ट्रंप-शी जिनपिंग की 'ऐतिहासिक' वार्ता: ताइवान, एआई, परमाणु निरस्त्रीकरण और व्यापार पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 मई 2025 को पुष्टि की कि उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ईरान, व्यापार, साइबर ऑपरेशन्स और परमाणु निरस्त्रीकरण जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत बातचीत हुई। ट्रंप ने इस वार्ता को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिका-चीन संबंधों में व्यापार और तकनीक को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं।
ताइवान: सबसे संवेदनशील मुद्दा
ट्रंप के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच सबसे लंबी चर्चा ताइवान को लेकर हुई। शी जिनपिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ताइवान की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश के विरुद्ध हैं और ऐसा होने पर गंभीर सैन्य टकराव की आशंका है। ट्रंप ने कहा, 'शी जिनपिंग नहीं चाहते कि वहाँ आज़ादी की लड़ाई जैसी स्थिति बने, क्योंकि इससे गंभीर संघर्ष पैदा हो सकता है।'
चीनी राष्ट्रपति ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने पर भी आपत्ति जताई और यह भी पूछा कि किसी संभावित सैन्य संघर्ष में क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा। ट्रंप ने इस सवाल पर कहा, 'मैंने कहा कि मैं इस बारे में बात नहीं करता।' ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका जल्द तय करेगा कि ताइवान को आगे हथियार बेचे जाएंगे या नहीं।
एआई और साइबर सुरक्षा पर सहयोग की संभावना
दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित उपयोग पर भी सार्थक बातचीत हुई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन एआई से जुड़े सुरक्षा नियमों पर मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'एआई बहुत शानदार तकनीक है — स्वास्थ्य, चिकित्सा, सैन्य और अन्य क्षेत्रों में इसकी अपार संभावनाएँ हैं।' ट्रंप के अनुसार, दोनों देश भविष्य में एआई से उत्पन्न जैविक, परमाणु और साइबर खतरों को नियंत्रित करने के लिए भी सहयोग पर विचार कर सकते हैं।
साइबर ऑपरेशन्स और जासूसी के मुद्दे पर भी खुलकर चर्चा हुई। जब ट्रंप से अमेरिका में चीनी जासूसी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हम भी उन पर खूब नज़र रखते हैं।' यह टिप्पणी उस बढ़ते साइबर तनाव की पृष्ठभूमि में आई है जो दोनों देशों के बीच पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है।
व्यापार: बोइंग सौदे का बड़ा ऐलान
व्यापार के मोर्चे पर ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने बोइंग के 200 से अधिक विमान खरीदने का समझौता किया है और भविष्य में यह संख्या 750 तक पहुँच सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इन विमानों के इंजन जनरल इलेक्ट्रिक के होंगे। गौरतलब है कि यह सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ और तकनीकी प्रतिबंधों को लेकर तनाव चरम पर है।
परमाणु निरस्त्रीकरण और ईरान
दोनों नेताओं ने परमाणु हथियारों में कमी और वैश्विक निरस्त्रीकरण पर भी चर्चा की, जिसमें अमेरिका, चीन और रूस की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। ट्रंप ने कहा, 'हमने परमाणु-मुक्त दुनिया बनाने का मुद्दा उठाया — यह एक बहुत अच्छा विचार साबित होगा।'
ईरान के मसले पर ट्रंप ने बताया कि शी जिनपिंग इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, 'उनकी राय बहुत स्पष्ट है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।'
आगे क्या होगा
यह वार्ता अलास्का के एंकरेज की ओर जाते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सामने आई। ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति शी बेहद शानदार व्यक्ति हैं। ये दो दिन काफी ऐतिहासिक रहे।' विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा जारी रहने के बावजूद दोनों देश रणनीतिक मुद्दों पर संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि व्यापार, तकनीक, सैन्य प्रभाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर मतभेद अभी भी गहरे हैं — और ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों की सबसे नाज़ुक कड़ी बना हुआ है।