केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 'नवा केरल सर्वेक्षण' पर रोक हटाई

Click to start listening
केरल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, 'नवा केरल सर्वेक्षण' पर रोक हटाई

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को 'नवा केरल सर्वेक्षण' को आगे बढ़ाने की अनुमति दी है, जिससे राजनीतिक विवादों के बीच राज्य सरकार को महत्वपूर्ण राहत मिली है। अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने 'नवा केरल सर्वेक्षण' पर रोक हटाई।
  • सरकार को कल्याणकारी योजनाओं का आकलन करने का अधिकार है।
  • अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
  • 20 करोड़ रुपए के व्यय का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश।
  • राजनीतिक आलोचना से शासन संबंधी कार्यों पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए मंगलवार को केरल उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य के प्रस्तावित 'नवा केरल सर्वेक्षण' को स्थगित किया गया था। इस आदेश के बाद सरकार को इस कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

पिछले सप्ताह, उच्च न्यायालय ने केरल छात्र संघ (केएसयू) के नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर सर्वेक्षण पर रोक लगा दी थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि चुनावों से पहले चलाया गया डाटा संग्रह अभियान एक राजनीतिक रूप से प्रेरित और सार्वजनिक धन से वित्त पोषित था।

उच्च न्यायालय ने 'नवा केरल सर्वेक्षण' को गैरकानूनी करार देते हुए इसे रद्द कर दिया और इसके वित्तपोषण तथा क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम के लिए न तो उचित बजट आवंटन किया गया था और न ही वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी।

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

कोर्ट में राज्य की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क किया कि सरकार के पास यह आकलन करने का अधिकार है कि कल्याणकारी योजनाएं लाभार्थियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं और प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए डाटा एकत्र करने का भी अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को मानते हुए टिप्पणी की कि सरकारें उन योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए ऐसे सर्वेक्षण करने की हकदार हैं जिन पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को रोकने के आधार पर सवाल उठाया और पूछा कि कल्याणकारी कार्यक्रम इच्छित परिणाम दे रहे हैं या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए जानकारी एकत्र करने में क्या गलत था।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी सर्वेक्षण की राजनीतिक आलोचना किसी राज्य को शासन संबंधी कार्य करने से रोकने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।

अदालत ने प्रशासनिक मामलों में अनुचित न्यायिक हस्तक्षेप के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए इस बात पर जोर दिया कि जब तक कोई स्पष्ट संवैधानिक उल्लंघन न हो, तब तक संयम बरतने की आवश्यकता है।

सर्वेक्षण को जारी रखने की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगभग 20 करोड़ रुपए के अनुमानित व्यय का विवरण देते हुए एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

Point of View

जो प्रशासनिक मूल्यांकन के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारों को कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने का अधिकार है। यह फैसला न्यायिक हस्तक्षेप के मामलों में संयम बनाए रखने का संदेश भी देता है।
NationPress
25/02/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को क्यों राहत दी?
सुप्रीम कोर्ट ने 'नवा केरल सर्वेक्षण' पर हाईकोर्ट की रोक हटाते हुए सरकार को इसे जारी रखने की अनुमति दी, यह कहते हुए कि सरकारों को कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने का अधिकार है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
उच्च न्यायालय ने सर्वेक्षण पर रोक क्यों लगाई थी?
उच्च न्यायालय ने आरोप लगाया था कि यह सर्वेक्षण राजनीतिक रूप से प्रेरित और सार्वजनिक धन से वित्त पोषित था।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने सर्वेक्षण को जारी रखने के लिए कोई दिशा-निर्देश दिए?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लगभग 20 करोड़ रुपए के व्यय का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
क्या राजनीतिक आलोचना के आधार पर सर्वेक्षण को रोका जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सर्वेक्षण की राजनीतिक आलोचना किसी राज्य को शासन संबंधी कार्य करने से रोकने का आधार नहीं हो सकती।
Nation Press