शी जिनपिंग ने ट्रंप को दिया भरोसा — ईरान को चीन नहीं दे रहा हथियार: व्हाइट हाउस
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 मई 2025 को पत्रकारों से बातचीत में खुलासा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया है कि बीजिंग ईरान को किसी प्रकार के हथियार नहीं भेज रहा। यह बयान ऐसे नाज़ुक दौर में आया है जब वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए बहुस्तरीय कूटनीतिक दबाव बना रहा है।
ट्रंप का बयान और शी से रिश्ते
व्हाइट हाउस में नए बॉलरूम के निर्माण स्थल का दौरा करते हुए ट्रंप ने मीडिया से कहा, "राष्ट्रपति शी ने मुझसे वादा किया है कि वह ईरान को कोई हथियार नहीं भेज रहे हैं। यह बहुत अच्छा वादा है और मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूँ।" उन्होंने हालिया मुलाकातों का हवाला देते हुए कहा, "हमने चीन में बहुत अच्छा समय बिताया। राष्ट्रपति शी और मैंने शानदार समय साथ बिताया।" ट्रंप का यह रुख अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव के बावजूद व्यक्तिगत कूटनीति पर उनके भरोसे को दर्शाता है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप के दावे
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुँचा है। उनके अनुसार, "हमारे अनुमान के मुताबिक ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो चुकी हैं। उसकी नौसेना और वायुसेना लगभग पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।" हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के पास अभी कुछ जवाबी क्षमता शेष है, लेकिन नई सैन्य तैयारी करने की उसकी ताकत काफी कमज़ोर हो गई है। ट्रंप ने कहा, "हमने उनके ज़्यादातर निर्माण केंद्रों को निशाना बनाया है।" ये आँकड़े अमेरिकी प्रशासन के अनुमान हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
होर्मुज़ स्ट्रेट और क्षेत्रीय सुरक्षा
ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा, "ईरान ने 47 साल तक इन समुद्री रास्तों को सैन्य हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। यह सिर्फ ईरान का रास्ता नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।" उन्होंने बताया कि सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देश ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के साथ मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने इज़रायल को भी "अच्छा सहयोगी" बताया। यह ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हैं।
परमाणु खतरे पर कड़ा रुख
ट्रंप ने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उनके शब्दों में, "अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया, तो सबसे पहले खतरा इज़रायल को होगा। इससे परमाणु तबाही जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।" उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई के काफी करीब पहुँच गया था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगी देशों ने कूटनीति के लिए और समय माँगा।
चीन-ईरान संबंध और तेल का समीकरण
गौरतलब है कि चीन, ईरान के सबसे बड़े आर्थिक साझेदारों में शुमार है और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार बना हुआ है। ट्रंप ने खुद माना कि चीन मिडिल ईस्ट में शांति चाहता है क्योंकि उसकी बड़ी ऊर्जा ज़रूरतें इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ट्रंप ने यह भी चेताया कि लंबे समय तक क्षेत्रीय संघर्ष जारी रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति और ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप की यह रणनीति दोहरी है — एक तरफ ईरान पर दबाव, दूसरी तरफ बीजिंग के साथ संवाद के दरवाज़े खुले रखना।