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झारखंड: सखी मंडल दीदियों की हस्तनिर्मित राखियों की धूम, CM हेमंत सोरेन ने सराहा हुनर

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झारखंड: सखी मंडल दीदियों की हस्तनिर्मित राखियों की धूम, CM हेमंत सोरेन ने सराहा हुनर

सारांश

रक्षाबंधन इस बार झारखंड की हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए सिर्फ त्योहार नहीं — आत्मनिर्भरता का उत्सव है। सखी मंडल की दीदियों की हस्तनिर्मित 'पलाश' और 'अदिवा' राखियाँ बाज़ार में प्लास्टिक राखियों को टक्कर दे रही हैं और CM हेमंत सोरेन ने इस हुनर को सार्वजनिक सराहना दी है।

मुख्य बातें

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़े सखी मंडलों की दीदियों ने 'पलाश' और 'अदिवा' ब्रांड की हस्तनिर्मित राखियाँ तैयार की हैं।
पलामू जिले की महिलाओं ने 40,000 राखियाँ बनाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया।
थोक मूल्य ₹8 से ₹10 प्रति राखी; महिलाओं को प्रति राखी ₹4 से ₹5 की सीधी बचत।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर राज्यवासियों से सखी मंडल की राखियाँ खरीदने की अपील की।
राज्यभर के सभी जिलों में पलाश स्टॉल लगाए गए; दुमका के शादीपुर गाँव में पर्यावरण-अनुकूल राखियाँ भी तैयार।

झारखंड में इस रक्षाबंधन पर सखी मंडल की हजारों ग्रामीण महिलाओं के हाथों से बनी राखियाँ न केवल बाज़ार में छाई हुई हैं, बल्कि इन दीदियों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत भी लिख रही हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से संबद्ध सखी मंडलों द्वारा तैयार 'पलाश' और 'अदिवा' ब्रांड की हस्तनिर्मित राखियाँ राज्यभर के बाज़ारों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री की अपील और सराहना

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर राज्यवासियों से सखी मंडल की बहनों का हुनर अपनाने की अपील की। उन्होंने लिखा, 'हर वर्ष की तरह इस बार भी हमारी सखी मंडल की माताओं-बहनों ने अपने स्नेह, हुनर और मेहनत से खूबसूरत राखियाँ तैयार की हैं। आपकी खरीदी सिर्फ एक राखी नहीं, बल्कि किसी बहन के आत्मविश्वास और स्वावलंबन का सम्मान है।' यह संदेश 'लोकल फॉर वोकल' की भावना को और मजबूत करता है।

राज्यभर में पलाश स्टॉल, जोरदार बिक्री

हस्तनिर्मित राखियों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए सभी जिलों में विशेष 'पलाश स्टॉल' लगाए गए हैं। पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, पाकुड़ और सिमडेगा सहित अनेक जिलों में इन आउटलेट्स पर जबर्दस्त बिक्री दर्ज की जा रही है। पलामू जिले में लेस्लीगंज, पड़वा और नावाबाजार प्रखंड की महिलाओं को 40,000 राखियाँ बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे उन्होंने पूरा कर दिखाया।

प्रशासन का समर्थन और 'लोकल फॉर वोकल' संदेश

पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने इन केंद्रों पर पहुँचकर सखी मंडल की दीदियों से कलाई पर राखी बंधवाई और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। दुमका के शादीपुर गाँव में 'महादेव सखी मंडल' की महिलाओं ने स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों, साटन, रेशम और चमकीले मोतियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल राखियाँ तैयार की हैं।

आम जनता पर आर्थिक असर

इन राखियों का थोक मूल्य ₹8 से ₹10 के बीच रखा गया है, जिससे महिलाओं को प्रति राखी ₹4 से ₹5 की सीधी बचत हो रही है। त्योहारी सीजन में यह छोटी-सी कमाई इन परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक संबल बन रही है। गुणवत्ता, फिनिशिंग और डिज़ाइन के मामले में ये राखियाँ बाज़ार में उपलब्ध बाहरी और प्लास्टिक-सिंथेटिक राखियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि JSLPS के तहत सखी मंडलों का यह प्रयास आने वाले त्योहारी सीजन में और विस्तार पाने की संभावना रखता है, जिससे और अधिक ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि त्योहारी सीजन के बाद इन महिलाओं की आमदनी कैसे टिकाऊ बनाई जाए। ₹4-5 प्रति राखी की बचत एक शुरुआत है, पर यह स्थायी आजीविका के लिए पर्याप्त नहीं। JSLPS को यह सुनिश्चित करना होगा कि 'पलाश' और 'अदिवा' ब्रांड केवल रक्षाबंधन तक सीमित न रहें — साल भर की बिक्री और ई-कॉमर्स से जुड़ाव ही इन दीदियों की आत्मनिर्भरता को वास्तविक अर्थ देगा।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड सखी मंडल की राखियाँ कहाँ मिलती हैं?
ये राखियाँ राज्यभर के सभी जिलों में लगाए गए विशेष 'पलाश स्टॉल' पर उपलब्ध हैं। पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, पाकुड़ और सिमडेगा सहित अनेक जिलों में पलाश आउटलेट्स पर इनकी बिक्री हो रही है।
'पलाश' और 'अदिवा' राखी ब्रांड क्या हैं?
ये झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़े सखी मंडलों की ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों के ब्रांड हैं। इनमें साटन, रेशम, चमकीले मोतियों और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है।
CM हेमंत सोरेन ने सखी मंडल की राखियों के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि सखी मंडल की माताओं-बहनों ने अपने स्नेह, हुनर और मेहनत से खूबसूरत राखियाँ तैयार की हैं और इन्हें खरीदना किसी बहन के आत्मविश्वास और स्वावलंबन का सम्मान है।
पलामू जिले में कितनी राखियाँ बनाई गईं?
पलामू जिले के लेस्लीगंज, पड़वा और नावाबाजार प्रखंड की महिलाओं को 40,000 राखियाँ बनाने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया।
सखी मंडल की राखियाँ बनाने से महिलाओं को कितनी कमाई होती है?
इन राखियों का थोक मूल्य ₹8 से ₹10 के बीच रखा गया है, जिससे महिलाओं को प्रति राखी ₹4 से ₹5 की सीधी बचत होती है। त्योहारी सीजन में यह आमदनी उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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