मेकेदातु विवाद: 13 अगस्त को कर्नाटक बंद, वताल नागराज ने बेंगलुरु वासियों से सड़क पर उतरने की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
मेकेदातु पेयजल परियोजना पर तमिलनाडु के विरोध के खिलाफ 13 अगस्त को आयोजित कर्नाटक बंद को कई प्रमुख कन्नड़ संगठनों का समर्थन मिल रहा है। मांड्या में विभिन्न कन्नड़ संगठनों ने बैठक कर बंद के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया, जबकि कावेरी हितरक्षण वेदिके की बैठक में अंतिम निर्णय की घोषणा अभी बाकी है।
मुख्य घटनाक्रम
कन्नड़ कार्यकर्ता वताल नागराज ने 10 अगस्त को बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए शहरवासियों से बंद में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने मेकेदातु परियोजना का विरोध तो किया है, लेकिन कोई ठोस कारण नहीं बताया कि इससे उन्हें क्या नुकसान होगा।
उसी दिन, कन्नड़ कार्यकर्ताओं ने अनेकल के निकट होसुर हाईवे को अवरुद्ध कर तमिलनाडु के रुख के विरोध में प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद नागराज ने धरना दिया।
बेंगलुरु के पेयजल संकट की चेतावनी
नागराज ने चेतावनी दी कि यदि मेकेदातु परियोजना साकार नहीं हुई तो बेंगलुरु को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर मेकेदातु प्रोजेक्ट लागू नहीं हुआ, तो बेंगलुरु के लिए पानी नहीं बचेगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु में रहने वाले तमिल, तेलुगु, गुजराती और मारवाड़ी समुदायों के लोग भी इस संकट से समान रूप से प्रभावित होंगे, इसलिए यह बंद किसी एक भाषा या क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे शहर का मुद्दा है।
कन्नड़ संगठनों में एकमत नहीं
हालांकि, बंद को लेकर कन्नड़ संगठनों के बीच पूरी तरह आम सहमति नहीं बन पाई है। कर्नाटक रक्षण वेदिके के अध्यक्ष टी.आर. नारायण गौड़ा ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन बंद में भाग लेने के बजाय नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगा।
वरिष्ठ कन्नड़ कार्यकर्ता सा. रा. गोविंदु ने भी बंद का समर्थन न करने की घोषणा की है। केआरवी नेता प्रवीण कुमार शेट्टी ने भी बंद के आह्वान से दूरी बनाए रखी है। इसके अलावा, ओला और उबर कैब एग्रीगेटर्स ओनर्स एंड ड्राइवर्स एसोसिएशन ने भी संकेत दिया है कि वे बंद में शामिल नहीं होंगे।
मेकेदातु विवाद की पृष्ठभूमि
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच वर्षों से विवाद का विषय रही है। कर्नाटक का तर्क है कि कावेरी नदी पर प्रस्तावित यह जलाशय बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनिवार्य है। दूसरी ओर, तमिलनाडु ने कावेरी के निचले क्षेत्रों में जलप्रवाह पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर आपत्ति जताई है।
आगे क्या होगा
कावेरी हितरक्षण वेदिके की आगामी बैठक में बंद को समर्थन देने या न देने का निर्णय लिया जाएगा। अलग-अलग संगठनों के अलग-अलग रुख को देखते हुए, 13 अगस्त के बंद की व्यापकता आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगी।