा भारत, तुर्की, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और जापान भी ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल थे। नई दिल्ली और तेहरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक संपर्क की लंबी परंपरा रही है।
हालाँकि, विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि भारत पर अमेरिकी कार्रवाई तय है। ट्रंप की चेतावनी का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वाशिंगटन 'ईरान की मदद' या उसके साथ कारोबार की सीमा किस तरह परिभाषित करता है।
संयुक्त अरब अमीरात ने रास्ता बंद किया
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन रोक दिए हैं, जिससे तेहरान के लिए एक महत्वपूर्ण कारोबारी और वित्तीय मार्ग और कमज़ोर हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है।
आगे क्या होगा
आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की 'इकोनॉमिक डी-डे' रणनीति अब केवल ईरान को निशाना बनाने तक सीमित नहीं दिखती — इसका अगला चरण उन देशों और कंपनियों पर दबाव बढ़ाना हो सकता है जो ईरान के लिए तेल, धन, शिपिंग या अन्य आर्थिक रास्ते खुले रखते हैं। इनमें चीन सबसे अहम है, जबकि भारत और अन्य प्रमुख साझेदार अमेरिकी नीति के अगले कदम पर करीबी नज़र रखेंगे।