चैत्र नवरात्रि के आरंभ में महाकाल की भव्य पूजा, भक्तों में उमड़ा आस्था का सैलाब

Click to start listening
चैत्र नवरात्रि के आरंभ में महाकाल की भव्य पूजा, भक्तों में उमड़ा आस्था का सैलाब

सारांश

उज्जैन में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन महाकालेश्वर मंदिर का अद्भुत शृंगार और भक्तों की भारी भीड़ ने इस पावन अवसर को विशेष बना दिया। जानें कैसे बाबा महाकाल ने भक्तों का मन मोह लिया।

Key Takeaways

  • चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ महाकालेश्वर मंदिर में हुआ।
  • बाबा का अद्भुत शृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
  • भस्म आरती के दौरान बाबा निराकार रूप में दर्शन देते हैं।
  • महाकाल का अर्धचांद और त्रिपुंड विशेष महत्व रखते हैं।
  • भक्तों की भारी भीड़ ने इस अवसर को खास बना दिया।

उज्जैन, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बारह ज्योतिर्लिंग में से एक, जिसे काल का देवता माना जाता है, श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र नवरात्रि की भव्यता देखने को मिली।

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के अवसर पर बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया। माथे पर विशाल अर्धचांद और त्रिपुंड स्थापित कर महाकाल की पूजा की गई। भक्तों की भारी भीड़ बाबा के पहले दिन के विशेष दर्शन के लिए मंदिर में उमड़ी।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तथा गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर नव संवत्सर का भव्य स्वागत किया गया। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष विधि-विधान के साथ पूजन हुआ। पहले ब्रह्म मुहूर्त में वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए और फिर दूध, दही, घी, शहद, और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा को स्नान कर अभिषेक पूजन किया गया।

गुरुवार को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर बाबा के माथे पर त्रिपुंड बनाया गया और उस पर त्रिशूल स्थापित किया गया। नीचे की ओर भी एक त्रिपुंड बना और बाबा की तीसरी आंख को सुसज्जित किया गया। बाबा के माथे पर एक बड़ा अर्धचांद भी बनाया गया, जो सुख और शांति का प्रतीक है। अंत में, सूखे मेवों की माला से बाबा को सजाया गया और लाल रंग की चुनरी अर्पित की गई। बाबा के इस अद्भुत शृंगार को देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा।

यह भी जान लें कि भस्म आरती के दौरान बाबा भक्तों को निराकार रूप में दर्शन देते हैं, जो जीवन और मृत्यु से परे होता है। माना जाता है कि जो बाबा के निराकार रूप में दर्शन करता है, उसे जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिलती है। वहीं, शृंगार के बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिसका अलौकिक स्वरूप भक्तों के सारे कष्ट कम कर देता है।

Point of View

बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

चैत्र नवरात्रि का महत्व क्या है?
चैत्र नवरात्रि का महत्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा में निहित है, जो भक्तों को शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में कौन-कौन सी विशेष पूजा होती है?
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, अभिषेक और विशेष शृंगार की पूजा होती है, जो भक्तों के लिए अद्वितीय अनुभव होता है।
महाकालेश्वर मंदिर कब खोला जाता है?
महाकालेश्वर मंदिर ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है, जब भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
त्रिपुंड का क्या महत्व है?
त्रिपुंड का महत्व शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है, जो भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।
अर्धचांद का क्या अर्थ है?
अर्धचांद सुख और शांति का प्रतीक है, जो भगवान शिव के माथे पर सजाया जाता है।
Nation Press