केरल हाई कोर्ट ने IAS अधिकारी के. बिजू की माफी ठुकराई, न्यायपालिका से न टकराने की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को काजू विभाग के सचिव एवं IAS अधिकारी के. बिजू द्वारा दाखिल बिना शर्त माफी को अस्वीकार कर दिया। यह माफी काजू विकास निगम (Cashew Development Corporation) के बहु-करोड़ भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन स्वीकृति से जुड़े विवादास्पद सरकारी आदेश के संदर्भ में दी गई थी। अदालत ने बिजू को नए सिरे से एक संशोधित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें कोर्ट द्वारा इंगित महत्वपूर्ण कमियों का स्पष्ट उल्लेख हो।
मामले की पृष्ठभूमि
यह अवमानना कार्यवाही काजू विकास निगम आयात भ्रष्टाचार मामले से जुड़ी है, जिसमें INTUC नेता आर. चंद्रशेखरन सहित अन्य अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को अभियोजन स्वीकृति देने वाले सरकारी आदेश की भाषा पर विवाद खड़ा हुआ था। केरल हाई कोर्ट ने पहले ही उस आदेश की शब्दावली पर कड़ी आपत्ति जताई थी, यह कहते हुए कि उससे यह आभास होता है कि सरकार ने अभियोजन की मंजूरी केवल हाई कोर्ट के दबाव में दी — जिससे न्यायपालिका पर अनुचित जिम्मेदारी थोपी जा रही थी।
माफी में क्या था और कोर्ट ने क्यों ठुकराया
अदालत में समन मिलने पर के. बिजू ने हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्वीकार किया कि आदेश में प्रयुक्त भाषा अनुचित थी, हालाँकि उनके अनुसार यह जानबूझकर नहीं की गई थी। उन्होंने उन सभी अभिव्यक्तियों को वापस भी ले लिया जिन्हें हाई कोर्ट के अधिकार या विवेक पर प्रश्नचिह्न लगाने वाला समझा जा सकता था।
हालाँकि, अदालत ने माफी को अपूर्ण करार देते हुए कहा कि हलफनामे में इस तथ्य का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया कि सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने के बाद ही अभियोजन की स्वीकृति दी थी। इस महत्वपूर्ण चूक के कारण कोर्ट ने हलफनामा लौटा दिया।
न्यायपालिका की कड़ी चेतावनी
हलफनामा अस्वीकार करते हुए अदालत ने केरल के नौकरशाहों को एक तीखा संदेश दिया। न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'कोर्ट से टकराव की कोशिश न करें — यदि आप ऐसा करते हैं, तो कोई भी सरकार आपकी रक्षा नहीं कर सकती।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकारी अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं, न कि केवल सरकार का बचाव करने के लिए।
अदालत ने नेपोलियन बोनापार्ट को उद्धृत करते हुए कहा कि 'एक बहादुर व्यक्ति केवल एक बार मरता है' — जो सिविल सेवकों को न्यायपालिका से जुड़े मामलों में सरकार का मोहरा बनने के विरुद्ध एक प्रतीकात्मक चेतावनी थी।
आगे क्या होगा
अदालत ने के. बिजू को निर्देश दिया है कि वे कोर्ट द्वारा इंगित सभी कमियों को शामिल करते हुए एक नया और पूर्ण हलफनामा दाखिल करें। यह मामला केरल में नौकरशाही और न्यायपालिका के बीच सीमाओं की व्यापक बहस का केंद्र बन गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले न्यायिक समीक्षा के दायरे में हैं।