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मुनंबम विवाद: CM सतीशन का पिछली वाम सरकार पर बड़ा आरोप, 'जान-बूझकर उलझाया मामला'

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मुनंबम विवाद: CM सतीशन का पिछली वाम सरकार पर बड़ा आरोप, 'जान-बूझकर उलझाया मामला'

सारांश

केरल के CM सतीशन ने मुनंबम जमीन विवाद में पिछली वाम सरकार को सीधे दोषी ठहराया — आरोप है कि सत्ता जाने से पहले वक्फ बोर्ड को 'उम्मीद' पोर्टल में जोड़कर मामला जानबूझकर उलझाया गया। साथ ही संघ परिवार और सीपीआई-एम दोनों पर राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 25 मई को मुनंबम विवाद के लिए पिछली वाम सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
आरोप: पिछली सरकार ने कार्यकाल के अंत में वक्फ बोर्ड को 'उम्मीद' पोर्टल में शामिल कर वक्फ के दावे को मजबूत किया।
सतीशन ने आश्वासन दिया — मुनंबम के किसी भी निवासी को उनके घर से नहीं हटाया जाएगा।
संघ परिवार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और सीपीआई-एम पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप।
सरकार ने निवासियों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाने का वादा किया।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सोमवार, 25 मई को मुनंबम जमीन विवाद को लेकर पिछली वामपंथी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने सत्ता छोड़ने से पहले जानबूझकर ऐसे कदम उठाए जिससे दो धार्मिक समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया और मामला प्रशासनिक रूप से और भी उलझ गया।

मुख्य आरोप: 'उम्मीद' पोर्टल में वक्फ को शामिल करना

सतीशन ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में वक्फ बोर्ड को 'उम्मीद' पोर्टल में शामिल करवाया, जिससे मुनंबम की जमीन पर वक्फ का दावा और मजबूत हो गया। उनके अनुसार, जैसे ही यह जमीन पोर्टल में दर्ज हुई, वक्फ बोर्ड का स्वामित्व-दावा कानूनी रूप से और पुख्ता हो गया।

उन्होंने कहा, 'पिछली सरकार ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जिससे दो धार्मिक समुदाय एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए। उन्होंने जान-बूझकर अपने पीछे एक उलझा हुआ मामला छोड़ दिया।' सतीशन ने यह भी आरोप लगाया कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि किसी भी प्रशासनिक समाधान पर जल्दी निर्णय न लिया जा सके — उनके शब्दों में, 'ताकि इस मामले पर 10 मिनट के अंदर कोई फैसला न लिया जा सके।'

निवासियों को आश्वासन: घर नहीं छोड़ना होगा

मुख्यमंत्री ने मुनंबम के निवासियों को स्पष्ट आश्वासन दिया कि मौजूदा सरकार किसी को भी उसके घर से नहीं निकालेगी। उन्होंने कहा, 'मौजूदा सरकार मुनंबम में रहने वाले लोगों को वहाँ से नहीं हटाएगी। किसी को भी उसके घर से बाहर नहीं निकाला जाएगा।'

सतीशन ने यह भी कहा कि पिछली सरकार का रवैया वहाँ के निवासियों को 'अतिक्रमणकारी' मानने जैसा था, जो इस पोर्टल-प्रविष्टि से स्पष्ट होता है। मौजूदा सरकार इस दृष्टिकोण को नहीं मानती।

संघ परिवार और सीपीआई-एम पर भी निशाना

सतीशन ने केवल पिछली सरकार तक ही आरोप सीमित नहीं रखे। उन्होंने संघ परिवार पर आरोप लगाया कि वह इस तटीय इलाके में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए इस विवाद का दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उन्होंने सीपीआई-एम पर भी यह कहते हुए निशाना साधा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे से राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि सतीशन ने एक साथ दोनों प्रमुख विरोधी राजनीतिक ताकतों को कठघरे में खड़ा किया।

मुनंबम विवाद की पृष्ठभूमि

मुनंबम केरल का एक तटीय क्षेत्र है जहाँ निवासी लंबे समय से अपनी जमीन के अधिकारों की स्थायी सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। विवाद की जड़ में यह सवाल है कि क्या यह भूमि वक्फ बोर्ड की है — एक ऐसा दावा जिसे निवासी चुनौती देते आए हैं। यह ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो गया है जब देशभर में वक्फ संपत्ति से जुड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद चर्चा में हैं।

गौरतलब है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि सामुदायिक पहचान और अधिकारों का भी है, जो इसे केरल की राजनीति में विशेष रूप से विस्फोटक बनाता है।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री सतीशन ने भरोसा दिलाया कि सरकार निवासियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाएगी और मामले को पूरी तरह विधिसम्मत तरीके से सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान वहाँ रह रहे लोगों पर फिलहाल कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। अब सवाल यह है कि क्या सरकार वक्फ बोर्ड के दावों को कानूनी रूप से चुनौती देगी या कोई वैकल्पिक प्रशासनिक रास्ता अपनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक विरोधाभास भी है — वे संघ परिवार और सीपीआई-एम दोनों पर एक साथ आरोप लगाते हैं, जो दर्शाता है कि मुनंबम अब सभी दलों के लिए एक सुविधाजनक राजनीतिक मैदान बन चुका है। असली सवाल यह है कि 'उम्मीद' पोर्टल में वक्फ प्रविष्टि को पलटने या निवासियों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए मौजूदा सरकार ठोस कदम कब और कैसे उठाएगी — क्योंकि आश्वासन देना और कानूनी समाधान निकालना दो अलग-अलग काम हैं। वक्फ संपत्ति विवादों की जटिल न्यायिक प्रकृति को देखते हुए, यह मामला अदालतों में वर्षों तक खिंच सकता है, और तब तक निवासियों की अनिश्चितता बनी रहेगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुनंबम जमीन विवाद क्या है?
मुनंबम केरल का एक तटीय क्षेत्र है जहाँ वक्फ बोर्ड ने जमीन पर दावा किया है, जबकि वहाँ के निवासी दशकों से उस भूमि पर रह रहे हैं और अपने अधिकारों की स्थायी सुरक्षा माँग रहे हैं। यह विवाद कानूनी, सामुदायिक और राजनीतिक — तीनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है।
CM सतीशन ने पिछली सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सतीशन ने आरोप लगाया कि पिछली वाम सरकार ने सत्ता छोड़ने से पहले वक्फ बोर्ड को 'उम्मीद' पोर्टल में शामिल करवाया, जिससे वक्फ का जमीन पर दावा कानूनी रूप से मजबूत हो गया। उनके अनुसार यह जानबूझकर किया गया ताकि मामले का कोई जल्द प्रशासनिक हल न निकल सके।
मुनंबम के निवासियों को क्या आश्वासन दिया गया है?
मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा सरकार मुनंबम के किसी भी निवासी को उनके घर से नहीं हटाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार निवासियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाएगी।
'उम्मीद' पोर्टल में वक्फ की प्रविष्टि से विवाद कैसे बढ़ा?
सतीशन के अनुसार, जैसे ही मुनंबम की जमीन का ब्योरा 'उम्मीद' पोर्टल में वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज किया गया, वक्फ का स्वामित्व-दावा कानूनी रूप से और पुख्ता हो गया। इससे निवासियों की स्थिति 'अतिक्रमणकारी' जैसी बन गई, जो विवाद को और गहरा करती है।
क्या संघ परिवार और सीपीआई-एम पर भी आरोप लगे?
हाँ, CM सतीशन ने संघ परिवार पर इस तटीय क्षेत्र में सांप्रदायिक दरार पैदा करने के लिए इस मुद्दे के दुरुपयोग का आरोप लगाया। साथ ही सीपीआई-एम पर भी इस संवेदनशील मामले से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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