क्या चांदी के बेल पत्र और रुद्राक्ष की माला से बाबा महाकाल का शृंगार भक्तों को दिव्य दर्शन देता है?

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क्या चांदी के बेल पत्र और रुद्राक्ष की माला से बाबा महाकाल का शृंगार भक्तों को दिव्य दर्शन देता है?

सारांश

उज्जैन में शनिवार को पौष मास पूर्णिमा पर बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। भक्तों ने कड़कड़ाती ठंड में लंबी कतार में खड़े होकर बाबा के दर्शन किए। उनका अद्भुत शृंगार देखकर भक्तों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। जानिए इस खास अवसर की खासियत और महाकाल की कृपा का महत्व।

Key Takeaways

  • महाकाल का शृंगार भक्तों को दिव्य रूप में दर्शाता है।
  • भस्म आरती का समय भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
  • भक्तों की श्रद्धा भारतीय संस्कृति की पहचान है।

उज्जैन, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शुक्ल पक्ष की पौष मास पूर्णिमा तिथि पर शनिवार के दिन बाबा महाकाल का अद्भुत शृंगार देखने को मिला, जिससे पूरा मंदिर हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा।

शनिवार के दिन बाबा के मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही। नववर्ष के आगमन से ही मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त आ रहे हैं और अपने आराध्य के दर्शन कर रहे हैं।

शनिवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से भक्तों को कड़कड़ाती ठंड में बाबा के दर्शन के लिए लंबी कतार में इंतजार करते हुए देखा गया। सबसे पहले पुजारी ने बाबा भैरव की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले और बाकी सभी देवी-देवताओं से आज्ञा लेकर पूजन का कार्य प्रारंभ किया, जिसके बाद बाबा की भस्म आरती की गई, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई।

भस्म आरती के बाद बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया। महाकाल के शीश पर चांदी का बेल पत्र रखा गया और रुद्राक्ष की माला गले में अर्पित की गई। इसके साथ ही बाबा के माथे पर लाल मणि भी स्थापित की गई, जिससे उनका शृंगार अत्यंत दिव्य प्रतीत हुआ।

महाकाल ने आज भक्तों को राजा स्वरूप में दर्शन दिए और अंत में उन्हें चांदी का मुकुट अर्पित किया गया। बाबा का मणि के सुशोभित रूप देखकर भक्तों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। यह ध्यान रखना चाहिए कि पौष मास पूर्णिमा के दिन बाबा का विशेष शृंगार भक्तों के लिए अद्वितीय है। वैसे, हर दिन बाबा भिन्न-भिन्न रूपों में अपने भक्तों पर कृपा बरसाते रहते हैं।

यह भी ध्यान दें कि बाबा की भस्म आरती उनकी अन्य 5 आरतियों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भस्म आरती के समय बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जो मृत्यु और जीवन से परे है और शृंगार के बाद वे साकार रूप में भक्तों के सामने आते हैं। भस्म आरती के समय महिलाओं को घूंघट या सिर पर पल्ला रखना चाहिए, क्योंकि बाबा का निराकार स्वरूप उनके सभी रूपों में सर्वोच्च माना गया है।

कहा जाता है कि जो भी बाबा की भस्म आरती में शामिल होता है, वह जीवन-मृत्यु के जंजाल से मुक्त हो जाता है। इन्हीं मान्यताओं के कारण सुबह के समय मंदिर में सबसे अधिक भीड़ देखी जाती है।

Point of View

जो भक्तों में असीम श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यह घटना न केवल धार्मिक संवेदनाओं को जगाती है, बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि को भी दर्शाती है। ऐसे अवसरों पर भक्तों की भीड़ यह दर्शाती है कि भारतीय समाज में आस्था और श्रद्धा का कितना गहरा संबंध है।
NationPress
03/01/2026

Frequently Asked Questions

महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
महाकाल का शृंगार चांदी के बेल पत्र और रुद्राक्ष की माला से किया गया।
भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती का महत्व इसलिए है क्योंकि इस समय बाबा निराकार रूप में दर्शन देते हैं।
क्यों भक्त सुबह जल्दी आते हैं?
भक्त सुबह जल्दी आते हैं क्योंकि भस्म आरती में शामिल होने से उन्हें जीवन-मृत्यु के जंजाल से मुक्ति मिलती है।
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