29 अगस्त 2026
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केपीएससी घोटाला: कुमारस्वामी का आरोप — प्रियांक खरगे ने अनियमितताएं छिपाने को संभाला गृह विभाग

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केपीएससी घोटाला: कुमारस्वामी का आरोप — प्रियांक खरगे ने अनियमितताएं छिपाने को संभाला गृह विभाग

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने मैसूरु में सीधे सवाल दागा — क्या प्रियांक खरगे ने केपीएससी भर्ती घोटाले को दबाने के लिए गृह विभाग का प्रभार लिया? फोरेंसिक रिपोर्ट के बावजूद एफआईआर न होना और उच्च न्यायालय का ₹3 लाख जुर्माना — यह विवाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के लिए नई मुश्किल बन सकता है।

मुख्य बातें

कुमारस्वामी ने 28 अगस्त को मैसूरु में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे पर केपीएससी भर्ती अनियमितताएं दबाने का आरोप लगाया।
आरोप है कि खरगे के आरडीपीआर मंत्री रहते सहायक कार्यकारी अभियंता (ग्रेड-I) भर्ती में व्यापक गड़बड़ी हुई, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
फोरेंसिक प्रयोगशाला रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद भी कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए गए।
उच्च न्यायालय ने खरगे के विभाग के अधिकारियों पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया।
कुमारस्वामी ने एनआईसीई सड़क टोल मुद्दे पर पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली को भी आड़े हाथों लिया।
मैसूरु में केआईएडीबी द्वारा 169 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कुमारस्वामी ने किसानों के साथ खड़े होने का वादा किया।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 28 अगस्त को मैसूरु में पत्रकारों से बात करते हुए कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे पर गंभीर आरोप लगाए। कुमारस्वामी का कहना है कि खरगे ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को दबाने के उद्देश्य से गृह विभाग का प्रभार अपने हाथ में लिया।

मुख्य आरोप: भर्ती में अनियमितता और चुप्पी

कुमारस्वामी के अनुसार, जब प्रियांक खरगे ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री (आरडीपीआर) के पद पर थे, उस दौरान सहायक कार्यकारी अभियंता (ग्रेड-I) की भर्ती में व्यापक अनियमितताएं हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि खरगे ने उस समय इस पर चुप्पी क्यों साधे रखी और दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) क्यों नहीं दर्ज कराई।

कुमारस्वामी ने कहा, 'मैं प्रियांक खरगे से पूछना चाहता हूं — जब यह भर्ती हुई थी, तब विभाग के मंत्री कौन थे? चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आने के बाद क्या आपने इस मामले को दबाने के लिए गृह मंत्रालय का प्रभार संभाला? दोषियों के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई?'

फोरेंसिक रिपोर्ट और उच्च न्यायालय की फटकार

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि फोरेंसिक प्रयोगशाला की रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं के संकेत मिले थे, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि खरगे के विभाग को हाल ही में उच्च न्यायालय में आलोचना का सामना करना पड़ा और अदालत ने संबंधित अधिकारियों पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया। उनके अनुसार, खरगे पारदर्शिता का दावा करते हैं, लेकिन न्यायालय का यह निर्णय उनके दावों पर सवाल खड़ा करता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और पलटवार

कुमारस्वामी ने खरगे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आलोचना पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'आप बार-बार कहते हैं कि आरएसएस देश के लिए खतरा है — असल में, कांग्रेस देश के लिए खतरा है।' साथ ही उन्होंने खरगे पर भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन की आलोचना करते हुए स्वयं तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके के साथ गठबंधन करने का आरोप लगाया और कांग्रेस नेताओं पर अपने सिद्धांतों से समझौते का इल्ज़ाम लगाया।

एनआईसीई सड़क टोल और पीडब्ल्यूडी मंत्री पर निशाना

कुमारस्वामी ने लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली के उस बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनआईसीई सड़क पर टोल वसूली रोकना संभव नहीं, क्योंकि राज्य सरकार और एनआईसीई के बीच समझौता अगले 10 वर्षों तक वैध है। कुमारस्वामी ने कहा कि पीडब्ल्यूडी मंत्री को इस मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं है और उन्हें कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए, न कि जनता को गलत जानकारी देनी चाहिए।

मैसूरु में कृषि भूमि अधिग्रहण पर रुख

मैसूरु में कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) द्वारा 169 एकड़ कृषि भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण पर कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि यदि भूमि उपजाऊ है, तो वे इसका विरोध करेंगे और स्वयं मौके पर जाकर किसानों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि वे मैसूरु जिले के वरुणा विधानसभा क्षेत्र के मदारल्ली में प्रभावित किसानों से मिलेंगे और स्थिति का आकलन करेंगे। उनका कहना है कि मांड्या में उद्योग के लिए सूखी भूमि की मांग की गई थी, ऐसे में उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का कोई औचित्य नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि फोरेंसिक रिपोर्ट के बावजूद एफआईआर दर्ज न होना किसकी जिम्मेदारी है — यह जवाब न तो खरगे ने दिया, न ही कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया। उच्च न्यायालय का ₹3 लाख जुर्माना और केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल — ये महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से परे एक प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करते हैं। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि भर्ती पारदर्शिता पर उसकी साख दांव पर है। जब तक स्वतंत्र जांच और सत्यापन-योग्य परिणाम सामने नहीं आते, यह विवाद चुनावी हथियार बना रहेगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपीएससी भर्ती अनियमितता मामला क्या है?
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की सहायक कार्यकारी अभियंता (ग्रेड-I) भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का यह मामला है, जो कथित तौर पर उस दौरान हुईं जब प्रियांक खरगे ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री थे। फोरेंसिक प्रयोगशाला रिपोर्ट में भी गड़बड़ी के संकेत बताए गए हैं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
कुमारस्वामी ने प्रियांक खरगे पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी का आरोप है कि खरगे ने केपीएससी घोटाले को दबाने के लिए गृह विभाग का प्रभार संभाला। उन्होंने यह भी पूछा कि आरडीपीआर मंत्री रहते हुए खरगे ने न तो घोटाले के बारे में बोला, न दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
उच्च न्यायालय ने खरगे के विभाग पर जुर्माना क्यों लगाया?
कुमारस्वामी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने खरगे के विभाग के अधिकारियों पर ₹3 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि इसका विस्तृत कारण स्रोत में स्पष्ट नहीं किया गया है, कुमारस्वामी ने इसे खरगे के पारदर्शिता के दावों पर सवाल उठाने के लिए उद्धृत किया।
मैसूरु में कृषि भूमि अधिग्रहण विवाद क्या है?
कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) मैसूरु में औद्योगिक उद्देश्यों के लिए 169 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहित करने का प्रस्ताव रखता है। कुमारस्वामी ने कहा कि यदि यह उपजाऊ भूमि है तो वे इसका विरोध करेंगे और प्रभावित किसानों से मिलने वरुणा विधानसभा क्षेत्र के मदारल्ली जाएंगे।
एनआईसीई सड़क टोल विवाद में कुमारस्वामी का क्या कहना है?
पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली के उस बयान पर कि एनआईसीई सड़क पर टोल वसूली नहीं रोकी जा सकती क्योंकि समझौता अगले 10 वर्षों तक वैध है, कुमारस्वामी ने कहा कि मंत्री को इस मुद्दे की पूरी जानकारी नहीं है और उन्हें कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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