चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर महाकाल का दिव्य दर्शन और भस्म आरती का आयोजन

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चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर महाकाल का दिव्य दर्शन और भस्म आरती का आयोजन

सारांश

उज्जैन में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर बाबा महाकाल का दरबार भक्तों से भरा रहा। भस्म आरती के समय श्रद्धालुओं ने बाबा के अद्भुत दर्शन किए। यह आयोजन पूजा और भक्ति का एक अनूठा प्रदर्शन था।

Key Takeaways

  • महाकाल का दिव्य दर्शन: भक्तों का विशाल सैलाब हर साल भस्म आरती के दौरान होता है।
  • भस्म आरती का आयोजन: इसमें भस्म चढ़ाई जाती है जो वैराग्य का प्रतीक है।
  • उज्जैन का महत्व: यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
  • भक्तों की भक्ति: महिलाएं घूंघट और पुरुष धोती पहनकर आते हैं।
  • विशेष पूजा सामग्री: पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर, और शहद शामिल हैं।

उज्जैन, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर गुरुवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखने को मिली। सुबह की भस्म आरती के दौरान हजारों भक्त बाबा के दर्शन के लिए उमड़े। मंदिर परिसर 'बाबा महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।

भक्त ब्रह्म मुहूर्त से ही लंबी कतारों में खड़े होकर बाबा के दर्शन का इंतजार कर रहे थे। सबसे पहले भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया और उसके बाद पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों का रस शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इस अवसर पर महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन प्रदान किए जाते हैं।

यह आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक मानी जाती है। बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार की जाती है। आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलोग्राम भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा का पालन किया जाता है।

भस्म आरती के समय महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुषों को धोती पहननी होती है।

इसके बाद पूरा मंदिर परिसर 'जय महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने 'हर हर महादेव' और 'ऊं नमः शिवाय' के जयकारे लगाए। बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया। भक्त बाबा का शृंगार देखकर आनंदित दिखे।

बाबा का श्रृंगार करने के लिए उनके माथे पर चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया, और फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन एवं अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। फिर, बाद में महाकाल की कपूर आरती की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। वहीं, भस्म आरती देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं।

उज्जैन महाकाल एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जिसे 'मृत्यु लोक का राजा' माना जाता है। यहां की विश्व प्रसिद्ध 'भस्म आरती' और नया 'महाकाल लोक' कॉरिडोर प्रमुख आकर्षण केंद्र हैं।

Point of View

बल्कि भक्तों को एकजुट करने का भी कार्य करता है। उज्जैन का यह आयोजन भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक है और इसमें शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है।
भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती हर सुबह उज्जैन के महाकाल मंदिर में होती है, विशेषकर चैत्र नवरात्रि के दौरान।
महाकाल ज्योतिर्लिंग का क्या महत्व है?
महाकाल ज्योतिर्लिंग को 'मृत्यु लोक का राजा' माना जाता है और यह दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
कौन से सामग्रियों का उपयोग भस्म आरती में होता है?
भस्म आरती में कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों का उपयोग होता है।
उज्जैन में और क्या विशेष है?
उज्जैन महाकाल का नया 'महाकाल लोक' कॉरिडोर भी दर्शकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।
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