पंजाब यूरिया घोटाला: भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों ने AAP सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, CBI जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 27 जून 2026 को चंडीगढ़ में आरोप लगाया कि राज्य में किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति की जाने वाली रियायती यूरिया उर्वरक की बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण में संचालित एक संगठित भ्रष्टाचार रैकेट करार दिया और पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच की माँग की।
मुख्य आरोप: क्या है कथित घोटाला
ढिल्लों के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों को 45 किलो यूरिया की एक बोरी बाज़ार मूल्य ₹2,800 के बजाय मात्र ₹266 में उपलब्ध करा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भारी सब्सिडी का फायदा उठाकर उर्वरक माफिया कथित तौर पर रियायती यूरिया को किसानों तक पहुँचाने के बजाय सरकारी संयंत्रों और कारखानों में भेज रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से मार्कफेड और मिल्कफेड जैसे सरकारी संस्थानों का नाम लेते हुए कहा कि इन इकाइयों तक हज़ारों बोरी रियायती यूरिया का पहुँचना — वह भी बिना किसी दस्तावेज़ या बैच नंबर के — सीधे तौर पर उच्च स्तरीय सरकारी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
सरकारी संरक्षण का आरोप
ढिल्लों ने कहा कि चार सरकारी संयंत्रों तक बिना दस्तावेज़ के हज़ारों बोरे पहुँचना यह सिद्ध करता है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पूर्व में भी केंद्र सरकार के समक्ष पंजाब में यूरिया और डीएपी उर्वरकों की कमी का मुद्दा उठाया था।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों की आवश्यकता से अधिक उर्वरक की आपूर्ति करती रही है। ऐसे में रियायती उर्वरक की यह कथित हेराफेरी न केवल किसानों को उनके हक से वंचित करती है, बल्कि केंद्र सरकार के करोड़ों रुपये के सब्सिडी बजट को भी नुकसान पहुँचाती है।
AAP सरकार पर सीधा निशाना
राज्य भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि केवल निजी कंपनियों के खिलाफ मामले दर्ज करना 'दिखावा मात्र' होगा। उनके अनुसार, राज्य सरकार इस घोटाले के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है और जब तक CBI जांच नहीं होती, तब तक घोटाले की असली सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी माँग की।
किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब का किसान वर्ग खरीफ सीज़न की बुवाई के लिए उर्वरक की उपलब्धता पर निर्भर है। कथित हेराफेरी के कारण रियायती यूरिया की कमी से किसानों को या तो बाज़ार मूल्य पर खाद खरीदनी पड़ सकती है या फसल की बुवाई में देरी का सामना करना पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला केंद्र की सब्सिडी व्यवस्था में राज्य-स्तरीय वितरण की खामियों को भी उजागर करता है।
आगे क्या होगा
ढिल्लों की CBI जांच की माँग के बाद अब देखना होगा कि पंजाब की AAP सरकार इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है। भाजपा के इस आक्रामक रुख से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है। CBI जांच के लिए केंद्र सरकार की सहमति या न्यायालय का आदेश आवश्यक होगा, जो इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।