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क्या मोरपंख और त्रिपुंड के साथ राजा की तरह सजे बाबा महाकाल में दिखी श्रीकृष्ण की छवि?

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क्या मोरपंख और त्रिपुंड के साथ राजा की तरह सजे बाबा महाकाल में दिखी श्रीकृष्ण की छवि?

सारांश

उज्जैन में माघ मास की दशमी तिथि पर बाबा महाकाल के अद्भुत शृंगार ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मोरपंख और त्रिपुंड के साथ सजाए गए बाबा महाकाल में भगवान श्री कृष्ण की छवि देखने को मिली। जानिए इस विशेष दिन की भस्म आरती और भक्तों की भावना के बारे में।

मुख्य बातें

महाकाल का अद्भुत शृंगार श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
भस्म आरती में भाग लेने के लिए भक्तों को लंबी कतारों में लगना पड़ता है।
बाबा महाकाल का श्री कृष्ण के साथ सजना एक विशेष संयोग है।
महाकाल मंदिर में हर तिथि के अनुसार नए रूप में दर्शन होते हैं।
उज्जैन में हर साल भक्तों की संख्या में वृद्धि होती है।

उज्जैन, २८ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार सुबह भस्म आरती के अवसर पर बाबा महाकाल के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

भक्तों की लंबी कतारें ब्रह्म मुहूर्त से ही देखने को मिलीं, और पूरा परिसर जय महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। माघ मास के इस विशेष दिन पर बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया, जिसे देखकर भक्तों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी।

बाबा महाकाल को मोरपंख और त्रिपुंड से सजाया गया, और उनके चेहरे पर भगवान श्री कृष्ण की छवि भी दृष्टिगोचर हुई। पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए, और गर्भगृह में अन्य देवी-देवताओं की पूजा की गई। इसके बाद बाबा पर घी, जल, दूध, दही और रस से जलाभिषेक किया गया, और भांग से बाबा का शृंगार किया गया। बाबा के माथे पर चांदी का त्रिपुंड लगाया गया और मोरपंख से उनका अद्भुत शृंगार किया गया। इसके बाद भक्तों के समक्ष भस्म आरती का आयोजन हुआ।

आज का शृंगार विशेष था क्योंकि बाबा महाकाल में बाबा और भगवान विष्णु, यानी हरि और हर का रूप, एक साथ देखने को मिला। ऐसा अद्भुत रूप केवल सावन के महीने में ही देखने को मिलता है। भस्म आरती का आनंद लेने के लिए भक्तों ने रात से ही लाइन में लगकर अपने ईष्ट देव बाबा महाकाल के दर्शन किए। रोजाना की तरह आज भी बाबा महाकाल ने सुबह ४ बजे भक्तों को दर्शन देने के लिए जागृत हुए। भक्तों ने इन दर्शनों का लाभ उठाया, जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के गूंज से भर गया।

महाकाल मंदिर में हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। हर तिथि और विशेष अवसर पर बाबा नए रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही कारण है कि भस्म आरती में सबसे ज्यादा श्रद्धालु शामिल होते हैं। बाबा की सेवा में सुबह से लेकर शाम तक ६ आरतियां होती हैं, जो अपने आप में अनोखी होती हैं। भस्म आरती और शृंगार सुबह ४ बजे होते हैं, और भक्तों को २ बजे ही मंदिर परिसर में लाइन में लगना पड़ता है। भस्म आरती ६ आरतियों में सबसे विशेष मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसे भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अनूठा उदाहरण भी माना जा सकता है। उज्जैन का महाकाल मंदिर हमेशा से श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र रहा है, और इस प्रकार के विशेष आयोजनों से भक्तों का आस्था और भी मजबूत होती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
महाकाल का शृंगार हर दिन अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, जो तिथि और विशेष अवसर के अनुसार निर्धारित होता है।
भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती सुबह 4 बजे होती है और इसमें भक्तों की भारी भीड़ होती है।
राष्ट्र प्रेस
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