29 जुलाई 2026
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पंजाब में धान बुआई से पहले DAP-यूरिया संकट की आशंका, केवल सिंह ढिल्लों ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र

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पंजाब में धान बुआई से पहले DAP-यूरिया संकट की आशंका, केवल सिंह ढिल्लों ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र

सारांश

धान बुआई का मौसम शुरू होते ही पंजाब में DAP और यूरिया की कमी का पुराना संकट फिर सिर उठा रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने जेपी नड्डा को पत्र लिखकर 2-3 लाख MT बफर स्टॉक और रियल-टाइम निगरानी तंत्र की माँग की — क्योंकि देरी का मतलब है फसल, पानी और खरीद व्यवस्था तीनों पर असर।

मुख्य बातें

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 11 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर DAP और यूरिया की तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करने की माँग की।
राज्य में कम से कम 2 से 3 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाए रखने की माँग की गई है।
खाद की कमी से किसानों को एमआरपी से अधिक दाम पर उर्वरक खरीदना पड़ता है; जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ती है।
उर्वरक मंत्रालय, इफको, एनएफएल, कृभको और पंजाब सरकार के बीच रियल-टाइम मॉनिटरिंग तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया।
खाद की जमाखोरी, अवैध भंडारण और अन्य राज्यों में डायवर्जन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की माँग।

पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 11 जून 2026 को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और यूरिया की समय पर एवं पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की माँग की है। धान की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है और हर साल जून-जुलाई में सामने आने वाले खाद संकट को देखते हुए ढिल्लों ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

बैठक का संदर्भ और मांग की पृष्ठभूमि

ढिल्लों ने अपने पत्र में 6 जून को जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया, जिसमें पंजाब के किसानों के लिए उर्वरक उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि धान बुआई का महत्वपूर्ण समय आ चुका है और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब विलंब की कोई गुंजाइश नहीं है।

किसानों पर असर — कतारें, देरी और महंगी खाद

ढिल्लों के अनुसार प्रत्येक वर्ष जून-जुलाई में राज्य के कई जिलों और खुदरा विक्रय केंद्रों पर डीएपी और यूरिया की भारी कमी देखी जाती है। किसानों को सहकारी समितियों और खाद बिक्री केंद्रों पर घंटों — कभी-कभी कई दिनों तक — कतारों में प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे बुआई में देरी होती है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन, जल उपयोग दक्षता और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पड़ता है।

गौरतलब है कि खाद की किल्लत के दौरान जमाखोरी और कालाबाजारी भी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं और उनकी आर्थिक परेशानी और गहरी हो जाती है।

केंद्र के समक्ष पाँच प्रमुख माँगें

ढिल्लों ने अपने पत्र में पाँच ठोस माँगें रखी हैं। पहली — खरीफ 2026 के लिए पंजाब को अतिरिक्त डीएपी आवंटन तत्काल जारी किया जाए। दूसरी — राज्य में कम से कम 2 से 3 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाए रखा जाए। तीसरी — यूरिया की निर्बाध आपूर्ति के लिए मासिक आपूर्ति कार्यक्रम तैयार कर पंजाब सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाए।

चौथी माँग में उर्वरक मंत्रालय, इफको, एनएफएल, कृभको और पंजाब सरकार के बीच रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं समन्वय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। पाँचवीं माँग में खाद की जमाखोरी, अवैध भंडारण और दूसरे राज्यों में डायवर्जन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की अपील की गई है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का सवाल

ढिल्लों ने जोर देकर कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कृषि लागत और किसानों की आमदनी पहले से ही चर्चा के केंद्र में है। उनके अनुसार बुआई के इस निर्णायक दौर में उर्वरक आपूर्ति में कोई भी व्यवधान न केवल लाखों किसान परिवारों को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय कृषि उत्पादन और खाद्यान्न खरीद व्यवस्था पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

आगे क्या होगा

केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उर्वरक मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, जबकि धान बुआई की समय-सीमा तेजी से नजदीक आ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत सुधार से नहीं। असली सवाल यह है कि इफको, एनएफएल और कृभको जैसी सरकारी एजेंसियाँ बुआई का कैलेंडर जानते हुए भी बफर स्टॉक क्यों नहीं बनाए रखतीं। जब तक आवंटन, वितरण और निगरानी को एक बाध्यकारी ढाँचे में नहीं बाँधा जाता, तब तक यह माँग अगले सीजन में फिर दोहराई जाएगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में DAP और यूरिया की कमी का किसानों पर क्या असर पड़ता है?
खाद की कमी के कारण किसानों को सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों पर घंटों-कई दिनों तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे धान की बुआई में देरी होती है। इससे फसल उत्पादन, जल उपयोग दक्षता और सरकारी खरीद व्यवस्था तीनों प्रभावित होती हैं। साथ ही जमाखोरी के कारण किसानों को एमआरपी से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्र से कौन-सी पाँच माँगें रखी हैं?
ढिल्लों ने खरीफ 2026 के लिए अतिरिक्त DAP आवंटन, 2-3 लाख MT बफर स्टॉक, मासिक यूरिया आपूर्ति कार्यक्रम, उर्वरक एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय तंत्र और जमाखोरी व डायवर्जन पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।
क्या यह पंजाब में उर्वरक संकट की नई समस्या है?
नहीं, ढिल्लों के पत्र के अनुसार यह हर साल जून-जुलाई में दोहराई जाने वाली स्थिति है। प्रत्येक खरीफ सीजन में राज्य के कई जिलों में DAP और यूरिया की कमी सामने आती है, जो एक दीर्घकालिक आपूर्ति-नियोजन की समस्या को दर्शाती है।
इस मामले में जेपी नड्डा की क्या भूमिका है?
जेपी नड्डा केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं और उर्वरक आवंटन व आपूर्ति नीति उनके मंत्रालय के अधीन है। ढिल्लों ने 6 जून को उनके साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए यह पत्र लिखा है।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग तंत्र की माँग क्यों की गई है?
ढिल्लों का सुझाव है कि उर्वरक मंत्रालय, इफको, एनएफएल, कृभको और पंजाब सरकार के बीच एक समन्वित रियल-टाइम निगरानी प्रणाली हो ताकि स्टॉक की स्थिति तत्काल ट्रैक की जा सके और कमी से पहले ही कार्रवाई की जा सके। यह जमाखोरी और डायवर्जन रोकने में भी सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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