मुनंबम भूमि विवाद: राजीव चंद्रशेखर ने किरेन रिजिजू से की मुलाकात, UMEED पोर्टल से 400 एकड़ की अवैध एंट्री हटाने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार, 27 मई 2025 को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू से नई दिल्ली में मुलाकात कर मुनंबम भूमि विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना 400 एकड़ से अधिक विवादित भूमि को एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (UMEED) पोर्टल पर एकतरफा पंजीकृत कर लिया है। चंद्रशेखर ने रिजिजू से केंद्र की पर्यवेक्षी शक्तियों का प्रयोग कर इन संपत्तियों को पोर्टल से हटवाने का अनुरोध किया।
मुख्य घटनाक्रम
चंद्रशेखर ने रिजिजू को सौंपे गए लिखित अनुरोध में कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत केवल 'मुतवल्ली' को ही UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रिकॉर्ड अपलोड करने का अधिकार है, परंतु इस मामले में यह अधिकार फारूक कॉलेज के पास है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद वक्फ बोर्ड ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना संपत्ति को अपने नाम दर्ज कर लिया — जिसे उन्होंने वक्फ अधिनियम और UMEED ढाँचे का 'घोर उल्लंघन' बताया।
गौरतलब है कि एक दिन पहले केरल राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के.एस. हमजा ने कहा था कि मुनंबम की विवादित भूमि वक्फ संपत्ति है और इसे राज्य की अन्य वक्फ संपत्तियों के साथ UMEED पोर्टल पर विधिवत पंजीकृत किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार को जनता को आश्वस्त किया था कि मुनंबम भूमि विवाद से प्रभावित निवासियों को उनके घरों से बेदखल नहीं किया जाएगा। चंद्रशेखर की केंद्र से हस्तक्षेप की माँग इसी आश्वासन के ठीक एक दिन बाद आई, जिसे भाजपा ने राज्य सरकार के रुख पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा ने नवगठित यूडीएफ सरकार पर स्थानीय निवासियों से किए वादे तोड़ने और अल्पसंख्यक समूहों के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। चंद्रशेखर ने इसे 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया।
आम जनता पर असर
मुनंबम के सैकड़ों निवासी वर्षों से इस भूमि पर काबिज हैं और उनके पास भूमि स्वामित्व के दस्तावेज़ भी हैं। वक्फ बोर्ड के दावे के बाद उनकी संपत्तियों की कानूनी स्थिति अनिश्चित हो गई है। यह विवाद केरल में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन चुका है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर स्थानीय परिवारों की आजीविका और आवास सुरक्षा जुड़ी हुई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कानूनी जानकारों के अनुसार, वक्फ संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया में 'मुतवल्ली' की भूमिका केंद्रीय होती है और इस प्रक्रिया को दरकिनार करना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण है। आलोचकों का कहना है कि UMEED पोर्टल पर विवादित संपत्तियों का पंजीकरण वक्फ अधिनियम में हाल के संशोधनों की भावना के भी विरुद्ध है।
क्या होगा आगे
अब सबकी नज़रें केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं — क्या केंद्र सरकार UMEED पोर्टल से इन प्रविष्टियों को हटाने के लिए अपनी पर्यवेक्षी शक्तियों का उपयोग करेगी। यह मामला संसद के आगामी सत्र में भी उठाए जाने की संभावना है, और केरल में आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।