28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब यूरिया घोटाला: भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों ने AAP सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, CBI जांच की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब यूरिया घोटाला: भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों ने AAP सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, CBI जांच की मांग

सारांश

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने AAP सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है — किसानों के लिए ₹266 में मिलने वाली रियायती यूरिया कथित तौर पर मार्कफेड और मिल्कफेड जैसे सरकारी संयंत्रों में भेजी जा रही है। भाजपा ने इसे राजनीतिक संरक्षण में चल रहा घोटाला बताते हुए CBI जांच की माँग की है।

मुख्य बातें

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 27 जून 2026 को AAP सरकार पर रियायती यूरिया घोटाले का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार 45 किलो यूरिया की बोरी किसानों को ₹266 में देती है, जबकि बाज़ार मूल्य ₹2,800 है।
कथित तौर पर हज़ारों बोरी रियायती यूरिया बिना दस्तावेज़ या बैच नंबर के चार सरकारी संयंत्रों — मार्कफेड और मिल्कफेड समेत — तक पहुँची।
ढिल्लों ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों की मिलीभगत का आरोप लगाया।
भाजपा ने पूरे मामले की CBI जांच और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 27 जून 2026 को चंडीगढ़ में आरोप लगाया कि राज्य में किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति की जाने वाली रियायती यूरिया उर्वरक की बड़े पैमाने पर हेराफेरी हो रही है। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण में संचालित एक संगठित भ्रष्टाचार रैकेट करार दिया और पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच की माँग की।

मुख्य आरोप: क्या है कथित घोटाला

ढिल्लों के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों को 45 किलो यूरिया की एक बोरी बाज़ार मूल्य ₹2,800 के बजाय मात्र ₹266 में उपलब्ध करा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भारी सब्सिडी का फायदा उठाकर उर्वरक माफिया कथित तौर पर रियायती यूरिया को किसानों तक पहुँचाने के बजाय सरकारी संयंत्रों और कारखानों में भेज रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से मार्कफेड और मिल्कफेड जैसे सरकारी संस्थानों का नाम लेते हुए कहा कि इन इकाइयों तक हज़ारों बोरी रियायती यूरिया का पहुँचना — वह भी बिना किसी दस्तावेज़ या बैच नंबर के — सीधे तौर पर उच्च स्तरीय सरकारी मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

सरकारी संरक्षण का आरोप

ढिल्लों ने कहा कि चार सरकारी संयंत्रों तक बिना दस्तावेज़ के हज़ारों बोरे पहुँचना यह सिद्ध करता है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पूर्व में भी केंद्र सरकार के समक्ष पंजाब में यूरिया और डीएपी उर्वरकों की कमी का मुद्दा उठाया था।

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसानों की आवश्यकता से अधिक उर्वरक की आपूर्ति करती रही है। ऐसे में रियायती उर्वरक की यह कथित हेराफेरी न केवल किसानों को उनके हक से वंचित करती है, बल्कि केंद्र सरकार के करोड़ों रुपये के सब्सिडी बजट को भी नुकसान पहुँचाती है।

AAP सरकार पर सीधा निशाना

राज्य भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि केवल निजी कंपनियों के खिलाफ मामले दर्ज करना 'दिखावा मात्र' होगा। उनके अनुसार, राज्य सरकार इस घोटाले के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है और जब तक CBI जांच नहीं होती, तब तक घोटाले की असली सच्चाई सामने नहीं आएगी। उन्होंने सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी माँग की।

किसानों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब का किसान वर्ग खरीफ सीज़न की बुवाई के लिए उर्वरक की उपलब्धता पर निर्भर है। कथित हेराफेरी के कारण रियायती यूरिया की कमी से किसानों को या तो बाज़ार मूल्य पर खाद खरीदनी पड़ सकती है या फसल की बुवाई में देरी का सामना करना पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला केंद्र की सब्सिडी व्यवस्था में राज्य-स्तरीय वितरण की खामियों को भी उजागर करता है।

आगे क्या होगा

ढिल्लों की CBI जांच की माँग के बाद अब देखना होगा कि पंजाब की AAP सरकार इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देती है। भाजपा के इस आक्रामक रुख से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है। CBI जांच के लिए केंद्र सरकार की सहमति या न्यायालय का आदेश आवश्यक होगा, जो इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा तथ्यों की पुष्टि न हो। रियायती उर्वरक वितरण में राज्य-स्तरीय रिसाव कोई नई समस्या नहीं है — यह देशभर में दशकों पुरानी संरचनात्मक खामी है, जिसे BJP और कांग्रेस दोनों की सरकारें पूरी तरह नहीं सुधार पाई हैं। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार CBI जांच का आदेश देगी, या यह माँग विधानसभा चुनावों से पहले की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मात्र है। किसानों के हित में पारदर्शी जांच ज़रूरी है — चाहे दोषी कोई भी हो।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब यूरिया घोटाला क्या है?
आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए ₹266 प्रति बोरी की दर से आपूर्ति की जाने वाली रियायती यूरिया को कथित तौर पर मार्कफेड और मिल्कफेड जैसे सरकारी संयंत्रों में भेजा जा रहा है, जिससे किसान इस सब्सिडी से वंचित हो रहे हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इसे AAP सरकार के संरक्षण में चल रहा भ्रष्टाचार रैकेट बताया है।
भाजपा ने CBI जांच की माँग क्यों की है?
ढिल्लों का कहना है कि चार सरकारी संयंत्रों तक बिना दस्तावेज़ या बैच नंबर के हज़ारों बोरी यूरिया पहुँचना वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं। उनके अनुसार, केवल निजी कंपनियों पर कार्रवाई दिखावा होगी और निष्पक्ष जांच के लिए CBI आवश्यक है।
रियायती यूरिया की हेराफेरी से किसानों पर क्या असर पड़ता है?
केंद्र सरकार ₹2,800 बाज़ार मूल्य वाली 45 किलो यूरिया की बोरी किसानों को मात्र ₹266 में देती है। कथित हेराफेरी से किसानों को यह सब्सिडी नहीं मिल पाती और उन्हें बाज़ार मूल्य पर खाद खरीदनी पड़ सकती है, जिससे खेती की लागत बढ़ती है।
मार्कफेड और मिल्कफेड का इस मामले में क्या संबंध है?
भाजपा के आरोपों के अनुसार, ये दोनों पंजाब सरकार के सहकारी संस्थान हैं जहाँ कथित तौर पर रियायती यूरिया की बोरियाँ बिना उचित दस्तावेज़ के पहुँचाई गईं। ढिल्लों का कहना है कि सरकारी संस्थानों तक इस तरह की आपूर्ति उच्च स्तरीय मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
क्या पंजाब में पहले भी उर्वरक की कमी का मुद्दा उठा है?
हाँ, ढिल्लों ने स्वयं कहा कि उन्होंने पूर्व में भी केंद्र सरकार के समक्ष पंजाब में यूरिया और डीएपी उर्वरकों की कमी का मुद्दा उठाया था। भाजपा का कहना है कि केंद्र ने ज़रूरत से अधिक उर्वरक आपूर्ति की, फिर भी राज्य में कमी रही — जो कथित हेराफेरी की ओर संकेत करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले