ट्रंप-पेजेश्कियन ने ईरान-अमेरिका एमओयू पर किए हस्ताक्षर, परमाणु हथियार न बनाने का वादा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 18 जून 2026 को डिजिटल माध्यम से ऐतिहासिक ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जो महीनों की कूटनीतिक खींचतान के बाद दोनों देशों के बीच एक नई शुरुआत का संकेत है। ट्रंप ने फ्रांस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में इस दस्तावेज़ पर दस्तखत किए।
हस्ताक्षर की परिस्थितियाँ
व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ डैन स्कैविनो ने एक्स पर लिखा, 'आज शाम फ्रांस के वर्सेल्स में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर से ठीक पहले, विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ईरान समझौता ज्ञापन प्राप्त हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए।' यह पोस्ट हस्ताक्षर की आधिकारिक पुष्टि बनी।
रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमज़ोर करते हुए कूटनीति के लिए रास्ता खोला है, जिसे कई लोग असंभव मानते थे। श्मिट ने यह भी कहा कि ईरान ने पहली बार परमाणु हथियार विकसित न करने का वादा किया है, और इस समझौते को भरोसे के बजाय सत्यापन के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
ईरान को मिलने वाले आर्थिक लाभ
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस एमओयू के तहत ईरान को युद्ध के बाद के निवेश, प्रतिबंधों से राहत और अनफ्रीज किए गए फंड से सैकड़ों अरब डॉलर का लाभ मिलने की संभावना है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि तेहरान इस पुनर्निर्माण फंड का उपयोग लेबनान में अपने कमज़ोर पड़ चुके प्रॉक्सी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने के लिए कर सकता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी वित्त विभाग के आँकड़ों का हवाला देते हुए उसी रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष लगभग एक अरब डॉलर का ट्रांसफर भी इसी संदर्भ में दर्ज किया गया था।
हिज़्बुल्लाह कनेक्शन पर चिंताएँ
दो क्षेत्रीय राजनयिकों और दो वरिष्ठ लेबनानी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान ने हिज़्बुल्लाह को जल्द वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का वादा किया है, जिससे समूह को लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के पुनर्गठन में मदद मिल सकती है।
हिज़्बुल्लाह के संचार कार्यालय ने पुष्टि की है कि ईरान संगठन को सार्वजनिक रूप से समर्थन देता है और यह समर्थन फंड वापसी की व्यवस्थाओं की परवाह किए बिना जारी रहेगा। यह बयान समझौते की व्यावहारिक सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अमेरिका की शर्तें और चेतावनी
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपने अनफ्रीज किए गए फंड का उपयोग किसी भी आतंकवादी संगठन के वित्तपोषण के लिए नहीं कर सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समझौते का उल्लंघन होने पर धनराशि को पुनः फ्रीज किया जा सकता है। यह 'सत्यापन-प्रथम' दृष्टिकोण समझौते की दीर्घकालिक स्थिरता की कुंजी होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव के नए केंद्र उभर रहे हैं और वैश्विक कूटनीति एक नाज़ुक मोड़ पर है। आने वाले हफ्तों में इस एमओयू के क्रियान्वयन की निगरानी ही यह तय करेगी कि यह ऐतिहासिक कदम वास्तव में टिकाऊ शांति की नींव बनेगा या महज़ एक कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा।