14 अगस्त 2026
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₹2,110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में शिवम एसोसिएट्स प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर ईडी की गिरफ्त में

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₹2,110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में शिवम एसोसिएट्स प्रमुख शिवानंद नीलन्नावर ईडी की गिरफ्त में

सारांश

मंगलुरु ईडी ने शिवम एसोसिएट्स के मुखिया शिवानंद नीलन्नावर को ₹2,110 करोड़ के कथित पोंजी घोटाले में दबोचा — जो कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ तक फैला था। हर महीने 3% रिटर्न का लालच, डिजिटल रेफरल नेटवर्क और लग्ज़री संपत्तियों में रकम की खपत — यह मामला अनियमित निवेश योजनाओं की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है।

मुख्य बातें

शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को ईडी ने 13 अगस्त 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया।
विशेष पीएमएलए अदालत, मंगलुरु ने उन्हें 24 अगस्त तक 12 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा।
शिवम एसोसिएट्स ने निवेशकों को प्रति माह 3% रिटर्न का वादा कर कथित तौर पर ₹2,110.97 करोड़ जुटाए।
घोटाला कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ तक फैला; रेफरल सलाहकारों को 0.5% कमीशन।
कंपनी को 2019 से शेयर बाज़ार में नुकसान; नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान का आरोप।
कथित रकम का उपयोग लग्ज़री गाड़ियों, बंगलों, संपत्तियों और फिल्म निर्माण में किए जाने का आरोप।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मंगलुरु सब-जोनल कार्यालय ने 13 अगस्त 2026 को शिवम एसोसिएट्स के प्रमुख शिवानंद सिद्धप्पा नीलन्नावर को कथित तौर पर ₹2,110.97 करोड़ के बहु-राज्यीय पोंजी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत की गई इस गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत, मंगलुरु में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 24 अगस्त तक 12 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच एजेंसी के अनुसार, यह मामला मूल रूप से बेलगावी के मालामारुति पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर पर आधारित है। यह एफआईआर अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और कर्नाटक निवेशकों के हितों की सुरक्षा अधिनियम, 2004 के तहत दर्ज की गई थी।

एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आम लोगों को असामान्य रूप से अधिक और निश्चित रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। ईडी की पीएमएलए जाँच में कथित तौर पर एक सुनियोजित पोंजी नेटवर्क का खुलासा हुआ।

घोटाले का तरीका और विस्तार

ईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स ने निवेशकों को प्रति माह 3 प्रतिशत रिटर्न का वादा कर कुल ₹2,110.97 करोड़ जुटाए। कंपनी ने डिजिटल नेटवर्क और बड़े रेफरल सिस्टम के ज़रिए कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ में अपना जाल फैलाया।

नए निवेशक लाने वाले स्वतंत्र सलाहकारों को 0.5 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। जाँच में सामने आया कि कंपनी को वर्ष 2019 से शेयर बाज़ार में लगातार भारी नुकसान हो रहा था। कथित तौर पर इन नुकसानों को छिपाने के लिए नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को ब्याज चुकाया जाता था — जो पोंजी योजना की क्लासिक पहचान है।

धन के दुरुपयोग के आरोप

ईडी का आरोप है कि कथित रूप से गबन की गई रकम को शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और शिवम प्रोडक्शंस सहित विभिन्न निजी खातों, परिवार के सदस्यों और सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया।

एजेंसी के अनुसार, इस रकम का उपयोग लग्ज़री गाड़ियाँ खरीदने, महँगे बंगले बनाने, अन्य लोगों के नाम पर संपत्तियाँ खरीदने और फिल्म निर्माण में निवेश करने के लिए किया गया। ईडी ने इस कथित राशि को पीएमएलए के तहत 'अपराध से अर्जित आय' (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) घोषित किया है।

नीलन्नावर की भूमिका

ईडी के मुताबिक, नीलन्नावर शिवम एसोसिएट्स में धन के प्रवाह का मुख्य प्रबंधक था और फर्म का बहुमत हिस्सेदार होने के कारण उसका प्रमुख नियंत्रण भी उसी के पास था। गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देश में पोंजी और चिटफंड जैसी अनियमित निवेश योजनाओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाइयाँ लगातार तेज हो रही हैं।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जाँच जारी है ताकि बाकी देनदारियों का पता लगाया जा सके और धन के पूरे प्रवाह की जानकारी जुटाई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-राज्यीय नेटवर्क की जटिलता को देखते हुए जाँच लंबी खिंच सकती है और अन्य गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

2019' के बावजूद यह नेटवर्क इतने बड़े पैमाने पर कैसे चला — और क्या गिरफ्तारी के बाद पीड़ित निवेशकों को उनकी रकम वापस मिल पाएगी, जो अभी तक अनुत्तरित है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवम एसोसिएट्स पोंजी घोटाला क्या है?
शिवम एसोसिएट्स पर आरोप है कि उसने निवेशकों को प्रति माह 3% रिटर्न का वादा कर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर ₹2,110.97 करोड़ जुटाए। नए निवेशकों की रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था, जो पोंजी योजना की विशेषता है।
शिवानंद नीलन्नावर को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ईडी के अनुसार, नीलन्नावर शिवम एसोसिएट्स में धन के प्रवाह का मुख्य प्रबंधक था और फर्म का बहुमत हिस्सेदार भी था। उन्हें 13 अगस्त 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया।
नीलन्नावर को कितने दिनों की हिरासत में भेजा गया है?
विशेष पीएमएलए अदालत, मंगलुरु ने उन्हें 24 अगस्त 2026 तक 12 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा है। जाँच अभी जारी है।
कथित घोटाले की रकम का उपयोग कहाँ किया गया?
ईडी का आरोप है कि रकम को शिवम सेवा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड और शिवम प्रोडक्शंस जैसी सहयोगी संस्थाओं के ज़रिए घुमाया गया। इसका उपयोग लग्ज़री गाड़ियाँ, महँगे बंगले, अन्य के नाम पर संपत्तियाँ और फिल्म निर्माण में किए जाने का आरोप है।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज है और आगे क्या होगा?
मामला अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और कर्नाटक निवेशकों के हितों की सुरक्षा अधिनियम, 2004 के तहत दर्ज है। ईडी ने कहा है कि बाकी देनदारियों और धन के पूरे प्रवाह का पता लगाने के लिए जाँच जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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