कावेरी जल विवाद: CM शिवकुमार बोले- CWRC के आदेश के बाद भी तमिलनाडु को पानी देना मुश्किल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 24 सितंबर 2026 को चित्रदुर्ग में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के ताज़ा निर्देश के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ना फिलहाल राज्य के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि राज्य इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा और स्थिति की समीक्षा जारी है।
CWRC का आदेश और कर्नाटक का विरोध
CWRC ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 4,000 क्यूसेक कावेरी जल प्रवाह सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'मुझे CWRC के कावेरी का पानी छोड़ने के आदेश के बारे में जानकारी मिल रही है। तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना मुश्किल है, क्योंकि राज्य में पानी का संकट है। राज्य इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि पर्याप्त जल उपलब्ध हुआ तो कर्नाटक पानी छोड़ेगा।
जलाशयों में पानी की आवक थमी, बारिश भी कम
शिवकुमार ने बताया कि कावेरी कैचमेंट एरिया में राज्य के जलाशयों में पानी का बहाव रुक गया है और मानसूनी वर्षा में भी उल्लेखनीय कमी आई है। उनके अनुसार, 'कावेरी कैचमेंट एरिया में राज्य के जलाशयों में पानी का बहाव रुक गया है। हम पर दबाव है। बारिश नहीं हो रही है।' उन्होंने कहा कि वे शाम को स्थिति की पुष्टि करेंगे।
जल संसाधन मंत्री के साथ समीक्षा जारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी उनके साथ हैं और सरकार का अगला कदम तय करने से पहले स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। शिवकुमार ने कहा, 'मेरे साथ जल संसाधन मंत्री भी हैं। इस स्थिति में मैं क्या कर सकता हूं, यह मैं बाद में बताऊंगा।'
विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि कर्नाटक ने इससे पहले कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) को सूचित किया था कि कावेरी बेसिन का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है और जलाशयों का उपलब्ध भंडार पेयजल तथा अन्य आवश्यक ज़रूरतों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सितंबर के आरंभ में ही CWRC की सिफारिश पर CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक जल प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था — जो ताज़ा आदेश से अधिक था। उस आदेश के बाद से ही कर्नाटक कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
यह घटनाक्रम कर्नाटक में व्यापक सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच सामने आया है। राज्य सरकार केंद्र सरकार से 'राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष' में अपने हिस्से की राशि समय से पहले जारी करने की माँग कर रही है, ताकि सूखा-प्रभावित किसानों और परिवारों तक राहत पहुँचाई जा सके।
आगे क्या होगा
कर्नाटक सरकार की अपील के बाद अब निगाहें CWMA और संबंधित न्यायिक मंचों की कार्यवाही पर टिकी हैं। दोनों राज्यों के बीच यह जल-विवाद दशकों पुराना है और हर सूखे के मौसम में राजनीतिक तनाव को नई धार देता है। शिवकुमार की शाम की घोषणा यह तय करेगी कि कर्नाटक कानूनी रास्ता चुनता है या किसी अंतरिम समझौते का विकल्प खोलता है।