शी जिनपिंग ने ट्रंप को दिया भरोसा — ईरान को चीन नहीं दे रहा हथियार: व्हाइट हाउस

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शी जिनपिंग ने ट्रंप को दिया भरोसा — ईरान को चीन नहीं दे रहा हथियार: व्हाइट हाउस

सारांश

ट्रंप का दावा है कि शी जिनपिंग ने व्यक्तिगत रूप से वादा किया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं दे रहा — यह कूटनीतिक भरोसे की बड़ी बात है, लेकिन बीजिंग का ईरानी तेल पर निर्भरता और प्रतिबंध-विरोधी रुख इस आश्वासन की असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 20 मई 2025 को कहा कि शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा।
ट्रंप के अनुसार ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं और उसकी नौसेना व वायुसेना लगभग तबाह है — ये अमेरिकी अनुमान हैं, स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं।
ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान पर 47 साल तक इसे सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत अमेरिका के साथ मिलकर ईरान मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 मई 2025 को पत्रकारों से बातचीत में खुलासा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया है कि बीजिंग ईरान को किसी प्रकार के हथियार नहीं भेज रहा। यह बयान ऐसे नाज़ुक दौर में आया है जब वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए बहुस्तरीय कूटनीतिक दबाव बना रहा है।

ट्रंप का बयान और शी से रिश्ते

व्हाइट हाउस में नए बॉलरूम के निर्माण स्थल का दौरा करते हुए ट्रंप ने मीडिया से कहा, "राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि वह ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहे हैं। यह बहुत अच्छा वादा है और मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूँ।" उन्होंने हालिया मुलाकातों का हवाला देते हुए कहा, "हमने चीन में बहुत अच्छा समय बिताया। राष्ट्रपति शी और मैंने शानदार समय साथ बिताया।" ट्रंप का यह रुख अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव के बावजूद व्यक्तिगत कूटनीति पर उनके भरोसे को दर्शाता है।

ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप के दावे

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुँचा है। उनके अनुसार, "हमारे अनुमान के मुताबिक ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं। उसकी नौसेना और वायुसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।" हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के पास अभी कुछ जवाबी क्षमता शेष है, लेकिन नई सैन्य तैयारी करने की उसकी ताकत काफी कमज़ोर हो गई है। ट्रंप ने कहा, "हमने उनके ज़्यादातर निर्माण केंद्रों को निशाना बनाया है।" ये आँकड़े अमेरिकी प्रशासन के अनुमान हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।

होर्मुज़ स्ट्रेट और क्षेत्रीय सुरक्षा

ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा, "ईरान ने 47 साल तक इन समुद्री रास्तों को सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। यह सिर्फ ईरान का रास्ता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।" उन्होंने बताया कि सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देश ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने इज़रायल को भी "अच्छा सहयोगी" बताया। यह ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हैं।

परमाणु खतरे पर कड़ा रुख

ट्रंप ने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उनके शब्दों में, "अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया, तो सबसे पहले खतरा इज़रायल को होगा। इससे परमाणु तबाही जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।" उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई के काफी करीब पहुँच गया था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगी देशों ने कूटनीति के लिए और समय माँगा।

चीन-ईरान संबंध और तेल का समीकरण

गौरतलब है कि चीन, ईरान के सबसे बड़े आर्थिक साझेदारों में शुमार है और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। ट्रंप ने खुद माना कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति चाहता है क्योंकि उसकी बड़ी ऊर्जा ज़रूरतें इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ट्रंप ने यह भी चेताया कि लंबे समय तक क्षेत्रीय संघर्ष जारी रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति और ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप की यह रणनीति दोहरी है — एक तरफ ईरान पर दबाव, दूसरी तरफ बीजिंग के साथ संवाद के दरवाज़े खुले रखना।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भरोसा किसी सत्यापन तंत्र पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संबंध पर टिका है — जो अमेरिकी विदेश नीति की एक पुरानी कमज़ोरी रही है। चीन, अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, और बीजिंग ने कभी एकतरफा प्रतिबंधों को वैध नहीं माना। ऐसे में शी का 'वादा' और चीन की ज़मीनी नीति के बीच का फ़ासला मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखा रह जाता है। ईरान की 82% मिसाइलें नष्ट होने का दावा भी अमेरिकी अनुमान है — स्वतंत्र सत्यापन के बिना इसे तथ्य मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने शी जिनपिंग के बारे में क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया है कि चीन ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहा। ट्रंप ने इस वादे को 'बहुत अच्छा' बताया और कहा कि वे शी की बात पर भरोसा करते हैं।
ट्रंप के अनुसार ईरान की सैन्य स्थिति अभी कैसी है?
ट्रंप के अनुसार ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं और उसकी नौसेना व वायुसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी है। हालाँकि ये अमेरिकी प्रशासन के अनुमान हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने 47 साल तक होर्मुज़ स्ट्रेट को सैन्य दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए कहा कि यह केवल ईरान का नहीं है।
ईरान के परमाणु हथियार पर अमेरिका का रुख क्या है?
ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने चेताया कि अगर ईरान परमाणु हथियार पा गया तो सबसे पहले खतरा इज़रायल को होगा और इससे परमाणु तबाही जैसी स्थिति बन सकती है।
चीन और ईरान के बीच संबंध क्यों अहम हैं?
चीन ईरान के सबसे बड़े आर्थिक साझेदारों में से एक है और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। बीजिंग हमेशा से ईरान पर एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है और परमाणु मुद्दे पर बातचीत के ज़रिए समाधान की वकालत करता आया है।
राष्ट्र प्रेस
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