26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गांधीनगर में 77वें वन महोत्सव पर 551 देसी पेड़ रोपे, स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने की पर्यावरण भागीदारी की अपील

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गांधीनगर में 77वें वन महोत्सव पर 551 देसी पेड़ रोपे, स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने की पर्यावरण भागीदारी की अपील

सारांश

गांधीनगर के जामला गाँव में 77वें वन महोत्सव पर 551 देसी पेड़ रोपे गए — जिनमें 300 से अधिक बिल्व के पौधे शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और पर्यावरण चेतना को जोड़ते हुए नागरिकों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में सहभागिता का आह्वान किया।

मुख्य बातें

26 अगस्त 2026 को गांधीनगर के जामला गाँव में 77वें वन महोत्सव पर 551 देसी पेड़ लगाए गए।
रोपे गए पेड़ों में 300 से अधिक बिल्व के पौधे शामिल; अन्य प्रजातियों में आम, नीम और अशोक।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 'वृक्ष रथ' को हरी झंडी दिखाई और नागरिकों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में जुड़ने की अपील की।
गुजरात वन विभाग का लक्ष्य: 74,453 हेक्टेयर में 5.51 करोड़+ पेड़ और 11.80 करोड़+ पौधों का वितरण।
जुलाई में मियावाकी तकनीक से एक घंटे में 3.61 लाख+ पौधे रोपकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया।
मंत्री ने मिलावटी खाद्य उत्पाद बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

गुजरात के गांधीनगर जिले में 26 अगस्त 2026 को 77वें वन महोत्सव के अवसर पर मनसा तालुका के जामला गाँव स्थित आसुदेव महादेव मंदिर परिसर में 551 देसी पेड़ लगाए गए। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस जिला-स्तरीय कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम

मंत्री पानशेरिया ने आसुदेव महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत 'वृक्ष रथ' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने स्वयं बिल्व, आम, नीम और अशोक जैसी देसी प्रजातियों के पौधे रोपे। मंदिर परिसर में लगाए गए कुल 551 पेड़ों में 300 से अधिक बिल्व के पौधे शामिल थे।

मंत्री का संबोधन: संस्कृति और पर्यावरण का संगम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पानशेरिया ने कहा कि प्रकृति का सम्मान और उसकी पूजा भारतीय संस्कृति की जड़ों में समाई है। उन्होंने विचारक कन्हैयालाल मुंशी और प्राचीन ऋषियों का उल्लेख करते हुए कहा: 'उन्होंने समाज के लिए प्रकृति पूजा की परंपरा छोड़ी थी।' भगवान कृष्ण और पीपल के पेड़ के संबंध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमें सिखाता है कि वृक्ष भी जीवित सत्ता हैं।

मंत्री ने हवा, पानी और भूमि को प्रदूषण से बचाना सभी नागरिकों की नैतिक जिम्मेदारी बताया और कहा कि भारतीय धर्मग्रंथों में इन्हें देवता और माँ का दर्जा दिया गया है। उन्होंने नागरिकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में सहभागी होने और पेड़ लगाने तथा उनकी देखभाल का संकल्प लेने की अपील की।

खाद्य मिलावट पर सख्त चेतावनी

पर्यावरण के साथ-साथ पानशेरिया ने जन-स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गतिविधियों के विरुद्ध भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के मिलावट-विरोधी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि नकली घी, मावा और रासायनिक सॉस जैसे उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे असामाजिक तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

विधायक और संस्थाओं की भूमिका

मनसा के विधायक जे.एस. पटेल ने कहा कि जन्म, विवाह और पुण्यतिथि जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पेड़ लगाने की परंपरा विकसित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विकास कार्यों के लिए वृक्ष काटने पड़ें, तो उसकी भरपाई के लिए 10 गुना अधिक पेड़ रोपे और संरक्षित किए जाने चाहिए। मंत्री ने रासायनिक उर्वरक छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे किसानों और 'सद्भावना' तथा 'ग्रीन आर्मी' जैसी संस्थाओं के योगदान की सराहना की।

गुजरात में पौधारोपण का व्यापक लक्ष्य

यह आयोजन गुजरात में हरित आवरण बढ़ाने के बृहत्तर अभियान का हिस्सा है। राज्य के वन विभाग ने चालू पौधारोपण अभियान के तहत 74,453 हेक्टेयर भूमि पर 5.51 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जबकि सरकारी नर्सरियों के माध्यम से 11.80 करोड़ से अधिक पौधे वितरित किए जाने की योजना है। इसी वर्ष जुलाई में गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में मियावाकी तकनीक का उपयोग कर एक घंटे में 3.61 लाख से अधिक पौधे रोपकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया था; एक सार्वजनिक अभियान के अंतर्गत पूरे क्षेत्र में 1.26 करोड़ से अधिक पौधे भी लगाए गए। आने वाले महीनों में इस अभियान की गति और तेज होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि रोपे गए पेड़ों में से कितने पाँच साल बाद भी जीवित रहते हैं — इस पर सरकारी आँकड़े प्रायः चुप रहते हैं। गुजरात वन विभाग का 5.51 करोड़ पेड़ों का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु वृक्षारोपण की सफलता दर और दीर्घकालिक रखरखाव का कोई सार्वजनिक सत्यापन तंत्र नहीं है। मियावाकी रिकॉर्ड और सामूहिक अभियान प्रभावशाली हैं, लेकिन हरित आवरण की वास्तविक वृद्धि तभी मापी जा सकती है जब उपग्रह-आधारित निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट को नीतिगत ढाँचे में शामिल किया जाए।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

77वाँ वन महोत्सव गांधीनगर में कहाँ और कब मनाया गया?
77वाँ वन महोत्सव 26 अगस्त 2026 को गांधीनगर जिले के मनसा तालुका के जामला गाँव में आसुदेव महादेव मंदिर परिसर में मनाया गया। इस जिला-स्तरीय कार्यक्रम में 551 देसी पेड़ लगाए गए।
वन महोत्सव में कौन-कौन सी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए?
कार्यक्रम में बिल्व, आम, नीम और अशोक जैसी देसी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए। कुल 551 पेड़ों में 300 से अधिक बिल्व के पौधे शामिल थे।
गुजरात वन विभाग का 2026 में पौधारोपण का लक्ष्य क्या है?
गुजरात वन विभाग ने चालू अभियान के तहत 74,453 हेक्टेयर भूमि पर 5.51 करोड़ से अधिक पेड़ लगाने और सरकारी नर्सरियों के माध्यम से 11.80 करोड़ से अधिक पौधे वितरित करने का लक्ष्य रखा है।
'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान है, जिसमें नागरिकों से अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने का आग्रह किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने वन महोत्सव में नागरिकों से इस अभियान में सहभागी होने की अपील की।
गांधीनगर में मियावाकी तकनीक से बने गिनीज रिकॉर्ड का क्या विवरण है?
जुलाई 2026 में गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में मियावाकी तकनीक का उपयोग करके एक घंटे में 3.61 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, जिससे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। इसी दौरान एक सार्वजनिक अभियान के तहत पूरे क्षेत्र में 1.26 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले