सीडब्ल्यूजी 2026: राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने ग्लासगो के पदकवीर पैरा एथलीट्स को किया सम्मानित
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पदक विजेता पैरा एथलीट्स को बुके और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। यह मुलाकात उन खिलाड़ियों के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट के ठीक बाद हुई, जिन्होंने ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद किया था।
सम्मान समारोह का माहौल
राज्यमंत्री वर्मा ने एथलीट्स को संबोधित करते हुए कहा, 'भारत के लिए मेडल जीतने पर आपको दिल से बधाई। ग्लास्गो में आपने मेडल जीतकर सभी देशवासियों को गदगद किया है। सभी को आप पर गर्व है।' खिलाड़ियों ने इस प्रोत्साहन को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा बताया।
गोल्ड मेडलिस्ट सोमन राणा की प्रतिक्रिया
मेंस शॉट पुट एफ57 इवेंट में स्वर्ण पदक विजेता सोमन राणा ने कहा, 'गेम्स में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री और राज्यमंत्री से मिलना और उनसे प्रेरणा पाना हमें बहुत खुशी और गर्व से भर देता है। ऐसी प्रेरणा मिलने से हमें भविष्य के गेम्स में और भी मेडल जीतने का जोश मिलता है।'
शुभम जुयाल: फौजी से पैरा चैंपियन तक
इसी इवेंट के सिल्वर मेडलिस्ट शुभम जुयाल — जो एक सैनिक और पैरा एथलीट दोनों हैं — ने बताया कि गोल्ड और सिल्वर, दोनों पदक भारतीय आर्मी के नाम रहे। उन्होंने एक ऐतिहासिक तथ्य साझा किया: '2002 से ग्लासगो 2026 से पहले तक भारत ने कुल 6 पदक जीते थे, जबकि इस अकेले संस्करण में हमने उस आँकड़े को पार कर लिया।' जुयाल ने ग्लासगो में स्थानीय भारतीय समुदाय के भरपूर समर्थन का भी उल्लेख किया।
शर्मिला धनखड़: ऐतिहासिक पहला गोल्ड
विमेंस शॉट पुट एफ57 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कहा, 'कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में यह हमारा पहला गोल्ड है। अपने देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।' यह उपलब्धि भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है।
पैरा-स्पोर्ट्स की बढ़ती ताकत
गौरतलब है कि भारत में पैरा-स्पोर्ट्स पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से उभरा है। सीडब्ल्यूजी 2026 में पैरा एथलीट्स ने जोड़ियों में — गोल्ड और सिल्वर — पदक जीतकर यह साबित किया कि भारतीय पैरा-खेल अब वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी ताकत बन चुका है। सरकार का यह सम्मान-समारोह खिलाड़ियों के मनोबल को और ऊँचा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।