11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईरान-अमेरिका एमओयू पर पेजेश्कियन का बयान: 'धमकी के आगे गरिमा से कभी समझौता नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईरान-अमेरिका एमओयू पर पेजेश्कियन का बयान: 'धमकी के आगे गरिमा से कभी समझौता नहीं'

सारांश

महीनों के तनाव के बाद ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर डिजिटल हस्ताक्षर किए — होर्मुज नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंध समाप्ति और संप्रभुता के सम्मान के साथ। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इसे ईरानी जनता के धैर्य और जिम्मेदार कूटनीति की जीत बताया।

मुख्य बातें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 18 जून 2026 को अमेरिका-ईरान एमओयू को ऐतिहासिक दस्तावेज करार दिया।
डोनाल्ड ट्रंप और पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से एमओयू पर हस्ताक्षर किए; ट्रंप फ्रांस में इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में थे।
समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई पर अंकुश और संयुक्त राष्ट्र व आईएईए के प्रतिबंध हटाना शामिल।
पेजेश्कियन ने एक्स पर कहा — यह ईरानी जनता के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है।
ट्रंप ने जी-7 के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा — 'रविवार को हमने ईरान के साथ ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।'

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 18 जून 2026 को अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) को एक ऐतिहासिक दस्तावेज करार दिया और कहा कि यह ईरान की स्वतंत्रता, गरिमा और कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने किसी भी धमकी या दबाव के सामने झुककर अपनी संप्रभुता से कभी समझौता नहीं किया।

पेजेश्कियन का एक्स पर बयान

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह संदेश उस देश की आवाज को दिखाता है जिसने किसी भी धमकी या दबाव के सामने अपनी गरिमा और आजादी से समझौता नहीं किया। आज जो फैसला दर्ज किया गया है, वह देश के लोगों के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है।' उन्होंने यह भी कहा कि शांति केवल आपसी सम्मान की भावना से ही हासिल की जा सकती है।

समझौते में क्या शामिल है

महीनों की कूटनीतिक कशमकश के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में इस दस्तावेज पर दस्तखत किए।

समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाना (जिसमें लेबनान का भी उल्लेख है), दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान, तथा संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना शामिल है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और उद्देश्य

जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद आयोजित एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने इस समझौते को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा, 'रविवार को हमने ईरान के साथ एक ऐसा समझौता किया जिसने हमारे सभी लक्ष्य पूरे कर दिए।' उनके अनुसार इस समझौते में सैन्य दबाव और कूटनीति, दोनों का संयोजन रहा।

ट्रंप ने बताया कि मौजूदा संघर्ष को समाप्त करना, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलना और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनके मुख्य उद्देश्य थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती, तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और गहरी होती तथा वैश्विक ऊर्जा बाजार भी बुरी तरह प्रभावित होता।

ईरान का रुख और क्षेत्रीय संदेश

ईरान के इस्लामी गणराज्य ने हमेशा वैश्विक शांति, अपनी संप्रभुता की रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई थीं। यह समझौता मध्य-पूर्व में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालाँकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन आने वाले हफ्तों में होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है — विशेषकर तब जब ईरान पर प्रतिबंध हटाने की समयसीमा और सत्यापन तंत्र अभी सार्वजनिक नहीं हैं। पेजेश्कियन का 'गरिमा' वाला आख्यान घरेलू राजनीति के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कूटनीतिक — ईरान की जनता को यह संदेश देना ज़रूरी था कि रियायत नहीं, बराबरी हुई है। ट्रंप का 'सभी लक्ष्य पूरे' का दावा और पेजेश्कियन का 'कोई समझौता नहीं' — दोनों एक ही दस्तावेज की अलग-अलग व्याख्याएँ हैं, जो बताती हैं कि इस समझौते की भाषा जानबूझकर लचीली रखी गई है। होर्मुज और परमाणु मुद्दे पर ठोस सत्यापन के बिना, यह 'ऐतिहासिक' दस्तावेज टिकाऊ शांति की नींव है या महज एक विराम — यह आने वाले महीने तय करेंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका एमओयू क्या है और इसमें क्या शामिल है?
यह ईरान और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई पर अंकुश, दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान और संयुक्त राष्ट्र व आईएईए के प्रतिबंध हटाना शामिल है। राष्ट्रपति ट्रंप और पेजेश्कियन ने इस पर डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए।
पेजेश्कियन ने इस समझौते पर क्या कहा?
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह समझौता ईरानी जनता के धैर्य, समझदारी भरी राजनीति और जिम्मेदार कूटनीति का नतीजा है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दस्तावेज बताया और कहा कि ईरान ने किसी भी दबाव में अपनी गरिमा से समझौता नहीं किया।
ट्रंप ने इस समझौते को किस तरह से पेश किया?
जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि यह समझौता सैन्य दबाव और कूटनीति दोनों के मेल से संभव हुआ। उन्होंने दावा किया कि इससे उनके सभी लक्ष्य — संघर्ष समाप्ति, होर्मुज को खोलना और ईरान को परमाणु हथियार से रोकना — पूरे हो गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटने से क्या फर्क पड़ेगा?
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। नाकेबंदी हटने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है। ट्रंप के अनुसार नाकेबंदी जारी रहती तो खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ती।
इस समझौते पर हस्ताक्षर कहाँ और कैसे हुए?
ट्रंप और पेजेश्कियन ने डिजिटल माध्यम से इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में दस्तखत किए, जो जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले