जयशंकर-त्रिनिदाद PM बिसेसर की UN में मुलाकात, एक्जिम बैंक फंडिंग और व्यापार वृद्धि पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला पर्सद-बिसेसर से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग गहरा करने, व्यापार बढ़ाने और भारत के एक्जिम बैंक के माध्यम से विकास परियोजनाओं की फंडिंग पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष जुलाई 2025 में हुई त्रिनिदाद यात्रा के दौरान की गई प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिहाज से भी अहम रही।
बैठक में क्या हुई चर्चा
प्रधानमंत्री बिसेसर ने बैठक के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हमने अधिक आर्थिक सहयोग, व्यापार में वृद्धि और विकास परियोजनाओं के लिए एक्जिम बैंक से फंडिंग के जरिए टीएंडटी-भारत संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। हमारी पुरानी दोस्ती लगातार बढ़ रही है।' वहीं, विदेश मंत्री जयशंकर ने भी एक्स पर बताया कि उन्होंने 'प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान की गई प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन में हुई प्रगति पर ध्यान दिया।'
मोदी की यात्रा की प्रतिबद्धताएँ और उनकी स्थिति
जुलाई 2025 की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद के प्रमुख शैक्षिक कार्यक्रमों के लिए 2,000 लैपटॉप देने, वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में हिंदी और भारतीय अध्ययन में अकादमिक पदों के पुनरुद्धार और 800 लोगों के लिए कृत्रिम अंग प्रदान करने पर सहमति जताई थी। साथ ही, भारत ने त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (QIP) पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत नई दिल्ली हर वर्ष पाँच परियोजनाओं के लिए $50,000 देगी। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के भवन में बिजली उत्पादन के लिए एक सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम स्थापित करने की भी प्रतिबद्धता जताई गई थी।
मई 2026 में हुए आठ समझौते
गौरतलब है कि मई 2026 में विदेश मंत्री जयशंकर की दो दिवसीय त्रिनिदाद यात्रा के दौरान भारत और त्रिनिदाद व टोबैगो ने पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढाँचा और आयुर्वेद सहित विभिन्न क्षेत्रों में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। उन समझौतों में विदेश एवं कैरीकॉम मामलों के मंत्रालय के भवन के सौर ऊर्जा संयंत्रीकरण, वेक्टर नियंत्रण, नेल्सन द्वीप के बुनियादी ढाँचे के उन्नयन और वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में आयुर्वेद पर एक भारतीय चेयर की स्थापना शामिल थे।
भारतीय प्रवासी और ऐतिहासिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब त्रिनिदाद में भारतीय मूल के लगभग 5 लाख 75 हजार लोग रहते हैं, जो कैरेबियन देश की आबादी का लगभग 42 प्रतिशत हैं। प्रधानमंत्री मोदी की जुलाई 2025 की यात्रा उस ऐतिहासिक क्षण में हुई थी जब त्रिनिदाद 1845 में भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगाँठ मना रहा था। यह सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय जड़ें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को अन्य कैरेबियाई देशों से अलग बनाती हैं।
आगे क्या होगा
23 सितंबर की इस बैठक में दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि साझेदारी को अब केवल सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं रखा जाएगा — एक्जिम बैंक वित्तपोषण और QIP ढाँचे के जरिये आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देने पर ज़ोर रहेगा। यूएन महासभा की साइडलाइन पर हुई यह मुलाकात संकेत देती है कि भारत अपनी कैरेबियाई कूटनीति को और अधिक सक्रिय करने की दिशा में बढ़ रहा है।