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क्या केरल में कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की?

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क्या केरल में कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की?

सारांश

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव आयोग से एसआईआर प्रक्रिया में अव्यवस्था को लेकर तुरंत हस्तक्षेप की गुहार लगाई है, जिससे लाखों मतदाताओं के अधिकारों को खतरा हो सकता है। क्या यह मामला चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता को प्रभावित कर रहा है?

मुख्य बातें

केरल में एसआईआर प्रक्रिया में अव्यवस्था है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की।
लाखों मतदाता प्रभावित हो रहे हैं।
पारदर्शिता की आवश्यकता है।
मतदाता अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।

तिरुवनंतपुरम, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने शनिवार को राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में गंभीर भ्रम और बड़े पैमाने पर अव्यवस्था पैदा हो गई है, जिससे लाखों वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार से वंचित होने का खतरा है।

केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष पी.सी. विष्णुनाथ विधायक के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपाध्यक्ष एम. विंसेंट विधायक और मैथ्यू कुज़लनादन विधायक के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रतन यू. केलकर से मुलाकात की और अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि त्रुटिपूर्ण प्रक्रियाओं, अवैज्ञानिक वार्ड और बूथ परिसीमन तथा लिपिकीय गलतियों के चलते पूरे केरल में मतदाताओं के लिए अराजक स्थिति पैदा हो गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बिना समुचित भौगोलिक सत्यापन के वार्ड और बूथों का पुनर्गठन किया गया, जिसके कारण एक ही बूथ के मतदाता अलग-अलग स्थानों में बंट गए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि इससे खासकर बुजुर्ग मतदाताओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

केपीसीसी प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के नाम पर मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केवल लिपिकीय या सॉफ्टवेयर से जुड़ी त्रुटियों के कारण मतदाताओं को सुनवाई के लिए न बुलाया जाए।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि जिन मतदाताओं ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, उन्हें केवल इस आधार पर सुनवाई के लिए न बुलाया जाए कि उनका नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से तथाकथित “अवैज्ञानिक बूथ परिसीमन” को तुरंत दुरुस्त करने की मांग की, ताकि आगे की जटिलताओं से बचा जा सके।

मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मिलान में गड़बड़ी और विसंगतियों के कारण करीब 18 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उनका तर्क था कि सॉफ्टवेयर की खामियों या निर्वाचन अधिकारियों की प्रशासनिक चूक के लिए मतदाताओं को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

केपीसीसी ने राज्य भर में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने की भी मांग की और हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या एसआईआर प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है?
जी हां, कांग्रेस का मानना है कि इस प्रक्रिया में सुधार की सख्त जरूरत है।
क्यों कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया?
कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया है क्योंकि यह लाखों मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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