कर्नाटक में मानसून फसलों पर संकट: यूरिया भंडार 2.80 लाख मीट्रिक टन, अप्रैल-मई में 4.25 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति लंबित

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कर्नाटक में मानसून फसलों पर संकट: यूरिया भंडार 2.80 लाख मीट्रिक टन, अप्रैल-मई में 4.25 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति लंबित

सारांश

कर्नाटक में इस साल यूरिया का प्रारंभिक भंडार चार वर्षों के सबसे निचले स्तर 2.80 लाख मीट्रिक टन पर है। मध्य पूर्व संकट से वैश्विक आपूर्ति लड़खड़ाई है और अप्रैल-मई में 4.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अभी लंबित है — खरीफ बुवाई से ठीक पहले किसानों के लिए यह खतरे की घंटी है।

मुख्य बातें

कर्नाटक में 2026 के लिए यूरिया का प्रारंभिक भंडार 2.80 लाख मीट्रिक टन — 2024 के 5.41 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले लगभग आधा।
मध्य पूर्व संकट के कारण अमोनिया, LNG, फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड के आयात में अस्थिरता।
केंद्र ने मानसून सीजन के लिए कुल 30.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किए, जिनमें 11.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया शामिल।
अप्रैल-मई 2026 में 8.57 लाख मीट्रिक टन की माँग के विरुद्ध केवल 4.31 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति; 4.25 लाख मीट्रिक टन लंबित।
मई में अकेले 0.65 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 0.78 लाख मीट्रिक टन DAP की आपूर्ति बाकी।

कर्नाटक कृषि मंत्रालय ने 18 मई 2026 को चेतावनी दी कि इस वर्ष यूरिया उर्वरक का प्रारंभिक भंडार पिछले तीन वर्षों के मुकाबले सबसे कम है — मात्र 2.80 लाख मीट्रिक टन — और मध्य पूर्व संकट के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उत्पन्न अस्थिरता के कारण 2026 के मानसून सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की आपूर्ति राज्य की माँग के अनुपात में नहीं रही, जिससे किसानों के सामने खरीफ बुवाई से पहले ही संकट खड़ा होने की आशंका है।

भंडार में गिरावट का क्रम

मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2023 में यूरिया का प्रारंभिक भंडार 3.91 लाख मीट्रिक टन, 2024 में 5.41 लाख मीट्रिक टन और 2025 में 3.46 लाख मीट्रिक टन था। चालू वर्ष में यह घटकर 2.80 लाख मीट्रिक टन रह गया है — चार वर्षों में सबसे निचला स्तर। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब मानसून की समय पर शुरुआत की उम्मीद के बीच किसान खाद खरीदने की तैयारी में हैं।

वैश्विक कारण और आयात अस्थिरता

कृषि मंत्री ने बताया कि मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण अमोनिया, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), फॉस्फोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कच्चे माल के आयात में अनिश्चितता बनी हुई है। ये सभी उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक घटक हैं। इस वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर घरेलू उत्पादन और राज्यों को होने वाली आपूर्ति पर पड़ रहा है।

केंद्र का आवंटन और आपूर्ति का अंतर

केंद्र सरकार ने मौजूदा मानसून सीजन के लिए कर्नाटक को कुल 30.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किए हैं। इसमें 11.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.00 लाख मीट्रिक टन डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP), 2.12 लाख मीट्रिक टन म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP), 11.88 लाख मीट्रिक टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक और 0.95 लाख मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) शामिल हैं।

हालाँकि, अप्रैल में राज्य की माँग 4.02 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि केंद्र ने केवल 2.54 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की — यानी 1.48 लाख मीट्रिक टन की कमी रही। इस कमी में मुख्य रूप से 0.38 लाख मीट्रिक टन DAP और 0.14 लाख मीट्रिक टन यूरिया शामिल हैं।

मई में स्थिति और विकट है: 4.54 लाख मीट्रिक टन की माँग के मुकाबले अब तक केवल 1.77 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है और 2.77 लाख मीट्रिक टन अभी भी लंबित है। इसमें 0.65 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 0.78 लाख मीट्रिक टन DAP प्रमुख हैं।

अप्रैल-मई का कुल हिसाब

मंत्री के अनुसार, अप्रैल से मई 2026 तक विभिन्न ग्रेड के उर्वरकों की कुल माँग 8.57 लाख मीट्रिक टन रही। इसमें से केवल 4.31 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हो पाई है, जबकि 4.25 लाख मीट्रिक टन — यानी कुल माँग का करीब आधा — अभी लंबित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र ने पहले उपलब्ध प्रारंभिक भंडार को ध्यान में रखे बिना आवंटन किया था, जिससे वर्तमान में फिलहाल किसी भी प्रकार के उर्वरक की तत्काल कमी नहीं है — लेकिन आगामी हफ्तों में यह स्थिति बदल सकती है।

आगे की राह

कर्नाटक कृषि मंत्रालय ने केंद्र सरकार से माँग के अनुपात में यूरिया और DAP की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में लंबित आपूर्ति नहीं पहुँची, तो खरीफ बुवाई के मौसम में कर्नाटक के किसानों को उर्वरक के लिए लंबी कतारों और ऊँचे बाज़ार भावों का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ प्रारंभिक भंडार को नज़रअंदाज़ कर माँग-आधारित आवंटन किया जाता है। मध्य पूर्व संकट को कारण बताना आंशिक सच है — भारत की आयात-निर्भरता और घरेलू उर्वरक उत्पादन में दीर्घकालिक निवेश की कमी इस भेद्यता की जड़ है। जब अप्रैल-मई में ही माँग का आधा हिस्सा अपूर्ण रहे, तो खरीफ के चरम सीजन में किसानों पर असर अपरिहार्य है। सवाल यह है कि क्या केंद्र इस लंबित 4.25 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति बुवाई की खिड़की बंद होने से पहले सुनिश्चित कर पाएगा।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में उर्वरक की कमी क्यों हो रही है?
कर्नाटक में उर्वरक की कमी के दो प्रमुख कारण हैं — पहला, मध्य पूर्व संकट के चलते अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल के आयात में वैश्विक अस्थिरता; और दूसरा, केंद्र सरकार द्वारा राज्य की माँग के अनुपात में यूरिया और DAP की आपूर्ति न करना। अप्रैल-मई 2026 में कुल 8.57 लाख मीट्रिक टन की माँग के मुकाबले केवल 4.31 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है।
2026 में कर्नाटक का यूरिया भंडार कितना है और पिछले वर्षों से कैसे तुलना होती है?
2026 में कर्नाटक का प्रारंभिक यूरिया भंडार 2.80 लाख मीट्रिक टन है। तुलनात्मक रूप से 2023 में 3.91 लाख, 2024 में 5.41 लाख और 2025 में 3.46 लाख मीट्रिक टन था। यह चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
केंद्र सरकार ने कर्नाटक को 2026 मानसून सीजन के लिए कितना उर्वरक आवंटित किया है?
केंद्र सरकार ने 2026 मानसून सीजन के लिए कर्नाटक को कुल 30.05 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किए हैं। इसमें 11.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.00 लाख मीट्रिक टन DAP, 2.12 लाख मीट्रिक टन MOP, 11.88 लाख मीट्रिक टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक और 0.95 लाख मीट्रिक टन SSP शामिल हैं।
कर्नाटक के किसानों पर इस उर्वरक संकट का क्या असर पड़ सकता है?
यदि लंबित 4.25 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति खरीफ बुवाई से पहले नहीं हुई, तो कर्नाटक के किसानों को उर्वरक की कमी, लंबी कतारों और संभावित रूप से ऊँचे बाज़ार भावों का सामना करना पड़ सकता है। मानसून फसलों की बुवाई के लिए यूरिया और DAP की समय पर उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मई 2026 में कर्नाटक में उर्वरक आपूर्ति की स्थिति क्या है?
मई 2026 में अब तक 4.54 लाख मीट्रिक टन की माँग के मुकाबले केवल 1.77 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई है। 2.77 लाख मीट्रिक टन अभी लंबित है, जिसमें 0.65 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 0.78 लाख मीट्रिक टन DAP प्रमुख हैं।
राष्ट्र प्रेस
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