ओडिशा: CM माझी ने 1984 से विस्थापित 1,371 नोलिया परिवारों के लिए ₹75.6 करोड़ का पुनर्वास पैकेज लॉन्च किया
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 27 अगस्त 2026 को गंजाम जिले के गोलाबंधा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ₹75,60,30,000 से अधिक के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना (आर एंड आर) पैकेज की घोषणा की। यह पैकेज उन 1,371 नोलिया परिवारों के लिए है, जिन्हें 1984 में आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज की स्थापना के लिए अपनी ज़मीन से बेदखल किया गया था। चार दशकों की प्रतीक्षा के बाद मिली इस राहत को राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम बताया है।
पैकेज में क्या शामिल है
घोषित पैकेज के अंतर्गत 1,371 पात्र परिवारों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति परिवार ₹5 लाख का एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा, जो कुल मिलाकर ₹68.55 करोड़ बनता है। इसके अतिरिक्त, ₹4.25 करोड़ की हाउसिंग सहायता से 998 अधूरे घरों को पूरा किया जाएगा और 10 नए घर बनाए जाएंगे। नई कीर्तिपुर कॉलोनी में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए ₹2.80 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।
छेलीगाडा परियोजना के विस्थापितों को भी राहत
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री माझी ने छेलीगाडा मध्यम सिंचाई परियोजना से विस्थापित 112 परिवारों में से 96 परिवारों को पहले चरण में घर और कृषि भूमि के पट्टे वितरित किए। माझी ने बताया कि जब यह परियोजना अगले वर्ष के अंत तक पूर्ण होगी, तब गंजाम और गजपति जिलों में 6,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचाई के दायरे में आ जाएगी।
बीजद पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री माझी ने इस अवसर पर विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'विपक्ष ने 24 साल तक गंजाम को अपना अभेद्य गढ़ मानकर सिर्फ राजनीति की, लेकिन विस्थापितों की तकलीफों को कभी नहीं समझा। भले ही इस जिले ने राज्य को 5 बार मुख्यमंत्री दिए, लेकिन गरीब नोलिया समुदाय की आवाज़ सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँच पाई।' माझी ने आरोप लगाया कि BJD ने 24 वर्षों के शासन में गंजाम जिले का उपयोग केवल राजनीतिक हितों के लिए किया और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज सहित कई विकास परियोजनाओं से विस्थापित लोगों की दुर्दशा को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
भावनात्मक माहौल में हुआ स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत में गोलाबंधा की महिलाओं ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बाँधकर उनका भावपूर्ण स्वागत किया। मुख्यमंत्री माझी ने स्वयं मंच पर उपस्थित लाभार्थियों को भूमि पट्टे सौंपे। उन्होंने कहा, 'गोलाबंधा के निवासियों का संघर्ष और त्याग बहुत बड़ा है। हमारी सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान किया है, जिसे 1984 से 4 लंबे दशकों तक नजरअंदाज किया गया था। डबल इंजन सरकार के आने के बाद इस मुद्दे को प्राथमिकता दी गई है।'
आगे क्या होगा
DBT के माध्यम से मुआवजे का वितरण प्रक्रियाधीन है और शेष पात्र परिवारों को भी चरणबद्ध तरीके से पट्टे दिए जाने की योजना है। छेलीगाडा परियोजना के पूर्ण होने पर दोनों जिलों में सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार विस्थापित समुदायों के पुनर्वास को अपनी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत कर रही है।