18 अगस्त 2026
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झारखंड परीक्षा विवाद: BJP नेताओं ने की CBI जांच की माँग, छात्रों की जीत पर बोले — 'दूध का दूध होगा'

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झारखंड परीक्षा विवाद: BJP नेताओं ने की CBI जांच की माँग, छात्रों की जीत पर बोले — 'दूध का दूध होगा'

सारांश

झारखंड परीक्षा विवाद में सरकार के झुकने को विपक्ष ने छात्रों की जीत तो माना, लेकिन CBI जांच की माँग पर अड़े रहे। BJP से लेकर AAP और SP तक — सभी ने एक स्वर में पूछा: पेपर लीक के दोषियों की जांच से सरकार क्यों भाग रही है?

मुख्य बातें

झारखंड सरकार ने आंदोलनरत छात्रों की कुछ प्रमुख माँगें मानते हुए परीक्षाएँ रद्द कीं, जिसमें जेपीएससी 2023-24 और बैकलॉग परीक्षाएँ शामिल हैं।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी , मंत्री रामकृपाल यादव , नेता आरपी सिंह और सांसद करण भूषण सिंह ने CBI जांच की माँग की।
BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि झारखंड में संगठित गिरोह पेपर लीक करा रहा है और मुख्यमंत्री जांच से बच रहे हैं।
AAP नेता प्रियंका कक्कड़ ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना की और समर्थन जताया।
SP नेता आशुतोष वर्मा ने ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को परीक्षा पेपर छापने की अनुमति देने पर सवाल उठाए।

झारखंड परीक्षा विवाद में 18 अगस्त को नया मोड़ आया जब राज्य सरकार ने आंदोलनरत छात्रों की कुछ प्रमुख माँगें मान लीं। इस घटनाक्रम पर विभिन्न दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं — अधिकांश ने सरकार के कदम को छात्रों की जीत तो माना, लेकिन केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जांच की माँग को लेकर दबाव बनाए रखा।

मुख्य घटनाक्रम

झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। सरकार द्वारा कुछ परीक्षाएँ रद्द किए जाने के बाद राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं। जेपीएससी 2023-24 और बैकलॉग परीक्षाएँ पहले ही रद्द की जा चुकी थीं, और सभी टीडीएल परीक्षाएँ भी निरस्त हो चुकी थीं।

BJP नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि झारखंड सरकार को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी है। उन्होंने कहा, 'जिस तरह से नियुक्तियाँ की गई थीं, उसी को लेकर बच्चे आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की बात सरकार को माननी पड़ी। लेकिन सीबीआई की जांच की माँग नहीं मानी जा रही है — सीबीआई जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।'

बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष संजय सरावगी ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा, 'छात्रों की जीत हुई। लेकिन झारखंड में संगठित गिरोह बनाकर पेपर लीक किया जा रहा है। सीबीआई से जांच कराने में क्या दिक्कत है? छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।'

BJP नेता आरपी सिंह ने कहा कि परीक्षाएँ रद्द करना और घोटाले की जांच करना — दोनों अलग-अलग मामले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के मुख्यमंत्री जांच से भाग रहे हैं।

BJP सांसद करण भूषण सिंह ने कहा कि परीक्षा रद्द करना सरकार की मजबूरी थी और इतने लंबे आंदोलन का होना सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि जहाँ BJP ने नो-टॉलरेंस नीति अपनाई, वहीं झारखंड में जांच से बचने की कोशिश हो रही है।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी (AAP) नेता प्रियंका कक्कड़ ने छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना की और कहा कि पार्टी विद्यार्थियों के साथ हर तरह से खड़ी है।

समाजवादी पार्टी (SP) नेता आशुतोष वर्मा ने व्यापक सवाल उठाते हुए कहा कि चाहे NTA हो, राज्य सरकार की परीक्षा एजेंसियाँ हों या कोई अन्य प्राधिकरण — यदि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है, तो उसे परीक्षा के पेपर छापने की अनुमति कैसे दी जा सकती है? उन्होंने माँग की कि जब तक कंपनी अपना नाम साफ न कर ले, उसे यह ज़िम्मेदारी न दी जाए।

आम जनता और छात्रों पर असर

झारखंड में परीक्षा घोटाले का सीधा असर उन हज़ारों युवाओं पर पड़ा है जिन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी में वर्षों लगाए। परीक्षाएँ रद्द होने से उनकी मेहनत अधर में लटक गई है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्या होगा आगे

CBI जांच की माँग अभी भी अनुत्तरित है। छात्रों का आंदोलन तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक इस माँग पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ झारखंड सरकार पर अगले कदम को लेकर नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दोषी कौन है और उसे जवाबदेह कब ठहराया जाएगा। CBI जांच की माँग विपक्ष के लिए एक सुविधाजनक राजनीतिक हथियार भी है — खासकर तब, जब NEET जैसे राष्ट्रीय पेपर लीक मामलों में केंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को परीक्षा पेपर छापने की अनुमति देने का मुद्दा केवल झारखंड तक सीमित नहीं — यह पूरे देश में परीक्षा प्रशासन की संरचनागत खामियों को उजागर करता है। जब तक जांच एजेंसी और परिणाम स्पष्ट नहीं होते, छात्रों का भरोसा बहाल करना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड परीक्षा विवाद क्या है?
झारखंड में सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। जेपीएससी 2023-24, बैकलॉग और टीडीएल परीक्षाएँ रद्द की जा चुकी हैं।
BJP नेताओं ने CBI जांच की माँग क्यों की?
BJP नेताओं का कहना है कि परीक्षाएँ रद्द करना पर्याप्त नहीं है — घोटाले के असली दोषियों की पहचान के लिए स्वतंत्र CBI जांच ज़रूरी है। उनका आरोप है कि झारखंड सरकार जांच से बच रही है।
झारखंड सरकार ने छात्रों की कौन-सी माँगें मानीं?
सरकार ने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की माँग मान ली, जिसमें जेपीएससी 2023-24 और बैकलॉग परीक्षाएँ शामिल हैं। हालाँकि, CBI जांच की माँग अभी तक नहीं मानी गई है।
समाजवादी पार्टी ने इस मामले में क्या सवाल उठाया?
SP नेता आशुतोष वर्मा ने पूछा कि यदि कोई कंपनी ब्लैकलिस्ट हो चुकी है, तो उसे परीक्षा के पेपर छापने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। उन्होंने यह सवाल NTA और राज्य परीक्षा एजेंसियों दोनों पर उठाया।
इस विवाद का छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
हज़ारों युवाओं की सरकारी नौकरी की तैयारी अधर में लटक गई है। परीक्षाएँ रद्द होने से उनका समय और संसाधन दोनों प्रभावित हुए हैं, और भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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