पंजाब में धान बुआई से पहले DAP-यूरिया संकट की आशंका, केवल सिंह ढिल्लों ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 11 जून 2026 को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और यूरिया की समय पर एवं पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की माँग की है। धान की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है और हर साल जून-जुलाई में सामने आने वाले खाद संकट को देखते हुए ढिल्लों ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
बैठक का संदर्भ और मांग की पृष्ठभूमि
ढिल्लों ने अपने पत्र में 6 जून को जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक का उल्लेख किया, जिसमें पंजाब के किसानों के लिए उर्वरक उपलब्धता पर विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि धान बुआई का महत्वपूर्ण समय आ चुका है और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब विलंब की कोई गुंजाइश नहीं है।
किसानों पर असर — कतारें, देरी और महंगी खाद
ढिल्लों के अनुसार प्रत्येक वर्ष जून-जुलाई में राज्य के कई जिलों और खुदरा विक्रय केंद्रों पर डीएपी और यूरिया की भारी कमी देखी जाती है। किसानों को सहकारी समितियों और खाद बिक्री केंद्रों पर घंटों — कभी-कभी कई दिनों तक — कतारों में प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे बुआई में देरी होती है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन, जल उपयोग दक्षता और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पड़ता है।
गौरतलब है कि खाद की किल्लत के दौरान जमाखोरी और कालाबाजारी भी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं और उनकी आर्थिक परेशानी और गहरी हो जाती है।
केंद्र के समक्ष पाँच प्रमुख माँगें
ढिल्लों ने अपने पत्र में पाँच ठोस माँगें रखी हैं। पहली — खरीफ 2026 के लिए पंजाब को अतिरिक्त डीएपी आवंटन तत्काल जारी किया जाए। दूसरी — राज्य में कम से कम 2 से 3 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाए रखा जाए। तीसरी — यूरिया की निर्बाध आपूर्ति के लिए मासिक आपूर्ति कार्यक्रम तैयार कर पंजाब सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाए।
चौथी माँग में उर्वरक मंत्रालय, इफको, एनएफएल, कृभको और पंजाब सरकार के बीच रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं समन्वय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। पाँचवीं माँग में खाद की जमाखोरी, अवैध भंडारण और दूसरे राज्यों में डायवर्जन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की अपील की गई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का सवाल
ढिल्लों ने जोर देकर कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में कृषि लागत और किसानों की आमदनी पहले से ही चर्चा के केंद्र में है। उनके अनुसार बुआई के इस निर्णायक दौर में उर्वरक आपूर्ति में कोई भी व्यवधान न केवल लाखों किसान परिवारों को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय कृषि उत्पादन और खाद्यान्न खरीद व्यवस्था पर भी व्यापक असर डाल सकता है।
आगे क्या होगा
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उर्वरक मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, जबकि धान बुआई की समय-सीमा तेजी से नजदीक आ रही है।