कर्नाटक वक्फ भूमि विवाद: भाजपा का आरोप — 1.80 लाख आरटीसी में वक्फ एंट्री, किसानों के अधिकार खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में वक्फ भूमि विवाद एक बार फिर राजनीतिक रूप से तीखा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 29 जून 2026 को आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार राज्यभर के भूमि रिकॉर्ड — विशेष रूप से 'रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, टेनेंसी एंड क्रॉप्स' (आरटीसी) — में वक्फ से जुड़ी एंट्रीज दर्ज करके लाखों किसानों के मालिकाना हक को संकट में डाल रही है। उनके अनुसार, 1.80 लाख से अधिक आरटीसी में पहले ही ऐसी एंट्रीज दर्ज हो चुकी हैं और यह प्रक्रिया लगभग 3 लाख भूमि रिकॉर्ड तक विस्तारित होने की आशंका है।
मुख्य आरोप और आंकड़े
अशोक ने जिलेवार आँकड़े पेश करते हुए बताया कि कारवार में लगभग 73,000, मंगलुरु में 48,000, शिवमोग्गा में 38,000, बेंगलुरु दक्षिण में 18,000, कलबुर्गी में 17,000 और बागलकोट में 17,000 आरटीसी में वक्फ से संबंधित एंट्रीज हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सभी 31 जिलों के किसान इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं।
अशोक ने आरटीसी के कॉलम 11 में वक्फ का उल्लेख होने की रिपोर्टों को गंभीर बताते हुए कहा कि यह 'सिर्फ रिकॉर्ड में बदलाव का मामला नहीं, बल्कि मालिकाना हक, रोज़ी-रोटी और किसानों के भविष्य का सवाल है।' उन्होंने चेतावनी दी कि इन एंट्रीज के कारण किसानों को अपनी जमीन बेचने, बैंक ऋण लेने या मालिकाना हक के उपयोग में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार से मांगें
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को संबोधित करते हुए अशोक ने तीन माँगें रखीं — पूरी प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए, आरटीसी में वक्फ से जुड़ी सभी एंट्रीज की समीक्षा की जाए और इस मुद्दे पर जनता के सामने एक श्वेत पत्र जारी किया जाए। उन्होंने कहा, 'अगर रिपोर्ट गलत हैं, तो सरकार को तुरंत लोगों के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। हालांकि, अगर किसानों के आरटीसी में वाकई ऐसी एंट्रीज की गई हैं, तो सरकार को जवाब देना होगा।'
किसानों की चिंता और राजनीतिक तीखापन
अशोक ने कांग्रेस पर 'तुष्टिकरण की राजनीति' को किसानों के कल्याण से ऊपर रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'किसान देश का पेट भरता है। उसी किसान को अपनी ही जमीन का मालिकाना हक साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगवाना अन्नदाता के श्राप को न्योता देने जैसा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद से वक्फ संपत्ति का मुद्दा राज्य की राजनीति में लगातार गर्म बना हुआ है।
कांग्रेस सरकार का पक्ष
कांग्रेस सरकार का कहना है कि किसी भी किसान के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की जाँच कानून के अनुसार की जाएगी। गौरतलब है कि भाजपा कई वर्षों से यह आरोप लगाती रही है कि वक्फ रिकॉर्ड के तहत किसानों की जमीन पर दावा किया जा रहा है — एक ऐसा विवाद जो अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ चुका है।
आगे क्या
अशोक के इस बयान ने वक्फ भूमि विवाद को कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में एक बार फिर ला दिया है। यह देखना होगा कि कांग्रेस सरकार श्वेत पत्र की माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं, और क्या राज्य के राजस्व विभाग द्वारा आरटीसी एंट्रीज की स्वतंत्र समीक्षा का आदेश दिया जाता है।