₹2,110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में शिवम एसोसिएट्स प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर ईडी की गिरफ्त में
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मंगलुरु सब-जोनल कार्यालय ने 13 अगस्त 2026 को शिवम एसोसिएट्स के प्रमुख शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को कथित तौर पर ₹2,110.97 करोड़ के बहु-राज्यीय पोंजी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत की गई इस गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत, मंगलुरु में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 24 अगस्त तक 12 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच एजेंसी के अनुसार, यह मामला मूल रूप से बेलगावी के मालामारुति पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और कर्नाटक निवेशकों के हितों की सुरक्षा अधिनियम, 2004 के तहत दर्ज की गई थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आम लोगों को असामान्य रूप से अधिक और निश्चित रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। ईडी की पीएमएलए जाँच में कथित तौर पर एक सुनियोजित पोंजी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
घोटाले का तरीका और विस्तार
ईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स ने निवेशकों को प्रति माह 3 प्रतिशत रिटर्न का वादा कर कुल ₹2,110.97 करोड़ जुटाए। कंपनी ने डिजिटल नेटवर्क और बड़े रेफरल सिस्टम के ज़रिए कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ में अपना जाल फैलाया।
नए निवेशक लाने वाले स्वतंत्र सलाहकारों को 0.5 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। जाँच में सामने आया कि कंपनी को वर्ष 2019 से शेयर बाज़ार में लगातार भारी नुकसान हो रहा था। कथित तौर पर इन नुकसानों को छिपाने के लिए नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को ब्याज चुकाया जाता था — जो पोंजी योजना की क्लासिक पहचान है।
धन के दुरुपयोग के आरोप
ईडी का आरोप है कि कथित रूप से गबन की गई रकम को शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और शिवम प्रोडक्शंस सहित विभिन्न निजी खातों, परिवार के सदस्यों और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया।
एजेंसी के अनुसार, इस रकम का उपयोग लग्ज़री गाड़ियाँ खरीदने, महँगे बंगले बनाने, अन्य लोगों के नाम पर संपत्तियाँ खरीदने और फिल्म निर्माण में निवेश करने के लिए किया गया। ईडी ने इस कथित राशि को पीएमएलए के तहत 'अपराध से अर्जित आय' (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) घोषित किया है।
नीलन्नावर की भूमिका
ईडी के मुताबिक, नीलन्नावर शिवम एसोसिएट्स में धन के प्रवाह का मुख्य प्रबंधक था और फर्म का बहुमत हिस्सेदार होने के कारण उसका प्रमुख नियंत्रण भी उसी के पास था। गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देश में पोंजी और चिटफंड जैसी अनियमित निवेश योजनाओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाइयाँ लगातार तेज हो रही हैं।
आगे की जाँच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच जारी है ताकि बाकी देनदारियों का पता लगाया जा सके और धन के पूरे प्रवाह की जानकारी जुटाई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-राज्यीय नेटवर्क की जटिलता को देखते हुए जाँच लंबी खिंच सकती है और अन्य गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।