अमेरिका के ईरान पर नए हवाई हमले, तेहरान ने पश्चिम एशिया से तेल निर्यात रोकने की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सेना ने 23 जुलाई 2026 को ईरान के सैन्य ठिकानों पर बुधवार शाम करीब 5:30 बजे IST नए हवाई हमले शुरू किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह अभियान ईरान की उस क्षमता को कमज़ोर करता रहेगा जिससे वह आम नाविकों और क्षेत्रीय जलमार्गों में चलने वाले वाणिज्यिक जहाज़ों को धमकाता है।
ट्रंप की खुली चेतावनी
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भी जहाज़ पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया, तो अमेरिका बमबारी कर एक पुल या पावर प्लांट को नष्ट कर देगा — जिसमें राजधानी तेहरान के निकट या उसके भीतर स्थित संयंत्र भी शामिल हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है और क्षेत्रीय देश सतर्क हो गए हैं।
ईरान की जवाबी धमकी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के मुख्य सैन्य मुख्यालय खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ईरानी बुनियादी ढाँचे पर हमला करता है, तो ईरान पश्चिम एशिया से सभी तेल निर्यात बंद कर देगा और पूरे क्षेत्र में तेल, गैस, बिजली तथा आर्थिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाएगा। ईरान ने कहा कि अमेरिका की लगातार धमकियाँ इस संघर्ष को क्षेत्र और उससे परे तक विस्तार देने का कारण बनेंगी।
मंगलवार रात के हमले और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
मंगलवार देर रात भी अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमलों की एक और श्रृंखला चलाई, जिसके बाद तेहरान के आसमान में ईरानी वायु रक्षा प्रणालियाँ सक्रिय हो गईं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इज़रायल सीमा के निकट जॉर्डन के एक शहर पर मिसाइल हमला किया, जिसके बाद बहरीन और सऊदी अरब में भी सतर्कता की चेतावनियाँ जारी की गईं। गौरतलब है कि यह घटनाक्रम क्षेत्रीय तनाव के एक नए और खतरनाक दौर का संकेत देता है।
अमेरिकी जनमत
पिछले सप्ताह जारी द वाशिंगटन पोस्ट-इप्सोस के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 68 प्रतिशत अमेरिकी वयस्क मानते हैं कि ईरान के साथ युद्ध लड़ना उचित नहीं है, जबकि केवल 28 प्रतिशत ने इसे सही ठहराया। यह आँकड़ा दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीति घरेलू समर्थन के बिना आगे बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
होर्मुज़ स्ट्रेट, जिससे दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, पर किसी भी नाकेबंदी का वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर तत्काल और गंभीर असर पड़ सकता है। भारत समेत कई एशियाई देश इस जलमार्ग पर अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए निर्भर हैं, और स्थिति के और बिगड़ने पर तेल की कीमतों में उछाल की आशंका बनी हुई है।