24 सितंबर 2026
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कावेरी जल विवाद: CM शिवकुमार बोले- CWRC के आदेश के बाद भी तमिलनाडु को पानी देना मुश्किल

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कावेरी जल विवाद: CM शिवकुमार बोले- CWRC के आदेश के बाद भी तमिलनाडु को पानी देना मुश्किल

सारांश

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात के बीच CM शिवकुमार ने CWRC के 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश को चुनौती देने का ऐलान किया। कावेरी कैचमेंट में पानी की आवक ठप और बारिश नदारद — यह दशकों पुराना अंतरराज्यीय विवाद एक बार फिर सियासी और कानूनी केंद्र में है।

मुख्य बातें

CM डीके शिवकुमार ने 24 सितंबर 2026 को चित्रदुर्ग में कहा कि CWRC के आदेश के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी जल छोड़ना मुश्किल है।
CWRC ने 15 दिनों तक 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है; कर्नाटक इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा।
कावेरी कैचमेंट एरिया के जलाशयों में पानी की आवक रुक गई है और वर्षा में भी कमी आई है।
जल संसाधन मंत्री एन.
चालुवरायस्वामी के साथ मिलकर सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है।
सितंबर में ही CWMA ने 6,000 क्यूसेक छोड़ने का पुराना निर्देश दिया था; कर्नाटक तब से कानूनी विकल्प तलाश रहा है।
राज्य सरकार सूखा राहत के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष में केंद्र की राशि समय से पहले जारी करने की माँग कर रही है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 24 सितंबर 2026 को चित्रदुर्ग में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के ताज़ा निर्देश के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ना फिलहाल राज्य के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि राज्य इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा और स्थिति की समीक्षा जारी है।

CWRC का आदेश और कर्नाटक का विरोध

CWRC ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 4,000 क्यूसेक कावेरी जल प्रवाह सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'मुझे CWRC के कावेरी का पानी छोड़ने के आदेश के बारे में जानकारी मिल रही है। तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना मुश्किल है, क्योंकि राज्य में पानी का संकट है। राज्य इस आदेश के खिलाफ अपील करेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि पर्याप्त जल उपलब्ध हुआ तो कर्नाटक पानी छोड़ेगा।

जलाशयों में पानी की आवक थमी, बारिश भी कम

शिवकुमार ने बताया कि कावेरी कैचमेंट एरिया में राज्य के जलाशयों में पानी का बहाव रुक गया है और मानसूनी वर्षा में भी उल्लेखनीय कमी आई है। उनके अनुसार, 'कावेरी कैचमेंट एरिया में राज्य के जलाशयों में पानी का बहाव रुक गया है। हम पर दबाव है। बारिश नहीं हो रही है।' उन्होंने कहा कि वे शाम को स्थिति की पुष्टि करेंगे।

जल संसाधन मंत्री के साथ समीक्षा जारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी उनके साथ हैं और सरकार का अगला कदम तय करने से पहले स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। शिवकुमार ने कहा, 'मेरे साथ जल संसाधन मंत्री भी हैं। इस स्थिति में मैं क्या कर सकता हूं, यह मैं बाद में बताऊंगा।'

विवाद की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि कर्नाटक ने इससे पहले कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) को सूचित किया था कि कावेरी बेसिन का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है और जलाशयों का उपलब्ध भंडार पेयजल तथा अन्य आवश्यक ज़रूरतों के लिए संरक्षित किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब सितंबर के आरंभ में ही CWRC की सिफारिश पर CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक जल प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था — जो ताज़ा आदेश से अधिक था। उस आदेश के बाद से ही कर्नाटक कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

यह घटनाक्रम कर्नाटक में व्यापक सूखे जैसी परिस्थितियों के बीच सामने आया है। राज्य सरकार केंद्र सरकार से 'राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष' में अपने हिस्से की राशि समय से पहले जारी करने की माँग कर रही है, ताकि सूखा-प्रभावित किसानों और परिवारों तक राहत पहुँचाई जा सके।

आगे क्या होगा

कर्नाटक सरकार की अपील के बाद अब निगाहें CWMA और संबंधित न्यायिक मंचों की कार्यवाही पर टिकी हैं। दोनों राज्यों के बीच यह जल-विवाद दशकों पुराना है और हर सूखे के मौसम में राजनीतिक तनाव को नई धार देता है। शिवकुमार की शाम की घोषणा यह तय करेगी कि कर्नाटक कानूनी रास्ता चुनता है या किसी अंतरिम समझौते का विकल्प खोलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अपील, राजनीतिक बयानबाज़ी और अदालती दरवाज़ा। असली सवाल यह है कि दशकों बाद भी दोनों राज्यों के बीच कोई दीर्घकालिक जल-साझेदारी का ढाँचा क्यों नहीं बन पाया, जो सूखे के वर्षों में स्वत: लागू हो सके। CWRC और CWMA के आदेशों की बाध्यकारी प्रकृति पर कर्नाटक की बार-बार की अपीलें यह भी बताती हैं कि संघीय जल-प्रशासन तंत्र में क्रियान्वयन का गंभीर संकट है। जब तक जलाशय प्रबंधन को जलवायु-अनुकूल दीर्घकालिक नीति से नहीं जोड़ा जाता, यह विवाद हर मानसून के बाद नया रूप लेता रहेगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CWRC ने कर्नाटक को कावेरी जल छोड़ने का क्या आदेश दिया है?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 4,000 क्यूसेक कावेरी जल का प्रवाह सुनिश्चित करे। इससे पहले सितंबर में CWMA ने 6,000 क्यूसेक छोड़ने का निर्देश भी दिया था।
कर्नाटक पानी छोड़ने में असमर्थ क्यों है?
कर्नाटक के अनुसार कावेरी कैचमेंट एरिया के जलाशयों में पानी की आवक रुक गई है और वर्षा में भारी कमी आई है। राज्य सरकार का कहना है कि उपलब्ध जल भंडार को पेयजल और अन्य आवश्यक ज़रूरतों के लिए संरक्षित करना ज़रूरी है।
CM शिवकुमार ने आदेश के बारे में क्या कहा?
CM डीके शिवकुमार ने 24 सितंबर 2026 को चित्रदुर्ग में कहा कि राज्य CWRC के आदेश के खिलाफ अपील करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पर्याप्त पानी उपलब्ध हुआ तो कर्नाटक पानी छोड़ेगा।
कावेरी जल विवाद में अब आगे क्या होगा?
कर्नाटक सरकार CWRC के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर करेगी। जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी के साथ स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार अपना अगला कदम घोषित करेगी। मामला CWMA और संभवतः न्यायिक मंच तक जा सकता है।
कर्नाटक में सूखे के हालात और कावेरी विवाद का क्या संबंध है?
राज्य सरकार के अनुसार कर्नाटक व्यापक सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है और केंद्र से राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की राशि समय से पहले जारी करने की माँग की गई है। इसी पृष्ठभूमि में कावेरी जल छोड़ना राज्य के लिए और कठिन हो गया है, क्योंकि पेयजल और कृषि ज़रूरतें पहले से दबाव में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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