गोंडा में एफएसडीए का बड़ा छापा: तीन अवैध गोदामों से ₹1.13 करोड़ की नशीली दवाएं जब्त, एक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने 16 से 18 जुलाई 2025 के बीच चले तीन दिवसीय अभियान में बिना लाइसेंस संचालित तीन अवैध गोदामों पर छापा मारकर ₹1.13 करोड़ मूल्य की नारकोटिक्स और अन्य एलोपैथिक दवाएं जब्त कीं। मामले में शिवम कसौधन को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अमन कसौधन फरार है। दोनों के खिलाफ थाना कोतवाली नगर, गोंडा में स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 की धारा 8/21 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
अभियान की पृष्ठभूमि और कार्रवाई का विवरण
एफएसडीए मुख्यालय, लखनऊ के निर्देश पर एकत्र खुफिया सूचना के आधार पर यह अभियान गोंडा के बरियारपुरवा सोनार गली और बड़गांव क्षेत्र में चलाया गया। कार्रवाई में नौ जिलों के औषधि निरीक्षकों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही। जांच के दौरान गोंडा-बलरामपुर रोड स्थित जयनगरा, बड़गांव में पंजीकृत अमन फार्मास्युटिकल्स अपने लाइसेंस वाले पते पर संचालित नहीं मिली।
पूछताछ के बाद टीम संचालक अमन कसौधन के घर पहुंची, जहां उनके भाई शिवम कसौधन ने स्वीकार किया कि वे बिना किसी वैध औषधि लाइसेंस के बरियारपुरवा स्थित गोदाम से दवा कारोबार कर रहे हैं। इसके बाद टीम को दो अन्य अवैध गोदामों की भी जानकारी मिली, जहां भारी मात्रा में दवाएं भंडारित पाई गईं। छापेमारी के दौरान संचालक दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित कोई वैध अभिलेख, बिल या स्टॉक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं कर सके।
जब्त दवाओं का विवरण
तीनों गोदामों से बरामद सामग्री में लगभग 1.96 लाख ट्रामाडोल इंजेक्शन, 60 हजार अल्प्राजोलम टैबलेट, 63 बोतल कोडीन फॉस्फेट सिरप के अलावा लाखों की संख्या में विभिन्न कैप्सूल और टैबलेट शामिल हैं। ये सभी मनःप्रभावी और नशीली दवाएं हैं जिनकी बिक्री सख्त नियंत्रण के अधीन है। जब्त दवाओं का अनुमानित मूल्य ₹1.13 करोड़ आंका गया है।
एफएसडीए ने 19 दवाओं के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों और फर्मों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तारी और फरार आरोपी
छापेमारी के दौरान पुलिस ने शिवम कसौधन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य संचालक अमन कसौधन मौके से फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 8/21 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अवैध और नकली दवाओं के नेटवर्क के खिलाफ इसी तरह के सख्त अभियान आगे भी जारी रहेंगे। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में नशीली दवाओं की तस्करी और अवैध भंडारण के मामलों पर प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है। गौरतलब है कि बिना लाइसेंस नारकोटिक्स का भंडारण और बिक्री एनडीपीएस अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है, जिसमें कठोर दंड का प्रावधान है।