27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मिशन मंगलम से बदली तकदीर: पीठाई गांव की 45 महिलाएं राखी बनाकर कर रहीं ₹10 लाख का सालाना कारोबार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मिशन मंगलम से बदली तकदीर: पीठाई गांव की 45 महिलाएं राखी बनाकर कर रहीं ₹10 लाख का सालाना कारोबार

सारांश

₹5,000 और 10 सदस्यों से शुरू हुआ पीठाई गांव का संतराम सखी मंडल अब ₹10 लाख सालाना का राखी कारोबार कर रहा है। मिशन मंगलम योजना की यह सफलता बताती है कि सही सरकारी सहयोग से ग्रामीण महिलाएं किस तरह उद्यमी बन सकती हैं।

मुख्य बातें

पीठाई गांव (खेड़ा, गुजरात) की 45 से अधिक महिलाएं मिशन मंगलम योजना के तहत राखी निर्माण से जुड़ी हैं।
संतराम सखी मंडल की स्थापना 2014 में ₹5,000 और 10 सदस्यों के साथ हुई थी।
मंडल का सालाना राखी कारोबार अब ₹10 लाख तक पहुंच चुका है।
इस वर्ष मंडल ने लगभग 5 लाख राखियां बनाई हैं, जिनकी मांग गुजरात भर में और ऑनलाइन भी है।
प्रत्येक सदस्य को हर महीने ₹3,000 से ₹4,000 की आमदनी हो रही है।

गुजरात के खेड़ा जिले की कठलाल तालुका के पीठाई गांव की ग्रामीण महिलाओं ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखी है। राज्य सरकार की मिशन मंगलम योजना के तहत गठित संतराम सखी मंडल से जुड़ी ये महिलाएं राखी निर्माण के ज़रिए सालाना ₹10 लाख का कारोबार खड़ा कर चुकी हैं। कभी दूसरों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं आज न केवल अपने परिवार का आर्थिक संबल बन चुकी हैं, बल्कि अपने गांव में उद्यमिता की मिसाल भी पेश कर रही हैं।

मिशन मंगलम और संतराम सखी मंडल की शुरुआत

संतराम सखी मंडल की स्थापना 2014 में मीनाबेन डाभी ने की थी। शुरुआत में मंडल में केवल 10 सदस्य थीं और पूंजी मात्र ₹5,000। मीनाबेन ने बताया कि उन्होंने सभी बहनों को राखी बनाने का हुनर सिखाया और धीरे-धीरे काम को आगे बढ़ाया। आज इस गृह उद्योग से 45 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'मैं सभी बहनों को घर पर बुलाती हूं और उन्हें राखी बनाना सिखाती हूं। आज केवल राखी के कारोबार का मेरा ₹10 लाख का टर्नओवर है और जो समय बचता है, उसमें हम पतंगें बनाते हैं।'

महिलाओं की आमदनी और जीवन में बदलाव

मंडल की सदस्य प्रतिभा भट्ट ने बताया कि राखियां और पतंगें बनाने के काम से उन्हें हर महीने ₹3,000 से ₹4,000 की आमदनी होती है। उन्होंने कहा कि इस राशि से वे अपने परिवार का गुजारा अच्छे से कर पा रही हैं। यह बदलाव न केवल आर्थिक है, बल्कि इन महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति में भी साफ दिखता है।

इस साल 5 लाख राखियां, मांग गुजरात भर में

संतराम सखी मंडल की महिलाओं ने इस वर्ष लगभग 5 लाख राखियां तैयार की हैं। इन राखियों की मांग खेड़ा-नाडियाद के अलावा गुजरात के अन्य शहरों तक फैली हुई है। मंडल ऑनलाइन माध्यमों से भी राखियां बेच रहा है, जिससे पीठाई गांव की राखियां देश-विदेश तक पहुंच रही हैं। ग्राहक गीताबेन पटेल ने कहा, 'घर पर बनी राखियां बेहद सुंदर हैं और लोगों के लिए थोड़ी सस्ती भी हैं।' एक अन्य ग्राहक इच्छाबेन ने बताया कि यहां रुद्राक्ष वाली, गणपति वाली — इतने डिज़ाइन हैं कि चुनना मुश्किल हो जाता है।

थोक खरीदार भी हो रहे आकर्षित

अहमदाबाद के होलसेल खरीदार दर्शन सिंह डाभी ने बताया कि वे पिछले तीन-चार वर्षों से यहां राखियां खरीदने आ रहे हैं और इस बार ₹10,000 से ₹15,000 की राखियां ले जाएंगे। यह इस बात का संकेत है कि मंडल की राखियों ने व्यावसायिक बाज़ार में भी अपनी पहचान बना ली है।

मिशन मंगलम का व्यापक असर

गुजरात सरकार की मिशन मंगलम योजना राज्य की ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल है। पीठाई गांव का संतराम सखी मंडल इस योजना की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है। राखी निर्माण के अलावा मंडल की सदस्याएं पतंग बनाने और पशुपालन जैसे कार्यों में भी सक्रिय हैं। यह मॉडल दर्शाता है कि सरकारी समर्थन और सामूहिक प्रयास मिलकर ग्रामीण महिलाओं की तकदीर बदल सकते हैं। आने वाले वर्षों में मंडल की महिलाओं का लक्ष्य अपने उत्पादों की ऑनलाइन पहुंच और बढ़ाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी सोचना ज़रूरी है कि ₹10 लाख का यह टर्नओवर मुख्यतः रक्षाबंधन के मौसमी चक्र पर टिका है — साल भर की स्थायी आमदनी का सवाल अभी खुला है। सखी मंडल मॉडल तभी टिकाऊ होगा जब पतंग और पशुपालन जैसे पूरक कार्यों को भी बाज़ार से जोड़ा जाए। ऑनलाइन बिक्री की शुरुआत सही दिशा है, पर डिजिटल साक्षरता और आपूर्ति श्रृंखला समर्थन के बिना यह छलांग अधूरी रह सकती है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन मंगलम योजना क्या है और यह महिलाओं की कैसे मदद करती है?
मिशन मंगलम गुजरात सरकार की योजना है जो ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (सखी मंडल) के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है। यह योजना महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जोड़ने में मदद करती है।
संतराम सखी मंडल ने कितनी राखियां बनाई हैं और कारोबार कितना है?
संतराम सखी मंडल ने इस वर्ष लगभग 5 लाख राखियां बनाई हैं और मंडल का सालाना राखी टर्नओवर ₹10 लाख तक पहुंच चुका है। इनकी बिक्री खेड़ा-नाडियाद से लेकर गुजरात के अन्य शहरों और ऑनलाइन माध्यमों से भी हो रही है।
पीठाई गांव की महिलाओं को राखी बनाने से कितनी कमाई होती है?
मंडल की प्रत्येक सदस्य को राखी और पतंग बनाने के काम से हर महीने ₹3,000 से ₹4,000 की आमदनी होती है। यह राशि उन्हें अपने परिवार की ज़रूरतें पूरी करने में सहायक है।
संतराम सखी मंडल की शुरुआत कब और कैसे हुई?
मंडल की स्थापना 2014 में मीनाबेन डाभी ने 10 सदस्यों और ₹5,000 की पूंजी से की थी। आज इससे 45 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं और मंडल राखी, पतंग निर्माण व पशुपालन जैसे कार्यों में सक्रिय है।
क्या पीठाई गांव की राखियां ऑनलाइन भी मिलती हैं?
हां, संतराम सखी मंडल की महिलाएं ऑनलाइन माध्यमों से भी राखियां बेच रही हैं, जिससे इनकी पहुंच देश-विदेश तक हो गई है। रुद्राक्ष, गणपति समेत विभिन्न डिज़ाइनों की राखियां खरीदारों के बीच खासी लोकप्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले