थिरुवोणम पर पलक्कड़ रेल डिवीजन बंटवारे के खिलाफ कांग्रेस सांसदों का भूख हड़ताल, ₹1,100 करोड़ नुकसान का दावा
सारांश
मुख्य बातें
केरल के सबसे बड़े त्योहार थिरुवोणम के अवसर पर, जब पूरे राज्य में परिवार पारंपरिक साद्य (26 व्यंजनों की दावत) का आनंद ले रहे थे, उत्तरी केरल के कांग्रेस सांसदों ने 26 अगस्त को भूख हड़ताल पर बैठकर एक कड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उनका विरोध रेलवे बोर्ड के उस प्रस्तावित फैसले के खिलाफ है, जिसके तहत पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के कई क्षेत्रों को साउथ वेस्टर्न रेलवे के मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित किया जाना है।
विरोध का स्वरूप और राजनीतिक संदेश
कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के सांसदों ने बुधवार सुबह भूख हड़ताल शुरू की। थिरुवोणम की साद्य — जो मलयाली संस्कृति में एकजुटता और उत्सव का प्रतीक है — को त्यागकर विरोध का यह प्रतीकात्मक तरीका अपनाया गया। सांसदों ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह निर्णय कर्नाटक में आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया है — एक आरोप जिसे केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन नहीं आया है।
पुनर्गठन में क्या बदलेगा
प्रस्तावित बदलाव के तहत मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन सहित कई प्रमुख स्टेशनों को पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर मैसूरु डिवीजन में शामिल किया जाएगा। यूडीएफ के अनुसार, इस बदलाव से मैसूरु डिवीजन को सालाना ₹500-600 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी, जबकि पलक्कड़ डिवीजन को पनामबूर और अन्य क्षेत्रों के जाने से सालाना लगभग ₹1,100 करोड़ का राजस्व नुकसान होने की आशंका है।
गौरतलब है कि पलक्कड़ डिवीजन अपनी कुल आय का लगभग 90 प्रतिशत माल ढुलाई (फ्रेट ट्रैफिक) से अर्जित करता है। मंगलुरु के दोनों प्रमुख स्टेशन निकल जाने से यात्री आय भी प्रभावित होगी।
केरल सरकार की आपत्ति
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं प्रतिपक्ष नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले केरल सरकार से कोई परामर्श नहीं लिया गया, जबकि इसका राज्य के रेलवे बुनियादी ढाँचे और भविष्य की विकास संभावनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
आर्थिक और रणनीतिक चिंताएँ
यूडीएफ का तर्क है कि भले ही राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे की कुल आय में कोई कमी न हो — क्योंकि राजस्व एक डिवीजन से दूसरे में स्थानांतरित होगा — लेकिन केरल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर अपना प्रभाव और राजस्व, दोनों गँवाने पड़ेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पलक्कड़ डिवीजन पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में है — आलोचकों का कहना है कि कमाई वाले क्षेत्रों के स्थानांतरण के बाद डिवीजन की आर्थिक व्यवहार्यता पर ही सवाल उठ सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह विवाद केंद्र-राज्य रेलवे अधिकारों की एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। फिलहाल रेलवे बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वीडी सतीशन के पत्र पर केंद्र का जवाब और रेलवे बोर्ड का अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा।