27 अगस्त 2026
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थिरुवोणम पर पलक्कड़ रेल डिवीजन बंटवारे के खिलाफ कांग्रेस सांसदों का भूख हड़ताल, ₹1,100 करोड़ नुकसान का दावा

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थिरुवोणम पर पलक्कड़ रेल डिवीजन बंटवारे के खिलाफ कांग्रेस सांसदों का भूख हड़ताल, ₹1,100 करोड़ नुकसान का दावा

सारांश

थिरुवोणम की साद्य छोड़कर भूख हड़ताल — कांग्रेस सांसदों का यह कदम महज प्रतीकात्मक नहीं है। पलक्कड़ डिवीजन को ₹1,100 करोड़ सालाना राजस्व गँवाने और अंततः अपने अस्तित्व पर सवाल झेलने का खतरा है। केरल का रेलवे भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

थिरुवोणम (26 अगस्त) पर उत्तरी केरल के कांग्रेस (यूडीएफ) सांसदों ने पलक्कड़ रेल डिवीजन के बंटवारे के विरोध में भूख हड़ताल की।
प्रस्तावित पुनर्गठन में मंगलुरु सेंट्रल व मंगलुरु जंक्शन समेत कई स्टेशन मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित होंगे।
आंकड़ों के अनुसार, पलक्कड़ डिवीजन को सालाना लगभग ₹1,100 करोड़ का राजस्व नुकसान हो सकता है, जबकि मैसूरु डिवीजन को ₹500-600 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी।
पलक्कड़ डिवीजन की लगभग 90% आय माल ढुलाई से आती है, जो इस बदलाव से गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार की माँग की।
सांसदों का आरोप — यह निर्णय कर्नाटक चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

केरल के सबसे बड़े त्योहार थिरुवोणम के अवसर पर, जब पूरे राज्य में परिवार पारंपरिक साद्य (26 व्यंजनों की दावत) का आनंद ले रहे थे, उत्तरी केरल के कांग्रेस सांसदों ने 26 अगस्त को भूख हड़ताल पर बैठकर एक कड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उनका विरोध रेलवे बोर्ड के उस प्रस्तावित फैसले के खिलाफ है, जिसके तहत पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के कई क्षेत्रों को साउथ वेस्टर्न रेलवे के मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित किया जाना है।

विरोध का स्वरूप और राजनीतिक संदेश

कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के सांसदों ने बुधवार सुबह भूख हड़ताल शुरू की। थिरुवोणम की साद्य — जो मलयाली संस्कृति में एकजुटता और उत्सव का प्रतीक है — को त्यागकर विरोध का यह प्रतीकात्मक तरीका अपनाया गया। सांसदों ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह निर्णय कर्नाटक में आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया है — एक आरोप जिसे केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक खंडन नहीं आया है।

पुनर्गठन में क्या बदलेगा

प्रस्तावित बदलाव के तहत मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन सहित कई प्रमुख स्टेशनों को पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर मैसूरु डिवीजन में शामिल किया जाएगा। यूडीएफ के अनुसार, इस बदलाव से मैसूरु डिवीजन को सालाना ₹500-600 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी, जबकि पलक्कड़ डिवीजन को पनामबूर और अन्य क्षेत्रों के जाने से सालाना लगभग ₹1,100 करोड़ का राजस्व नुकसान होने की आशंका है।

गौरतलब है कि पलक्कड़ डिवीजन अपनी कुल आय का लगभग 90 प्रतिशत माल ढुलाई (फ्रेट ट्रैफिक) से अर्जित करता है। मंगलुरु के दोनों प्रमुख स्टेशन निकल जाने से यात्री आय भी प्रभावित होगी।

केरल सरकार की आपत्ति

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं प्रतिपक्ष नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले केरल सरकार से कोई परामर्श नहीं लिया गया, जबकि इसका राज्य के रेलवे बुनियादी ढाँचे और भविष्य की विकास संभावनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।

आर्थिक और रणनीतिक चिंताएँ

यूडीएफ का तर्क है कि भले ही राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे की कुल आय में कोई कमी न हो — क्योंकि राजस्व एक डिवीजन से दूसरे में स्थानांतरित होगा — लेकिन केरल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर अपना प्रभाव और राजस्व, दोनों गँवाने पड़ेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पलक्कड़ डिवीजन पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में है — आलोचकों का कहना है कि कमाई वाले क्षेत्रों के स्थानांतरण के बाद डिवीजन की आर्थिक व्यवहार्यता पर ही सवाल उठ सकते हैं।

आगे क्या होगा

यह विवाद केंद्र-राज्य रेलवे अधिकारों की एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है। फिलहाल रेलवे बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वीडी सतीशन के पत्र पर केंद्र का जवाब और रेलवे बोर्ड का अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह विरोध रेलवे बोर्ड के निर्णय को पलट सकता है। ₹1,100 करोड़ के अनुमानित नुकसान का आँकड़ा यूडीएफ का अपना दावा है — स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। कर्नाटक चुनाव-लाभ का आरोप राजनीतिक दृष्टि से सुविधाजनक है, लेकिन रेलवे पुनर्गठन के निर्णय प्रायः दशकों पुरानी परिचालन समीक्षाओं पर आधारित होते हैं। मुख्य चूक यह है कि केंद्र ने केरल सरकार से परामर्श किए बिना इतना बड़ा ढाँचागत बदलाव किया — यह प्रक्रियागत खामी है जिसे किसी भी राजनीतिक रंग से परे देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के बंटवारे का विरोध क्यों हो रहा है?
रेलवे बोर्ड के प्रस्तावित फैसले के तहत मंगलुरु सेंट्रल व मंगलुरु जंक्शन समेत कई स्टेशन पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर मैसूरु डिवीजन में दिए जाने हैं। यूडीएफ का दावा है कि इससे पलक्कड़ डिवीजन को सालाना करीब ₹1,100 करोड़ का राजस्व नुकसान होगा और केरल का रेलवे नेटवर्क पर रणनीतिक प्रभाव कम होगा।
थिरुवोणम पर भूख हड़ताल का क्या महत्व है?
थिरुवोणम केरल का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसमें 26 व्यंजनों की पारंपरिक साद्य (दावत) परिवारों की एकजुटता का प्रतीक होती है। इस दिन साद्य छोड़कर भूख हड़ताल पर बैठना एक तीव्र प्रतीकात्मक विरोध है, जो कांग्रेस सांसदों की इस मुद्दे पर गंभीरता को दर्शाता है।
पलक्कड़ डिवीजन की आय पर क्या असर पड़ेगा?
पलक्कड़ डिवीजन अपनी कुल आय का लगभग 90% माल ढुलाई से अर्जित करता है। आंकड़ों के अनुसार, पनामबूर और मंगलुरु क्षेत्रों के स्थानांतरण से डिवीजन को सालाना करीब ₹1,100 करोड़ का नुकसान हो सकता है, जबकि मैसूरु डिवीजन को ₹500-600 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी।
केरल सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार की माँग की है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले केरल सरकार से कोई परामर्श नहीं किया गया।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह फैसला कर्नाटक में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर लिया है। हालाँकि केंद्र सरकार की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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