झारखंड परीक्षा विवाद: BJP नेताओं ने की CBI जांच की माँग, छात्रों की जीत पर बोले — 'दूध का दूध होगा'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड परीक्षा विवाद में 18 अगस्त को नया मोड़ आया जब राज्य सरकार ने आंदोलनरत छात्रों की कुछ प्रमुख माँगें मान लीं। इस घटनाक्रम पर विभिन्न दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं — अधिकांश ने सरकार के कदम को छात्रों की जीत तो माना, लेकिन केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जांच की माँग को लेकर दबाव बनाए रखा।
मुख्य घटनाक्रम
झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। सरकार द्वारा कुछ परीक्षाएँ रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं। जेपीएससी 2023-24 और बैकलॉग परीक्षाएँ पहले ही रद्द की जा चुकी थीं, और सभी टीडीएल परीक्षाएँ भी निरस्त हो चुकी थीं।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि झारखंड सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह से नियुक्तियाँ की गई थीं, उसी को लेकर बच्चे आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की बात सरकार को माननी पड़ी। लेकिन सीबीआई की जांच की माँग नहीं मानी जा रही है — सीबीआई जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।'
बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष संजय सरावगी ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा, 'छात्रों की जीत हुई। लेकिन झारखंड में संगठित गिरोह बनाकर पेपर लीक किया जा रहा है। सीबीआई से जांच कराने में क्या दिक्कत है? छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।'
BJP नेता आरपी सिंह ने कहा कि परीक्षाएँ रद्द करना और घोटाले की जांच करना — दोनों अलग-अलग मामले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के मुख्यमंत्री जांच से भाग रहे हैं।
BJP सांसद करण भूषण सिंह ने कहा कि परीक्षा रद्द करना सरकार की मजबूरी थी और इतने लंबे आंदोलन का होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि जहाँ BJP ने नो-टॉलरेंस नीति अपनाई, वहीं झारखंड में जांच से बचने की कोशिश हो रही है।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी (AAP) नेता प्रियंका कक्कड़ ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना की और कहा कि पार्टी विद्यार्थियों के साथ हर तरह से खड़ी है।
समाजवादी पार्टी (SP) नेता आशुतोष वर्मा ने व्यापक सवाल उठाते हुए कहा कि चाहे NTA हो, राज्य सरकार की परीक्षा एजेंसियाँ हों या कोई अन्य प्राधिकरण — यदि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है, तो उसे परीक्षा के पेपर छापने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? उन्होंने माँग की कि जब तक कंपनी अपना नाम साफ न कर ले, उसे यह ज़िम्मेदारी न दी जाए।
आम जनता और छात्रों पर असर
झारखंड में परीक्षा घोटाले का सीधा असर उन हज़ारों युवाओं पर पड़ा है जिन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाए। परीक्षाएँ रद्द होने से उनकी मेहनत अधर में लटक गई है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या होगा आगे
CBI जांच की माँग अभी भी अनुत्तरित है। छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक इस माँग पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ झारखंड सरकार पर अगले कदम को लेकर नज़रें टिकी हैं।