22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अराघची का अमेरिका को जवाब: 'आर्थिक दबाव अभियान' भी नाकाम रहेगा, 14 साल की विफलताओं का दिया हवाला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अराघची का अमेरिका को जवाब: 'आर्थिक दबाव अभियान' भी नाकाम रहेगा, 14 साल की विफलताओं का दिया हवाला

सारांश

अमेरिका के 'इकोनॉमिक डी-डे' ऐलान के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने 14 साल की अमेरिकी विफलताओं की फेहरिस्त गिनाई और नए आर्थिक दबाव को भी नाकाम बताया — यह तब आया जब अमेरिका-ईरान एमओयू की 60-दिन की समयसीमा बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 22 अगस्त को एक्स पर अमेरिका के नए आर्थिक दबाव अभियान को नाकाम बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का साथ देने वाले देशों के खिलाफ 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान किया।
उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा — सैन्य विफलता के बाद वाशिंगटन अब 'आर्थिक युद्ध' का नाम दे रहा है।
18 जून को हस्ताक्षरित अमेरिका-ईरान एमओयू की 60 दिन की समयसीमा सोमवार को समाप्त हुई, अंतिम समझौता नहीं हुआ।
दोनों देशों के बीच वार्ताओं का भविष्य अभी भी अनिश्चित है।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 22 अगस्त को स्पष्ट किया कि अमेरिका का ईरान-विरोधी नया 'आर्थिक दबाव अभियान' भी वाशिंगटन की पिछली तमाम दबाव नीतियों की तरह असफल होगा। अराघची ने एक्स पर पोस्ट करते हुए पिछले डेढ़ दशक की अमेरिकी विफलताओं की फेहरिस्त गिनाई और नई घोषणा को उसी कड़ी का हिस्सा बताया।

अराघची का सीधा संदेश

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '14 साल पहले: 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध' नाकाम रहे। आठ साल पहले: 'अधिकतम दबाव' नाकाम रहा। पाँच महीने पहले: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' नाकाम रहा। आज: 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' — यह भी नाकाम रहेगा।' यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ऐलान किया कि ईरान का साथ देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान' चलाया जाएगा।

ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' ऐलान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि 'यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।' उन्होंने इस कदम को 'इकोनॉमिक डी-डे' की संज्ञा दी — एक ऐसा शब्द जो द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक मोड़ की याद दिलाता है। यह घोषणा उस समय की गई जब अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक चैनल पहले से ही तनाव में थे।

तेहरान की दोहरी आलोचना

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी अमेरिकी रणनीति पर तीखा हमला बोला। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पर कहा कि एक ओर अमेरिका दावा करता है कि ईरान 'गिरने की कगार पर है', दूसरी ओर वह अपने सभी सहयोगी देशों से मदद माँग रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए वाशिंगटन को और बड़ी नाकामी पैदा करनी पड़ रही है और सैन्य कार्रवाई से कोई नतीजा न निकलने के बाद अब अगली हार को 'आर्थिक युद्ध' का नाम दिया जा रहा है।

समझौते की समयसीमा और अनिश्चितता

18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को सभी मोर्चों पर समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लेबनान से जुड़ा मोर्चा भी शामिल था। इस एमओयू के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत कर अंतिम समझौते तक पहुँचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद वार्ताओं का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।

आगे क्या होगा

एमओयू की समयसीमा बीत जाने और ट्रंप के नए आर्थिक दबाव के ऐलान के बाद अमेरिका-ईरान संबंधों में नई जटिलता आ गई है। आलोचकों का कहना है कि बिना कूटनीतिक रास्ते के आर्थिक दबाव की रणनीति पहले भी ईरान की नीति में बदलाव लाने में नाकाम रही है। यह देखना बाकी है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत का कोई नया दौर शुरू होता है या दोनों देश टकराव की राह पर आगे बढ़ते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार ईरान की वही प्रतिक्रिया। सवाल यह है कि ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' उन देशों को कैसे रोकेगा जो पहले से प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के साथ व्यापार कर रहे हैं। एमओयू की समयसीमा बिना नतीजे के समाप्त होना बताता है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की खाई गहरी है। आर्थिक दबाव तब काम करता है जब कूटनीतिक रास्ता खुला हो — अभी दोनों ही बंद दिखते हैं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अराघची ने अमेरिका के आर्थिक दबाव अभियान पर क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक्स पर कहा कि अमेरिका का नया 'सबसे कठोर आर्थिक अभियान' भी पिछले 14 साल की तरह नाकाम रहेगा। उन्होंने 'इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध', 'अधिकतम दबाव' और 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' जैसी पिछली विफलताओं का हवाला दिया।
ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी-डे' क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि ईरान का साथ देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव' चलाया जाएगा। उन्होंने इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' कहा।
अमेरिका-ईरान एमओयू की समयसीमा क्यों अहम है?
18 जून को दोनों देशों ने 60 दिनों में अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई और कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, जिससे वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
काजेम गरीबाबादी ने अमेरिका की रणनीति पर क्या कहा?
ईरान के उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका एक तरफ ईरान को 'गिरने की कगार पर' बताता है, दूसरी तरफ सहयोगियों से मदद माँगता है। उनके अनुसार, सैन्य कार्रवाई से कोई नतीजा न निकलने के बाद वाशिंगटन अपनी नाकामी को 'आर्थिक युद्ध' का नाम दे रहा है।
ईरान पर अमेरिकी दबाव की रणनीति पहले कितनी सफल रही है?
अराघची के अनुसार, पिछले 14 वर्षों में अमेरिका ने कम से कम चार बड़ी दबाव रणनीतियाँ अपनाईं — कड़े प्रतिबंध, अधिकतम दबाव, बिना शर्त आत्मसमर्पण की माँग और अब आर्थिक अभियान — और हर बार ईरान ने इन्हें नाकाम बताया। आलोचकों का कहना है कि इन रणनीतियों से ईरान की मूल नीति में कोई बदलाव नहीं आया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले