रत्नागिरी में यूरिया संकट: खरीफ सीजन में 44 हजार हेक्टेयर धान की खेती पर मंडराया खतरा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में खरीफ सीजन के ठीक बीच यूरिया खाद की गंभीर कमी ने किसानों की नींद उड़ा दी है। कोंकण क्षेत्र में 44 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की खेती होती है, और इस समय जब बुवाई का काम जोरों पर है, पर्याप्त यूरिया न मिलने से हजारों किसान परेशान हैं। जिला कृषि विभाग के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं और 1 जुलाई तक अतिरिक्त स्टॉक आने की उम्मीद जताई गई है।
मांग और आपूर्ति का संकट
इस खरीफ सीजन में रत्नागिरी जिले को कुल 6,500 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। अब तक केवल 4,000 मीट्रिक टन ही प्राप्त हो सकी है — यानी करीब 2,500 मीट्रिक टन की कमी बनी हुई है। आपूर्ति चार रेक (मालगाड़ी के डिब्बों) के जरिए हुई है, जबकि सामान्य वर्षों में सात से आठ रेक तक खाद जिले में पहुँचती है।
म्हापाडा एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट बाबा दाली ने कहा कि इस वर्ष उर्वरकों की लगभग 50 प्रतिशत कमी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को नियमित और पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति नहीं हो रही है। फिलहाल केवल दीपक फर्टिलाइजर्स और जुवारी कंपनियों का खाद कुछ मात्रा में उपलब्ध है।
बफर स्टॉक लगभग समाप्त
जिला कृषि विभाग ने आपात स्थिति को देखते हुए बफर स्टॉक का वितरण शुरू किया, लेकिन 650 टन के उस बफर स्टॉक में से अब केवल 90 टन खाद शेष बची है। यह स्थिति दर्शाती है कि संकट कितनी तेजी से गहरा हो रहा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) का खाद सामान्यतः सात से आठ रेक की मात्रा में जिले में पहुँचता है, परंतु इस बार अब तक केवल चार रेक ही प्राप्त हुए हैं — जो आपूर्ति में करीब आधी कटौती को दर्शाता है।
किसानों में आक्रोश, गाँव-गाँव में असर
बाबा दाली के अनुसार, आपूर्ति में यह कमी गाँव स्तर तक महसूस की जा रही है और किसान काफी नाराज हैं। धान की बुवाई का यह सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, जब फसल को यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है। ऐसे में खाद न मिलने से उपज पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र का कृषि क्षेत्र पहले से ही अनिश्चित मानसून और बढ़ती लागत की दोहरी मार झेल रहा है। कोंकण में धान एकमात्र प्रमुख खरीफ फसल है, इसलिए यूरिया की कमी का सीधा और व्यापक असर किसानों की आजीविका पर पड़ता है।
कृषि विभाग की सलाह और अगला कदम
जिला कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल यूरिया पर निर्भर न रहें और संतुलित पोषण के लिए सुफला तथा अन्य उर्वरकों का भी उपयोग करें। विभाग ने उम्मीद जताई है कि जून के अंत या 1 जुलाई 2026 तक जिले में उर्वरकों का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध हो जाएगा।
यदि समय पर आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई, तो जिले के 44 हजार हेक्टेयर धान क्षेत्र में उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।