27 अगस्त 2026
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साल के पेड़ों को राखी बांधकर सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने लिया वन संरक्षण का संकल्प, 'लेडी टार्जन' जमुना टुडू रहीं अगुवा

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साल के पेड़ों को राखी बांधकर सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने लिया वन संरक्षण का संकल्प, 'लेडी टार्जन' जमुना टुडू रहीं अगुवा

सारांश

रक्षाबंधन की रस्म इस बार जंगल में पहुँची — जहाँ भाई नहीं, साल के पेड़ थे। पद्मश्री जमुना टुडू के नेतृत्व में सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने चाकुलिया के सुनसुनिया जंगल में पेड़ों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधकर वन-रक्षा का संकल्प लिया — एक सांस्कृतिक पर्व को पर्यावरण चेतना की आवाज़ में बदलने का अनूठा प्रयास।

मुख्य बातें

27 अगस्त 2026 को झारखंड के चाकुलिया स्थित सुनसुनिया जंगल में रक्षाबंधन पर वन-संरक्षण आयोजन हुआ।
सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने साल के पेड़ों को राखी बाँधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
आयोजन की अगुवाई पद्मश्री सम्मानित 'लेडी टार्जन' जमुना टुडू ने की।
चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने भी पेड़ों पर राखी बाँधी।
प्रतिभागियों ने अवैध कटाई रोकने , वन्यजीव संरक्षण और पौधारोपण बढ़ाने का प्रण लिया।
मंदार और धमसा की थाप पर सामूहिक नृत्य के साथ आदिवासी सांस्कृतिक परंपरा का प्रदर्शन भी हुआ।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया स्थित सुनसुनिया जंगल में 27 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पावन अवसर पर प्रकृति संरक्षण का एक अनूठा दृश्य उपस्थित हुआ। सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में जंगल पहुँचकर साल के पेड़ों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा और वनों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। इस विशेष आयोजन की अगुवाई पद्मश्री से सम्मानित और 'लेडी टार्जन' के नाम से विख्यात जमुना टुडू ने की।

आयोजन का स्वरूप

कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा पेड़ों की पूजा-अर्चना और आरती से हुई। इसके पश्चात महिलाओं ने पेड़ों को भाई का दर्जा देते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा — एक ऐसी परंपरा जो मानव और प्रकृति के अटूट रिश्ते को नई भाषा देती है। चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने भी पेड़ों पर राखी बाँधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

सांस्कृतिक रंग और सामूहिक संकल्प

उत्सव के दौरान जंगल का वातावरण आदिवासी संस्कृति की जीवंतता से भर उठा। मंदार और धमसा के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर महिलाओं ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया और प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने वनों एवं वन्यजीवों की रक्षा करने, अवैध कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का प्रण लिया।

जमुना टुडू का संदेश

इस अवसर पर जमुना टुडू ने कहा कि वे पेड़ों को अपना भाई मानती हैं और वर्षों से इसी भावना के साथ जंगल में रक्षाबंधन का पर्व मनाती आ रही हैं। उन्होंने तेज़ी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह पेड़ों और जंगलों की सुरक्षा के लिए आगे आए। साथ ही उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने और वन संपदा के संरक्षण में सहयोग देने की अपील की।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह आयोजन ऐसे समय में आया है जब झारखंड सहित देश के कई राज्यों में वन आच्छादन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि जमुना टुडू दशकों से झारखंड के जंगलों को बचाने के लिए सक्रिय हैं और उनके नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने वन-रक्षा दल बनाए हैं। रक्षाबंधन जैसे सांस्कृतिक पर्व को पर्यावरण चेतना से जोड़ने की यह पहल आदिवासी समुदाय की उस परंपरागत सोच को रेखांकित करती है जो प्रकृति को परिवार का अंग मानती है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन वन-संरक्षण आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में आदिवासी महिलाओं का यह स्वतःस्फूर्त आंदोलन सरकारी तंत्र से कहीं अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ऐसे सामुदायिक प्रयासों को वन अधिकार कानून और ग्राम सभा की शक्तियों से जोड़कर संस्थागत समर्थन देगी, या ये आयोजन केवल रस्मी सुर्खियों तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चाकुलिया के सुनसुनिया जंगल में रक्षाबंधन पर क्या हुआ?
27 अगस्त 2026 को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया स्थित सुनसुनिया जंगल में सैकड़ों आदिवासी महिलाओं ने साल के पेड़ों को राखी बाँधकर वन संरक्षण का संकल्प लिया। यह आयोजन पद्मश्री जमुना टुडू के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
जमुना टुडू कौन हैं और उन्हें 'लेडी टार्जन' क्यों कहा जाता है?
जमुना टुडू झारखंड की एक आदिवासी पर्यावरण कार्यकर्ता हैं जिन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। वनों की रक्षा के लिए उनके दशकों के अथक संघर्ष और जंगलों से गहरे जुड़ाव के कारण उन्हें 'लेडी टार्जन' की उपाधि मिली है।
इस आयोजन में प्रतिभागियों ने कौन-से संकल्प लिए?
प्रतिभागियों ने जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करने, अवैध कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। जमुना टुडू ने लोगों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने की भी अपील की।
पेड़ों को राखी बाँधने की यह परंपरा कितनी पुरानी है?
जमुना टुडू के अनुसार वे वर्षों से इसी भावना के साथ जंगल में रक्षाबंधन का पर्व मनाती आ रही हैं, पेड़ों को भाई मानते हुए। यह परंपरा आदिवासी समुदाय की उस सोच से उपजी है जो प्रकृति को परिवार का अभिन्न अंग मानती है।
इस आयोजन का पर्यावरण संरक्षण के लिहाज़ से क्या महत्व है?
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब झारखंड में वन आच्छादन पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। रक्षाबंधन जैसे सांस्कृतिक पर्व को पर्यावरण चेतना से जोड़कर यह पहल वन-संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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