पालक्काड मंडल से मंगलूरु हटाने पर जॉन ब्रिटास का विरोध, रेल मंत्री वैष्णव से पुनर्विचार की अपील
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने रेलवे बोर्ड के उस प्रस्तावित फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत 1 अक्टूबर 2026 से मंगलूरु क्षेत्र और उल्लाल को दक्षिण रेलवे के पालक्काड मंडल से अलग कर दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर मंडल में शामिल किया जाना है। उन्होंने इस निर्णय को केरल के रेलवे हितों के लिए गंभीर आघात बताते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
पालक्काड मंडल की कमज़ोर होती स्थिति
डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि देश के सबसे पुराने प्रमुख रेलवे मंडलों में शुमार पालक्काड मंडल पहले ही कई पुनर्गठन प्रक्रियाओं की मार झेल चुका है। वर्ष 2007 में सलेम मंडल के गठन के दौरान इससे लगभग 550 रूट किलोमीटर क्षेत्र अलग कर दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप यह मंडल वर्तमान में दक्षिण रेलवे का सबसे छोटा और देश के सबसे छोटे रेलवे मंडलों में से एक बन चुका है।
मंगलूरु क्षेत्र की वित्तीय अहमियत
सांसद ने बताया कि मंगलूरु क्षेत्र पालक्काड मंडल की वित्तीय और परिचालन रीढ़ है। मंडल की कुल मालभाड़ा आय का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, जबकि कुल राजस्व का आधे से अधिक भाग भी यहीं से प्राप्त होता है। पनंबूर फ्रेट और मार्शलिंग यार्ड मंगलूरु बंदरगाह से जुड़े बड़े माल परिवहन का महत्वपूर्ण केंद्र है। उनके अनुसार, इस स्थानांतरण के बाद पालक्काड मंडल को प्रतिवर्ष लगभग ₹1,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है, जिसका सीधा असर नई ट्रेनों की शुरुआत, विशेष ट्रेनों के संचालन और बुनियादी रेल सुविधाओं के विस्तार पर पड़ेगा।
कंजीकोड परियोजना रद्द होने का संदर्भ
डॉ. ब्रिटास ने 2007 के रेलवे पुनर्गठन का स्मरण कराते हुए कहा कि उस समय केरल की चिंताओं को शांत करने के लिए कंजीकोड रेल कोच फैक्ट्री परियोजना का आश्वासन दिया गया था, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई 2026 को राज्यसभा में उनके प्रश्न के उत्तर में रेलवे मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस परियोजना के निरस्त होने की पुष्टि की थी। आलोचकों का कहना है कि यह पैटर्न दर्शाता है कि केरल को रेलवे पुनर्गठन में बार-बार नुकसान उठाना पड़ा है।
यात्री और माल परिवहन पर असर
सांसद ने बताया कि कोझिकोड-मंगलूरु सेक्टर पर वर्तमान में 47 जोड़ी ट्रेनें संचालित होती हैं, जिनमें दो वंदे भारत एक्सप्रेस भी शामिल हैं। मंगलूरु-तिरुवनंतपुरम वंदे भारत सेवा को यात्रियों की बढ़ती माँग के चलते कई बार विस्तार दिया जा चुका है। उन्होंने मंगलूरु-कासरगोड-शोरानूर रेल कॉरिडोर पर जारी क्षमता विस्तार योजनाओं का भी उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि इतने महत्वपूर्ण मार्ग पर संस्थागत विभाजन बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है।
सरकार से माँग और आगे की राह
डॉ. ब्रिटास ने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले पालक्काड मंडल की वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों, मालभाड़ा आय और भविष्य की निवेश क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक अध्ययन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार, सांसदों, रेलवे कर्मचारियों और अन्य हितधारकों से पर्याप्त परामर्श नहीं हुआ। केरल लंबे समय से अलग रेलवे जोन और मज़बूत रेलवे संस्थानों की माँग करता रहा है, परंतु अब तक इस दिशा में सार्थक प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया कि वे रेलवे बोर्ड के इस फैसले पर पुनर्विचार करवाएँ और पालक्काड मंडल की दीर्घकालिक स्थिरता तथा मालाबार क्षेत्र के रेलवे विकास हितों की रक्षा सुनिश्चित करें।