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ईरान-अमेरिका एमओयू समझौता अंतिम चरण में, अराघची बोले — 'इस्लामाबाद एमओयू पहले कभी इतना करीब नहीं था'

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ईरान-अमेरिका एमओयू समझौता अंतिम चरण में, अराघची बोले — 'इस्लामाबाद एमओयू पहले कभी इतना करीब नहीं था'

सारांश

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता निर्णायक मोड़ पर है — विदेश मंत्री अराघची ने एमओयू को 'पहले से कहीं ज्यादा करीब' बताया, जबकि ट्रंप ने ईरान पर फर्जी लीक का आरोप लगाया। इज़राइली PM नेतन्याहू ने भी दो-टूक कहा — ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं होंगे।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 12 जून को कहा कि इस्लामाबाद एमओयू अंतिम रूप देने के बेहद करीब है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान पर मीडिया को 'फर्जी जानकारी' लीक करने का आरोप लगाया और कहा कि 'अच्छी नीयत से डील करना नामुमकिन है।' इज़राइली PM बेंजामिन नेतन्याहू ने शपथ ली कि जब तक वे सत्ता में हैं, ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकेगा; 30 वर्षों से इस अभियान का नेतृत्व करने का दावा किया।
ओमान तट के निकट भारतीय जहाजों पर ईरानी ड्रोन हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर नेतन्याहू ने भी प्रतिक्रिया दी।
व्हाइट हाउस में ट्रंप ने माना कि बातचीत 'आखिरी चरण' में है और दस्तावेज़ तैयार हो रहे हैं।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 12 जून को कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी परमाणु वार्ता के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर मीडिया को 'फर्जी जानकारी' लीक करने का आरोप लगाते हुए तीखी चेतावनी जारी की।

अराघची का बयान और मीडिया को संदेश

विदेश मंत्री अराघची ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'इस्लामाबाद एमओयू पहले कभी इतना करीब नहीं था। इसके फाइनल होने तक, मीडिया को इसके कंटेंट के बारे में अंदाजा लगाने से बचना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की 'जिम्मेदार और पारदर्शी' नीति के तहत सभी विवरण सही समय पर जनता के साथ साझा किए जाएंगे।

गौरतलब है कि यह बयान उस वक्त आया जब व्हाइट हाउस में ट्रंप ने स्वीकार किया था कि बातचीत अपने 'आखिरी चरण' में है और समझौते के दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं — जिसे उन्होंने हफ्तों की कूटनीतिक मशक्कत के बाद संभावित बड़ी सफलता बताया।

ट्रंप की तीखी चेतावनी

इससे ठीक पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'ईरान ने जो फेक न्यूज मीडिया को लीक कीं, उनका उन शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है जिन पर लिखकर सहमति बनी थी। उन्होंने जो कहा, जिसमें डील करने का उनका कमजोर और बेकार बयान भी शामिल है, उसका सच से कोई लेना-देना नहीं है।' ट्रंप ने यह भी कहा कि 'ऐसे लोगों से डील करना बहुत ही बेइज्जती भरा है' और 'अच्छी नीयत से डील करना नामुमकिन है।'

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर दशकों पुरानी कूटनीतिक तनातनी चल रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी ठोस समझौते की उम्मीद लगाए बैठा है।

नेतन्याहू का कड़ा रुख — परमाणु हथियार कभी नहीं

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी 12 जून को एक्स पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया, 'जब तक मैं इज़राइल का प्रधानमंत्री हूँ, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। इस मुद्दे पर मेरे और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच पूरी सहमति है।' उन्होंने कहा कि वे 30 से अधिक वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय अभियान में सबसे आगे रहे हैं।

नेतन्याहू ने आगे कहा, 'अगर यह अभियान नहीं होता, तो ईरान के पास इज़राइल को खत्म करने के लिए बहुत पहले ही परमाणु बम होते। ईरान यहूदी देश को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है और मैं इसे रोकने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा रहा हूँ।'

भारतीय नाविकों की मौत पर भी प्रतिक्रिया

नेतन्याहू ने ओमान तट के निकट जहाजों पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, 'होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ईरान का पूरी तरह नाकाम ड्रोन हमला बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया जब भारत भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा चुका है।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस्लामाबाद एमओयू का अंतिम मसौदा कब सार्वजनिक होगा और क्या यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी ठोस प्रतिबंध को सुनिश्चित कर पाएगा। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप और अराघची के परस्पर विरोधाभासी बयानों के बावजूद, दोनों पक्षों का यह स्वीकार करना कि समझौता करीब है — अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर 'लीक फर्जी हैं' की तीखी प्रतिक्रिया। यह विरोधाभास बताता है कि दोनों पक्ष घरेलू दर्शकों के लिए अलग-अलग कथा गढ़ रहे हैं, जबकि मेज़ पर बातचीत जारी है। नेतन्याहू का हस्तक्षेप यह भी संकेत देता है कि इज़राइल किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त न करे — जो अमेरिका-ईरान वार्ता की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्लामाबाद एमओयू क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
इस्लामाबाद एमओयू ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वार्ता का एक समझौता ज्ञापन है। विदेश मंत्री अराघची के अनुसार यह अब तक की सबसे उन्नत स्थिति में है और इसके अंतिम रूप लेने पर सभी विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे।
ट्रंप ने ईरान पर क्या आरोप लगाए?
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कहा कि ईरान ने मीडिया को 'फर्जी' जानकारी लीक की जिसका वास्तविक समझौते की शर्तों से कोई संबंध नहीं। उन्होंने ईरान के साथ 'अच्छी नीयत से डील करना नामुमकिन' बताया।
नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु हथियारों पर क्या कहा?
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक्स पर स्पष्ट किया कि जब तक वे सत्ता में हैं, ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर ट्रंप के साथ उनकी 'पूरी सहमति' है और वे 30 से अधिक वर्षों से इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत से इस वार्ता का क्या संबंध है?
नेतन्याहू ने होर्मुज़ स्ट्रेट के पास भारतीय जहाजों पर ईरानी ड्रोन हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का उल्लेख करते हुए इसे 'बिल्कुल अस्वीकार्य' बताया। यह घटना ईरान के क्षेत्रीय व्यवहार पर सवाल उठाती है और वार्ता की जटिलता को और बढ़ाती है।
ईरान-अमेरिका एमओयू कब तक अंतिम रूप ले सकता है?
अभी कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। हालाँकि, व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा कि बातचीत 'आखिरी चरण' में है और दस्तावेज़ तैयार हो रहे हैं। विदेश मंत्री अराघची ने भी संकेत दिया कि फैसला जल्द होगा।
राष्ट्र प्रेस
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