राजौरी में एनआरएलएम: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान

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राजौरी में एनआरएलएम: ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान

सारांश

राजौरी में एनआरएलएम के तहत ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। यह योजना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

Key Takeaways

  • एनआरएलएम योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का स्रोत बन रही है।
  • महिलाएं सेल्फ-हेल्प ग्रुप के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
  • इस पहल से महिलाओं को आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता मिल रही है।
  • राजौरी में 19 सिविक ब्लॉक में योजना लागू की गई है।
  • पैकिंग यूनिट के अलावा, अन्य छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

राजौरी, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सेंट्रली स्पॉन्सर्ड नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (एनआरएलएम) बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट राजौरी में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और रोजगार के मजबूत अवसरों का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह योजना गरीब और बीपीएल परिवारों, विशेष रूप से महिलाओं को, जिले के विभिन्न ब्लॉकों में सेल्फ-हेल्प ग्रुप (एसएचजी) और छोटे स्तर की रोजी-रोटी यूनिट स्थापित करके आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सहायता कर रही है।

इस पहल के तहत, एनआरएलएम विभाग ने कई महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए हैं, जहां सदस्य विभिन्न आय उत्पन्न करने वाले कार्यों में संलग्न हैं। राजौरी के चौधरी नार क्षेत्र में 'कंगन स्पाइसेस नमकीन, पैकिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट' एक सफल उदाहरण है, जहां ग्रामीण महिलाओं का समूह पैकिंग के कार्य से हर महीने स्थिर आय अर्जित कर रहा है।

इस यूनिट में मुख्य रूप से गरीब, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं शामिल हैं, जिनके पास पहले नियमित आय का कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं था। इस योजना के तहत महिलाएं चीनी पैकिंग के कार्य में लगी हुई हैं। रोजाना लगभग एक घंटे काम करके वे हर महीने लगभग 2,000 से 3,000 रुपए कमा लेती हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा संभव हो पाता है।

महिलाओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि इस योजना ने उनकी ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने साझा किया कि सेल्फ-हेल्प ग्रुप में शामिल होने से पहले वे बेरोजगार थीं और दूसरों पर निर्भर थीं, लेकिन एनआरएलएम पहल के माध्यम से अब उन्हें आय का एक स्रोत और अपने परिवार का भरण-पोषण करने का आत्मविश्वास प्राप्त हुआ है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) हकीम इम्तियाज ने बताया, "डिपार्टमेंट राजौरी जिले के 19 सिविक ब्लॉक में एनआरएलएम योजना लागू कर रहा है, जहां विभिन्न सेल्फ हेल्प ग्रुप विभिन्न रोजगार के कार्यों में लगे हुए हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "पैकिंग यूनिट के अलावा, विभाग रोजगार सृजन और गांव की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए मशरूम की खेती, डेयरी फार्मिंग और अन्य छोटे कामों को भी प्रेरित कर रहा है।"

इस प्रकार, एनआरएलएम पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत समर्थन प्रणाली बन गई है, जिससे वे रोजी-रोटी कमा सकती हैं और अपने परिवार तथा गांव की आर्थिक प्रगति में योगदान कर सकती हैं।

Point of View

जो ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना रही है। यह योजना न केवल उनके आर्थिक स्थिति में सुधार कर रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
NationPress
09/03/2026

Frequently Asked Questions

एनआरएलएम क्या है?
एनआरएलएम, यानी नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन, एक सरकारी योजना है जो ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बनाई गई है।
यह योजना कैसे काम करती है?
यह योजना ग्रामीण महिलाओं को सेल्फ-हेल्प ग्रुप बनाकर और छोटे व्यवसाय शुरू करने में सहायता करती है।
इस योजना के लाभ क्या हैं?
इस योजना से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं।
क्या यह योजना सभी गांवों में लागू है?
इस योजना का कार्यान्वयन विभिन्न ब्लॉकों में किया जा रहा है, विशेष रूप से उन गांवों में जहां महिलाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर है।
महिलाएं इस योजना से कितनी आय कमा सकती हैं?
महिलाएं इस योजना के तहत लगभग 2,000 से 3,000 रुपए प्रति माह कमा सकती हैं।
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