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राजस्थान 'एक राज्य-एक चुनाव' में बनेगा अग्रणी, राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह का ऐलान

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राजस्थान 'एक राज्य-एक चुनाव' में बनेगा अग्रणी, राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह का ऐलान

सारांश

राजस्थान 'एक राज्य-एक चुनाव' की दिशा में देश का अग्रणी राज्य बनने को तैयार है। राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने पंचायती राज की जन्मस्थली होने के गौरव का हवाला देते हुए सभी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों के एकसाथ चुनाव कराने को पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में बड़ा कदम बताया।

मुख्य बातें

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने 11 अगस्त को घोषणा की कि राजस्थान 'एक राज्य-एक चुनाव' लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
सभी शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों के चुनाव एक साथ कराने की योजना, जिससे खर्च में कमी और विकास कार्यों में तेज़ी आने की उम्मीद।
राजस्थान को पंचायती राज व्यवस्था की जन्मस्थली बताते हुए इस पहल को ऐतिहासिक अवसर करार दिया गया।
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) को 'लोकतंत्र की प्रयोगशाला' बनाने पर ज़ोर; मॉक पोल, क्विज़ और नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियाँ प्रस्तावित।
युवा वोटरों से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और अफवाहों व प्रलोभन से दूर रहकर मतदान करने का आग्रह।

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मंगलवार, 11 अगस्त को घोषणा की कि राजस्थान देश में 'एक राज्य-एक चुनाव' पहल को लागू करने वाला अग्रणी राज्य बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह बात जयपुर स्थित सचिवालय के एनआईसी मीटिंग हॉल से इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) के अधिकारियों और कॉलेज प्रिंसिपलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कही।

मुख्य घोषणा और पहल का स्वरूप

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों के लिए एक साथ चुनाव कराने का निर्णय चुनावी प्रक्रिया को सरल, अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राजस्थान को देश में पंचायती राज व्यवस्था की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है, और अब यह राज्य 'एक राज्य-एक चुनाव' के माध्यम से एक बार फिर इतिहास रचने की स्थिति में है।

इस पहल से प्रशासनिक निरंतरता को बढ़ावा मिलने, संसाधनों का बेहतर उपयोग होने, चुनावी खर्चों में कमी आने और विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने में सहायता मिलने की उम्मीद जताई गई है। गौरतलब है कि केंद्र स्तर पर 'एक देश-एक चुनाव' की बहस के बीच राजस्थान का यह कदम राज्य स्तर पर उसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

युवा वोटरों से आह्वान

सिंह ने युवा वोटरों से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हों और वे सही जानकारी के आधार पर मतदान का निर्णय लें। उन्होंने युवाओं को अफवाहों, प्रलोभन और बाहरी दबाव से दूर रहकर समझदारी से मताधिकार का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को न केवल स्वयं भाग लेना चाहिए, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के सदस्यों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।

इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब को 'लोकतंत्र की प्रयोगशाला' बनाने का संकल्प

कार्यक्रम में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) को 'लोकतंत्र की प्रयोगशाला' के रूप में विकसित करने पर ज़ोर दिया गया। अधिकारियों और कॉलेज प्रिंसिपलों को मॉक पोल, रोल-प्लेइंग एक्सरसाइज, क्विज़ और अन्य इंटरैक्टिव गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा निबंध-लेखन, कविता पाठ, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताएँ, स्लोगन प्रतियोगिताएँ, वोटर-जागरूकता रैलियाँ, नुक्कड़ नाटक और वोटिंग-थीम वाले गाने जैसे रचनात्मक माध्यमों का उपयोग करने का आह्वान किया गया।

राज्य चुनाव आयोग ने ईएलसी अधिकारियों और युवा वोटरों से अपील की कि वे चुनावी साक्षरता गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करें और आयोग के आधिकारिक हैंडल को टैग करें। इसके लिए आयोग के सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का क्यूआर कोड भी साझा किया गया।

कार्यक्रम में भागीदारी

इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में विभिन्न जिलों के एसवीईईपी नोडल अधिकारी, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कॉलेज प्रिंसिपल और ईएलसी अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन युवाओं द्वारा जागरूक मतदाता बनने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन राज्य में चुनावी साक्षरता को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केंद्र की राह से पहले खुद कदम बढ़ा रहा है। हालाँकि, यह पहल प्रशासनिक दक्षता का आकर्षक तर्क देती है, लेकिन सवाल यह है कि एक साथ चुनाव कराने से स्थानीय मुद्दे राज्य-स्तरीय राजनीतिक ध्रुवीकरण में न दब जाएँ। पंचायती राज की जन्मस्थली होने का दावा प्रेरक है, पर असली कसौटी यह होगी कि क्या यह मॉडल स्थानीय स्वशासन को सशक्त करता है या महज़ चुनावी लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान की 'एक राज्य-एक चुनाव' पहल क्या है?
यह पहल राजस्थान के सभी शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों के चुनाव एक साथ कराने की योजना है। राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह के अनुसार, इससे चुनावी खर्च में कमी, प्रशासनिक निरंतरता और विकास कार्यों में तेज़ी आएगी।
इस पहल की घोषणा कब और किसने की?
राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने 11 अगस्त को जयपुर में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के अधिकारियों और कॉलेज प्रिंसिपलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान यह घोषणा की।
इस पहल से राजस्थान को क्या फायदे होने की उम्मीद है?
इस पहल से प्रशासनिक निरंतरता, संसाधनों का बेहतर उपयोग, चुनाव से जुड़े खर्चों में कमी और विकास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कुशल बनेगी।
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) की इसमें क्या भूमिका है?
ईएलसी को 'लोकतंत्र की प्रयोगशाला' के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ मॉक पोल, क्विज़, नुक्कड़ नाटक और वोटर-जागरूकता रैलियाँ जैसी गतिविधियाँ आयोजित होंगी। कॉलेज प्रिंसिपलों और ईएलसी अधिकारियों को युवाओं में चुनावी साक्षरता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजस्थान को पंचायती राज से इस पहल से क्यों जोड़ा जा रहा है?
राज्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, राजस्थान को देश में पंचायती राज व्यवस्था की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर राज्य 'एक राज्य-एक चुनाव' में भी अग्रणी भूमिका निभाने का दावा कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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